सावन में इस दिन मनाई जाएगी नाग पंचमी, जानिए पूजा का शुभ मुहूर्त और नाग देवता को प्रसन्न करने के नियम

सनातन धर्म में सावन मास का महीना बेहद पवित्र और ऊर्जावान माना जाता है, जिसमें भगवान शिव की उपासना के साथ-साथ प्रकृति और जीव-जंतुओं के प्रति आभार व्यक्त करने वाले कई बड़े पर्व आते हैं। इन्हीं पावन पर्वों में प्रमुख ‘नाग पंचमी’ का त्योहार हर साल सावन मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को पूरी श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाता है। नाग पंचमी के इस खास अवसर पर देश भर के नाग मंदिरों और शिवालयों में भक्तों का तांता लगा रहता है और लोग नाग देवता की विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर अपने परिवार की सुख-समृद्धि व सुरक्षा की कामना करते हैं। इस साल नाग पंचमी की सही तिथि और पूजा के शुभ समय को लेकर भक्तों में काफी उत्सुकता बनी हुई है।

नाग पंचमी 2026 की सही तिथि और पूजा का शुभ मुहूर्त

पंचांग और ज्योतिषीय गणना के अनुसार, नाग पंचमी का पावन पर्व साल 2026 में सावन मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि पर बेहद शुभ संयोग के साथ आ रहा है। पंडितों और ज्योतिष आचार्यों के मुताबिक, इस दिन नाग देवता की पूजा के लिए सुबह का समय सबसे उत्तम माना जाता है, लेकिन शाम के वक्त भी पूजा-अर्चना करने का विशेष महत्व होता है। जो भक्त सुबह के समय किसी कारणवश पूजा नहीं कर पाते हैं, वे शाम को निर्धारित शुभ मुहूर्त में नाग देवता को दूध, जल, अक्षत और दूर्वा अर्पित कर उनका आशीर्वाद प्राप्त कर सकते हैं। इस दौरान मंदिर जाकर या घर पर ही भगवान शिव के गले की शोभा बढ़ाने वाले नाग देवता की तस्वीर या मूर्ति की पूजा करना अत्यंत फलदायी माना गया है।

कालसर्प दोष से मुक्ति और नाग देवता की पूजा का विशेष महत्व

हिंदू धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नाग पंचमी के दिन नागों की पूजा करने से कालसर्प दोष, राहु-केतु के अशुभ प्रभावों और सर्प भय से मुक्ति मिलती है। नागों को हमारे पर्यावरण और खेतों की रक्षा करने वाला जीव माना जाता है, इसलिए सनातन संस्कृति में इन्हें पूजनीय स्थान दिया गया है। इस दिन कई लोग अपने घरों के मुख्य द्वार पर नाग देवता के चित्र बनाते हैं या उनका पूजन कर दूध और लावा अर्पित करते हैं। पंडितों का कहना है कि सच्चे मन से नाग पंचमी का व्रत रखने और विधि-विधान से नाग देवता की पूजा करने से घर में कभी भी धन-धान्य की कमी नहीं होती और सर्प योनि से जुड़े भय हमेशा के लिए दूर हो जाते हैं।