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FIIs ने भारतीय शेयर बाजार से निकाले ₹1,602 करोड़; घरेलू निवेशकों की मजबूत खरीदारी से संभला बाजार

कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव के बीच भारतीय शेयर बाजार में पिछले कुछ दिनों से मिला-जुला रुख देखने को मिल रहा है। इस दौरान विदेशी संस्थागत निवेशकों यानी एफआईआई ने भारतीय शेयर बाजार से মাত্র पांच दिनों के भीतर 1,602 करोड़ रुपये की शुद्ध निकासी की है। हालांकि, विदेशी निवेशकों के बिकवाली के इस रुख के बीच घरेलू संस्थागत निवेशकों यानी डीआईआई ने एक बार फिर मोर्चा संभालते हुए बाजार को बड़ी गिरावट से बचा लिया और लगातार खरीदारी जारी रखी।

डीआईआई की शानदार लिवाली से बाजार में बनी रही स्थिरता

बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, पिछले तीन सप्ताह तक लगातार खरीदारी करने के बाद विदेशी निवेशक एक बार फिर बिकवाली के रास्ते पर लौट आए हैं। अगस्त महीने के अब तक के आंकड़ों पर गौर करें तो विदेशी निवेशकों ने 2,510 करोड़ रुपये का निवेश किया है, जबकि घरेलू संस्थागत निवेशकों ने इस अवधि में 34,370 करोड़ रुपये से अधिक का भारी-भरकम निवेश किया है। केवल इस एक सप्ताह के दौरान ही डीआईआई ने 17,320 करोड़ रुपये की शुद्ध खरीदारी कर निवेशकों का भरोसा मजबूत किया है, जिसके चलते बाजार में बड़ी गिरावट देखने को नहीं मिली।

कच्चे तेल के दाम और वैश्विक तनाव का बाजार पर असर

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 92 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर बनी हुई हैं, इसके अलावा अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने भी निवेशकों की चिंता को बढ़ाया है। इस वजह से सप्ताह की शुरुआत में निफ्टी कमजोर नजर आया और मध्य सप्ताह के दौरान इसने 24,026 का निचला स्तर भी छुआ। हालांकि, आखिरी दो कारोबारी सत्रों में आई जोरदार रिकवरी के बाद निफ्टी 24,252 के स्तर पर बंद हुआ, जो पिछले सप्ताह की तुलना में लगभग आधा प्रतिशत की मामूली गिरावट को दर्शाता है।

मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में निवेशकों का लगातार उत्साह

प्रमुख सूचकांकों में भले ही सुस्ती रही हो, लेकिन व्यापक बाजार का प्रदर्शन काफी शानदार रहा है। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स लगभग सपाट बंद हुआ, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स ने नया ऑल-टाइम हाई छूते हुए एक प्रतिशत से अधिक की मजबूत बढ़त दर्ज की। इससे यह साफ पता चलता है कि खुदरा और घरेलू निवेशकों की रुचि अभी भी मजबूत, मध्यम और छोटी कंपनियों के शेयरों में बनी हुई है। आने वाले दिनों में बाजार की चाल मुख्य रूप से कच्चे तेल की कीमतों, वैश्विक राजनीतिक घटनाक्रमों और विदेशी निवेशकों के रुख पर टिकी रहेगी।