रणबीर और अरुण गोविल से भी आगे थे ये एक्टर: 9 बार बड़े पर्दे पर बने राम, लोग करते थे तस्वीरों की पूजा

भारतीय सिनेमा में भगवान राम और रामायण की गाथाओं का क्रेज हमेशा से सिर चढ़कर बोलता रहा है। आने वाली बड़ी फिल्मों और टीवी के लोकप्रिय चेहरों के बीच आज भी रामानंद सागर की ‘रामायण’ के अरुण गोविल और आने वाले वक्त में रणबीर कपूर के राम अवतार की चर्चा जोरों पर रहती है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इनसे कई दशक पहले एक ऐसा दिग्गज अभिनेता भी हुआ था, जिसने बड़े पर्दे पर एक-दो बार नहीं बल्कि पूरे 9 बार भगवान राम की भूमिका निभाकर ऐसा इतिहास रचा था कि लोग उनकी तस्वीरों के कट-आउट निकालकर अपने घरों में उनकी पूजा किया करते थे।

कौन थे सिल्वर स्क्रीन के पहले आदर्श राम प्रेम अदीब

10 अगस्त 1917 को जन्मे दिवंगत अभिनेता प्रेम अदीब (Prem Adib) अपने दौर के बेहद मशहूर और चहेते सितारे थे, जिन्हें मुख्य रूप से ‘सिल्वर स्क्रीन के आदर्श राम’ के तौर पर अमर पहचान मिली। उनके अभिनय में एक ऐसी सादगी और दिव्यता थी कि दर्शक उन्हें सचमुच भगवान का रूप मानने लगे थे। उनके इस ऐतिहासिक और स्वर्णिम सफर की शुरुआत साल 1942 में निर्देशक विजय भट्ट की फिल्म ‘भरत मिलाप’ से हुई थी, जिसमें उनके काम ने जनता के दिलों में अमिट छाप छोड़ दी।

महात्मा गांधी ने भी देखी थी उनकी ऐतिहासिक फिल्म ‘राम राज्य’

‘भरत मिलाप’ की अपार सफलता के बाद निर्देशक विजय भट्ट ने 1943 में अपनी अगली फिल्म ‘राम राज्य’ में एक बार फिर प्रेम अदीब को भगवान राम के मुख्य किरदार में कास्ट किया। भारतीय सिनेमा के इतिहास में ‘राम राज्य’ के नाम एक अनोखा और ऐतिहासिक रिकॉर्ड दर्ज है, क्योंकि यह देश की एकमात्र ऐसी फिल्म है जिसे राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने खुद सिनेमाघर में देखा था। इस फिल्म की सफलता ने प्रेम अदीब की लोकप्रियता को देश के कोने-कोने तक पहुंचा दिया।

9 बार निभाया राम का किरदार और शोभना समर्थ के साथ बनाई सुपरहिट जोड़ी

दशकों पहले जब पौराणिक फिल्मों का दौर परवान चढ़ रहा था, तब दर्शक पर्दे पर सिर्फ प्रेम अदीब को ही राम के रूप में देखना पसंद करते थे। उन्होंने अपने शानदार करियर में ‘रामबाण’, ‘राम विवाह’, ‘राम नवमी’, ‘राम हनुमान युद्ध’, ‘राम लक्ष्मण’, ‘राम भक्त विभीषण’ और साल 1954 में आई फिल्म ‘रामायण’ सहित कुल 9 बार सिल्वर स्क्रीन पर भगवान राम का किरदार जीवंत किया। उस दौर में अभिनेत्री शोभना समर्थ के साथ उनकी राम और सीता की जोड़ी इतनी ज्यादा लोकप्रिय हो गई थी कि फैंस उनके पोस्टर और कट-आउट निकालकर उनकी बाकायदा पूजा तक करने लगे थे।

बेहद कम उम्र में दुनिया को अलविदा कह गए थे लीजेंड्री एक्टर

सिनेमा जगत को अपनी अद्भुत कला और सादगी से सींचने वाले प्रेम अदीब का जीवन बहुत लंबा नहीं रहा। महज 42 वर्ष की कम उम्र में ही ब्रेन हैमरेज के कारण 1959 में उनका अचानक निधन हो गया, जिससे भारतीय फिल्म इंडस्ट्री ने एक ऐसा अनमोल सितारा हमेशा के लिए खो दिया। आज भले ही बड़े पर्दे पर राम के किरदार के कई नए आयाम गढ़े जा रहे हैं, लेकिन 40 और 50 के दशक में प्रेम अदीब ने जो दीवानगी और श्रद्धा हासिल की थी, उसकी मिसाल आज भी सिनेमाई इतिहास में अद्वितीय मानी जाती है।