अब गठबंधन का कैप्टन बदलना जरूरी’: कांग्रेस के तीखे तेवर से महागठबंधन में मची खलबली, सियासी गलियारों में उबाल

बिहार और देश की राजनीति में एक बार फिर से गठबंधन की सियासत को लेकर बड़ा भूचाल आ गया है। विपक्षी दलों के संयुक्त मोर्चे या महागठबंधन के भीतर सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है, जिसके संकेत अब खुलकर सामने आने लगे हैं। राष्ट्रीय स्तर से लेकर क्षेत्रीय दलों के बीच चल रही खींचतान के बीच कांग्रेस पार्टी की तरफ से एक ऐसा तीखा बयान सामने आया है, जिसने राजनीतिक गलियारों में खलबली मचा दी है। कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने साल 2005 से लेकर अब तक हुए हर चुनाव में लगातार हार मिलने का ठीकरा एक खास नेतृत्व पर फोड़ते हुए साफ तौर पर कह दिया है कि अब गठबंधन का ‘कैप्टन’ बदलना बेहद जरूरी हो गया है। इस बयान के बाद से सहयोगी दलों में हड़कंप मच गया है और चुनावी समीकरणों को लेकर नए कयास लगाए जाने लगे हैं।

क्यों भड़की कांग्रेस और किस पर साधा गया है सीधा निशाना?

राजनीतिक गलियारों में चर्चा जोरों पर है कि कांग्रेस पार्टी का यह हमला सीधे तौर पर उस नेतृत्व की तरफ इशारा कर रहा है जो पिछले दो दशकों से क्षेत्रीय मोर्चेबंदी की अगुवाई कर रहा है। कांग्रेस नेताओं का यह मानना है कि साल 2005 के बाद से लगातार चुनावों में मिलती आ रही हार इस बात का पुख्ता सबूत है कि अब पुरानी रणनीतियों और पुराने चेहरों के साथ चुनावी मैदान में उतरना फायदे का सौदा नहीं है। पार्टी का अंदरूनी तर्क यह है कि यदि आगामी चुनावों में सत्ता में वापसी करनी है और जनता का भरोसा फिर से जीतना है, तो विपक्ष के भीतर नेतृत्व परिवर्तन और सांगठनिक स्तर पर एक नए और युवा चेहरे को आगे लाना समय की सबसे बड़ी मांग बन चुका है।

महागठबंधन के भीतर इस बयान के क्या होंगे दूरगामी सियासी परिणाम?

कांग्रेस के इस आक्रामक तेवर और बदलाव की मांग ने विपक्षी गठबंधन के भीतर आपसी कलह को सतह पर ला दिया है। एक तरफ जहां अन्य सहयोगी दल इस बयान से असहज नजर आ रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ सत्ताधारी दल को विपक्षी खेमे पर चुटकी लेने का पूरा मौका मिल गया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि समय रहते गठबंधन के भीतर इन दूरियों और मतभेदों को खत्म नहीं किया गया, तो आने वाले बड़े चुनावी मुकाबलों में इसका खामियाजा पूरे विपक्ष को भुगतना पड़ सकता है। देखना यह होगा कि इस तीखे बयानबाजी के बाद महागठबंधन के बड़े नेता आपसी सहमति बनाने के लिए क्या कदम उठाते हैं और क्या वाकई गठबंधन का नेतृत्व बदलने की कोई सुगबुगाहट तेज होती है।