Saturday , August 22 2026

वंदे मातरम् के अपमान पर अब 3 साल तक की जेल, जानिए क्या हैं नए कानूनी प्रावधान और विवाद की वजह

राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ के गायन और उसकी गरिमा को लेकर देश की सियासत में एक बार फिर गर्माहट आ गई है। कांग्रेस पार्टी द्वारा राष्ट्रीय गीत के गायन को लेकर लिए गए एक फैसले के बाद राजनीतिक गलियारों में बहस छिड़ गई है। इस बीच, केंद्र सरकार द्वारा लाए गए नए संशोधन के बाद अब राष्ट्र गीत के अपमान या इसके गायन में बाधा डालने पर बेहद कड़े कानूनी प्रावधान लागू कर दिए गए हैं।

कांग्रेस के फैसले से गरमाई सियासत

यह पूरा राजनीतिक विवाद तब शुरू हुआ जब कांग्रेस कार्य समिति (CWC) ने अपने आधिकारिक कार्यक्रमों में ‘वंदे मातरम्’ के गायन को पूरे छह छंदों के बजाय केवल पहले दो पदों तक सीमित रखने का निर्णय लिया। इस फैसले के सामने आने के बाद सत्तापक्ष और आलोचकों ने कांग्रेस को आड़े हाथों लिया।

इस बीच, भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने इस कदम का कड़ा विरोध करते हुए पार्टी की राष्ट्रीय टीम की बैठक में 10 बिंदुओं वाला एक कड़ा निंदा प्रस्ताव पारित किया है। भाजपा ने इसे देश की सांस्कृतिक विरासत और राष्ट्र गीत के अपमान से जोड़ते हुए पूरे देश में जनसंपर्क अभियान चलाने का ऐलान किया है।

राष्ट्र गान की तर्ज पर अब राष्ट्र गीत को भी कानूनी संरक्षण

बढ़ते राजनीतिक और वैचारिक टकराव के बीच राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण (संशोधन) विधेयक, 2026 के अस्तित्व में आने के बाद कानून को बेहद सख्त कर दिया गया है। इस नए संशोधन के बाद अब राष्ट्र गीत ‘वंदे मातरम्’ के अपमान या इसके गायन में बाधा डालने पर वही सजा मिलेगी जो अब तक राष्ट्र गान ‘जन गण मन’ के लिए तय थी।

नए प्रावधानों के तहत:

  • सजा का प्रावधान: यदि कोई व्यक्ति जानबूझकर राष्ट्र गीत ‘वंदे मातरम्’ के गायन को रोकता है या इसके गायन में किसी सभा या समूह में व्यवधान उत्पन्न करता है, तो उसे राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम, 1971 की धारा 3 के तहत दंडनीय अपराध माना जाएगा।

  • तीन साल की जेल: इस अपराध के लिए दोषी पाए जाने वाले व्यक्ति को तीन वर्ष तक का कारावास, जुर्माना या दोनों की सजा भुगतनी पड़ सकती है।

  • पुनरावृत्ति पर सख्त सजा: यदि कोई व्यक्ति इस अपराध को दोबारा दोहराता है, तो धारा 3क के तहत कम-से-कम एक वर्ष के अनिवार्य कठोर कारावास का प्रावधान लागू किया जाएगा।