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बिहार के स्टार क्रिकेटर्स आकाशदीप और मुकेश कुमार पर मंडराया संकट! सरकार ने डीएसपी की नौकरी को लेकर रख दी ऐसी बड़ी शर्त

भारतीय क्रिकेट टीम के लिए अपनी तेज गेंदबाजी का लोहा मनवाने वाले बिहार के लाल आकाशदीप (Akash Deep) और मुकेश कुमार (Mukesh Kumar) इस वक्त एक बेहद दिलचस्प और मुश्किल दोराहे पर खड़े नजर आ रहे हैं। खेल के मैदान पर शानदार प्रदर्शन के दम पर देश का नाम रोशन करने वाले इन दोनों तेज गेंदबाजों को कुछ समय पहले बिहार सरकार की तरफ से पुलिस विभाग में डीएसपी (DSP) के पद पर सम्मानित करने की घोषणा की गई थी। लेकिन अब राज्य सरकार की तरफ से इन दोनों स्टार क्रिकेटर्स के सामने एक ऐसी बड़ी और सख्त शर्त रख दी गई है, जिसके चलते उनकी यह डीएसपी की नौकरी खतरे में पड़ती दिखाई दे रही है। इस नए राजनीतिक और प्रशासनिक मोड़ के सामने आने के बाद से खेल जगत और बिहार के राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का बाजार पूरी तरह गर्म हो गया है। आइए जानते हैं क्या है पूरी खबर और सरकार ने कौन सी शर्त रखी है।

क्या है बिहार सरकार का वह आदेश, जिससे मची हलचल?

भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) के माध्यम से इंटरनेशनल क्रिकेट और आईपीएल में अपनी शानदार गेंदबाजी का परचम लहराने वाले आकाशदीप और मुकेश कुमार मूल रूप से बिहार के विभिन्न जिलों से ताल्लुक रखते हैं। जब इन दोनों खिलाड़ियों ने टीम इंडिया के लिए खेलते हुए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बेहतरीन उपलब्धियां हासिल कीं, तो बिहार सरकार ने इनकी इस सफलता से प्रेरित होकर उन्हें राज्य में प्रशासनिक और पुलिस सेवा के सर्वोच्च पदों में से एक यानी डीएसपी (Deputy Superintendent of Police) पद पर नियुक्त करने का बड़ा फैसला लिया था। इस घोषणा के बाद राज्य के युवाओं और इन खिलाड़ियों के परिजनों में खुशी की लहर दौड़ गई थी कि अब खेल के साथ-साथ प्रशासनिक सेवा में भी उनका भविष्य सुरक्षित रहेगा।

सरकार की वह बड़ी शर्त, जिसने बढ़ा दी है खिलाड़ियों की मुश्किलें

अब बिहार सरकार के प्रशासनिक महकमे और गृह विभाग की तरफ से इन नियुक्तियों को लेकर एक बहुत ही कड़ा नियम और शर्त सामने रख दी गई है। सरकार के नए दिशा-निर्देशों के अनुसार, यदि आकाशदीप और मुकेश कुमार को बिहार पुलिस में डीएसपी के रूप में स्थायी तौर पर ज्वाइन करना है और सरकारी वेतन-भत्तों का लाभ उठाना है, तो उन्हें अपने मौजूदा क्रिकेट करियर को छोड़कर पूरी तरह से प्रशासनिक ड्यूटी संभालनी होगी या फिर सरकार द्वारा तय किए गए सेवा नियमों के तहत नियमित रूप से थाने और पुलिस मुख्यालय में अपनी उपस्थिति दर्ज करानी होगी। चूंकि दोनों खिलाड़ी इस वक्त भारतीय क्रिकेट टीम, रणजी ट्रॉफी और आईपीएल के व्यस्त शेड्यूल में सालभर देश-विदेश में व्यस्त रहते हैं, इसलिए उनके लिए एक साथ फुल-टाइम पुलिस की नौकरी करना व्यावहारिक रूप से लगभग असंभव नजर आ रहा है।

क्या बीसीसीआई और खेल नियमों के बीच फंस गए हैं ये खिलाड़ी?

खेल विशेषज्ञों और जानकारों का मानना है कि एक पेशेवर अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर के रूप में खेलना और साथ ही साथ एक सक्रिय पुलिस अधिकारी यानी डीएसपी की नौकरी करना दोनों एक दूसरे के बिल्कुल विपरीत जिम्मेदारियां हैं। बीसीसीआई के अनुबंध और फिटनेस तथा मैच प्रैक्टिस के कड़े नियमों के तहत कोई भी सक्रिय खिलाड़ी किसी अन्य सरकारी विभाग में फुल-टाइम नौकरी नहीं कर सकता, जब तक कि उसे विशेष खेल कोटे के तहत प्रशासनिक छूट न दी जाए। इससे पहले भी देश के कई अन्य राज्यों में खिलाड़ियों को मानद (Honorary) पद या डीएसपी जैसी उपाधियां दी गई हैं, जहां उन्हें रोजाना ड्यूटी करने की अनिवार्यता से छूट मिलती है। लेकिन बिहार सरकार के इस नए नियम और शर्त ने इन दोनों तेज गेंदबाजों के सामने एक अजीब असमंजस की स्थिति पैदा कर दी है।

आगे क्या हो सकता है इन स्टार खिलाड़ियों का अगला कदम?

फिलहाल आकाशदीप और मुकेश कुमार की तरफ से इस पूरी शर्त पर आधिकारिक रूप से कोई तीखी प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन उनके करीबी सूत्रों का कहना है कि वे इस मामले को लेकर बिहार सरकार और खेल विभाग के उच्च अधिकारियों से बातचीत कर सकते हैं। खिलाड़ी और उनके परिवार चाहते हैं कि सरकार इस मामले में थोड़ी नरमी बरते और उन्हें मानद रूप से डीएसपी का पद प्रदान करे ताकि वे देश के लिए क्रिकेट खेलते रहें और राज्य का सम्मान भी बढ़ता रहे। यदि सरकार अपने रुख पर अड़ी रहती है, तो इन दोनों खिलाड़ियों को अपनी इस प्रतिष्ठित सरकारी नौकरी से हाथ धोना पड़ सकता है, जो बिहार के खेल प्रेमियों के लिए एक बहुत बड़ा झटका होगा।