
मछली और अन्य समुद्री खाद्य पदार्थ (सीफूड) हमेशा से ही हमारे स्वास्थ्य के लिए बेहद फायदेमंद माने जाते रहे हैं। ओमेगा-3 फैटी एसिड का एक बेहतरीन स्रोत होने के कारण इन्हें संतुलित आहार का अहम हिस्सा माना जाता है। हालांकि, हाल ही में सामने आए एक वैज्ञानिक अध्ययन ने दुनियाभर के स्वास्थ्य विशेषज्ञों की चिंता बढ़ा दी है। अध्ययन के अनुसार, जलवायु परिवर्तन और महासागरों के बढ़ते तापमान के कारण मछलियों और अन्य सीफूड में ओमेगा-3 की मात्रा लगातार कम होती जा रही है, जो भविष्य में मानव स्वास्थ्य के लिए एक बड़ा संकट बन सकता है।
सीफूड में क्यों जरूरी है ओमेगा-3 और इसके फायदे
समुद्री खाद्य पदार्थ दो बेहद महत्वपूर्ण ओमेगा-3 फैटी एसिड—ईपीए (इकोसापेंटेनोइक एसिड) और डीएचए (डोकोसाहेक्साइनोइक एसिड) के सबसे बेहतरीन स्रोत माने जाते हैं। ये दोनों तत्व हमारे मस्तिष्क के विकास, आंखों की सेहत और दिल को स्वस्थ रखने के लिए अत्यधिक महत्वपूर्ण होते हैं।
इसके अलावा, ये शरीर में पुरानी सूजन को कम करने, समय से पहले जन्म के जोखिम को घटाने और कई गंभीर बीमारियों से बचाने में भी मदद करते हैं। हालांकि मानव शरीर पौधों से मिलने वाले एएलए (ALA) से कुछ मात्रा में ईपीए और डीएचए बना सकता है, लेकिन अधिकांश आबादी के लिए सीफूड ही इसका मुख्य जरिया है।
महासागरों की गर्मी कैसे चुरा रही है आपका पोषण
एडिलेड यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं—बेथनी रोज डासन, कैमिल मेलिन और इवेंजेलिन मैंटजिओरिस द्वारा किए गए इस नए अध्ययन में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। शोध के मुताबिक, समुद्री शैवाल (Seaweed) वे शुरुआती जीव हैं जो प्राकृतिक रूप से ईपीए और डीएचए ओमेगा-3 का उत्पादन करते हैं और यही समुद्री खाद्य श्रृंखला का आधार हैं।
जब छोटी मछलियां और अन्य समुद्री जीव इन शैवालों का सेवन करते हैं, तो यह पोषण श्रृंखला के जरिए बड़े जीवों और मछलियों तक पहुंचता है। लेकिन जलवायु परिवर्तन के कारण महासागरों का तापमान लगातार बढ़ रहा है, जिसका सीधा असर इन पोषक तत्वों के उत्पादन पर पड़ रहा है।
अत्यधिक गर्मी से ओमेगा-3 में 50 प्रतिशत तक की गिरावट
शोधकर्ताओं ने जलवायु परिवर्तन के दो मुख्य पहलुओं—महासागरीय गर्मी और अम्लीकरण—को समझने के लिए 132 समुद्री प्रजातियों पर किए गए 489 अलग-अलग प्रयोगों के डेटा का विश्लेषण किया।
अध्ययन में पाया गया कि 1980 के बाद से महासागरीय तापमान में जो वृद्धि हुई है, उसके कारण मछलियों में ओमेगा-3 फैटी एसिड की मात्रा में 19 प्रतिशत तक की कमी आ चुकी है। वहीं, यदि तापमान में 10 डिग्री सेल्सियस या उससे अधिक की अत्यधिक वृद्धि होती है, तो मछलियों में ओमेगा-3 की मात्रा 50 प्रतिशत, शैवाल में 34 प्रतिशत और अन्य जलीय जीवों में 51 प्रतिशत तक कम हो सकती है।
girls globe