
पश्चिम बंगाल की राजनीति में ममता बनर्जी सरकार की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। राज्य में विपक्ष के नेता (LoP) सुवेंदु अधिकारी ने टीएमसी सरकार को घेरने के लिए ऐसा आक्रामक चक्रव्यूह तैयार किया है, जिसकी रफ्तार किसी रॉकेट से भी तेज मानी जा रही है। समान नागरिक संहिता (UCC) पर मुखर होने के बाद अब सुवेंदु अधिकारी ने बंगाल की राजनीति में धर्मांतरण के मामलों और अवैध जमीन कब्जाने (Land Grabbing) के खिलाफ सख्त नए कानून लाने की पुरजोर तैयारी कर ली है। उनके इस आक्रामक तेवर से सत्ताधारी दल तृणमूल कांग्रेस के खेमे में भारी बेचैनी साफ तौर पर देखी जा रही है।
धर्मांतरण और अवैध जमीन हड़पने के खिलाफ आर-पार की जंग
सुवेंदु अधिकारी ने हालिया बयानों और राजनीतिक रणनीतियों के जरिए यह साफ कर दिया है कि बंगाल में तेजी से बदल रहे जनसांख्यिकीय समीकरण और जमीनी स्तर पर हो रहे अवैध कब्जे अब उनके मुख्य निशाने पर हैं। उनका आरोप है कि राज्य में राजनीतिक संरक्षण के चलते जबरन धर्मांतरण और गरीब-वंचितों की जमीनों पर अवैध कब्जे जैसी घटनाएं आम हो चुकी हैं। इन तमाम कुप्रथाओं पर लगाम कसने के लिए विपक्ष अब जनता के बीच ऐसे कड़े वैधानिक प्रस्ताव और ब्लूप्रिंट रख रहा है, जो आने वाले विधानसभा चुनावों से पहले राजनीतिक तापमान को पूरी तरह से गर्माने का काम कर रहे हैं।
बंगाल की राजनीति में गेमचेंजर साबित होगी यह रणनीति?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सुवेंदु अधिकारी का यह नया मिशन बंगाल की पारंपरिक राजनीति की धारा को पूरी तरह मोड़ने की क्षमता रखता है। जहां एक तरफ टीएमसी सरकार अपने पुराने कल्याणकारी और क्षेत्रीय मुद्दों पर फोकस कर रही है, वहीं बीजेपी के इस आक्रामक हिंदुत्व और सुशासन के एजेंडे ने जमीनी स्तर पर एक नया नैरेटिव सेट कर दिया है। रॉकेट जैसी तेजी से आगे बढ़ रही इन राजनीतिक चालों ने ममता बनर्जी की सरकार को रक्षात्मक मुद्रा में ला खड़ा किया है, जिससे यह साफ है कि आने वाले दिनों में बंगाल का सियासी रण और अधिक रोमांचक होने वाला है।
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