महाभारत के ‘अश्वत्थामा’ और आमिर खान के खास दोस्त: जिनके लिए एसएस राजामौली को बदलनी पड़ी थी फिल्म की स्क्रिप्ट

भारतीय सिनेमा जगत में कुछ ऐसे मंझे हुए कलाकार होते हैं जो परदे पर भले ही मुख्य नायक के रूप में न आएं, लेकिन अपनी दमदार अदाकारी और खतरनाक खलनायकी से पूरी फिल्म पर छा जाते हैं। हिंदी और दक्षिण भारतीय सिनेमा में अपनी अमिट छाप छोड़ने वाले दिग्गज अभिनेता प्रदीप रावत (Pradeep Rawat) कुछ ऐसे ही कलाकारों में शुमार थे। जबलपुर में जन्मे प्रदीप रावत का सपना कभी सेना में जाकर देश की सेवा करने का था, जिसके लिए उन्होंने आर्मी ऑफिसर बनने की कड़ी तैयारी भी की थी, लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। असफलता के बाद उन्होंने कुछ समय बैंक की नौकरी की, लेकिन अभिनय के प्रति उनके बढ़ते झुकाव ने उन्हें थिएटर की दुनिया तक खींच लिया और यहीं से एक शानदार और यादगार अभिनय सफर की शुरुआत हुई।

बीआर चोपड़ा के ‘महाभारत’ और ‘लगान’ ने बदली जिंदगी

प्रदीप रावत ने अपने फिल्मी सफर की शुरुआत साल 1985 में आई फिल्म ‘मेरी जंग’ से की थी, जिसमें उन्होंने एक छोटा सा रोल निभाया था। हालांकि, उन्हें घर-घर में वास्तविक पहचान बीआर चोपड़ा के ऐतिहासिक और पौराणिक धारावाहिक ‘महाभारत’ (Mahabharat) से मिली। इस शो में उन्होंने द्रोणाचार्य के पुत्र और अमर योद्धा ‘अश्वत्थामा’ का ऐसा जीवंत किरदार निभाया कि दर्शक उनके अभिनय के मुरीद हो गए। इसके बाद साल 2001 में आई आमिर खान की ऑस्कर-नॉमिनेटेड ब्लॉकबस्टर फिल्म ‘लगान’ (Lagaan) उनके करियर का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित हुई। इस फिल्म में ‘देवा सिंह सोढ़ी’ के रूप में उनके दमदार अभिनय ने दर्शकों के दिलों पर गहरी छाप छोड़ी। आशुतोष गोवारिकर की इस फिल्म के बाद वह न केवल सुपरस्टार आमिर खान के बेहद करीबी दोस्त बन गए, बल्कि साउथ फिल्म इंडस्ट्री के मेकर्स के बीच भी उनकी जबरदस्त मांग बढ़ गई।

जब राजामौली को प्रदीप रावत के लिए बदलनी पड़ी अपनी फिल्म की स्क्रिप्ट

प्रदीप रावत की प्रतिभा का सबसे बड़ा उदाहरण यह है कि देश के दिग्गज निर्देशक एसएस राजामौली (SS Rajamouli) ने उन्हें अपनी एक फिल्म में कास्ट करने के लिए पूरी स्क्रिप्ट ही बदल दी थी। एक इंटरव्यू में खुद अभिनेता ने इस बात का खुलासा किया था कि ‘लगान’ देखने के बाद राजामौली के एक असिस्टेंट ने उन्हें फिल्म ‘Sye’ (नितिन और जेनेलिया स्टारर) के लिए ऑडिशन देने बुलाया था। उस वक्त बॉलीवुड और साउथ के करीब 20-25 कलाकारों ने उस रोल के लिए ऑडिशन दिया था, और प्रदीप अंतिम अभिनेता थे जिन्होंने ऑडिशन दिया था। उनके काम को देखते ही राजामौली ने उन्हें तुरंत चुन लिया, लेकिन समस्या यह थी कि उनके लिए मूल रूप से एक कॉलेज के छात्र का रोल लिखा गया था जिसमें उनकी उम्र और व्यक्तित्व फिट नहीं बैठ रहा था। तब राजामौली ने बिना किसी झिझक के केवल प्रदीप रावत के लिए स्क्रिप्ट में बदलाव किया और एक खूंखार खलनायक का किरदार ‘बिक्शु यादव’ गढ़ा, जो बाद में кульट बन गया।

साउथ से लेकर बॉलीवुड तक खलनायक के रूप में अमर हो गए प्रदीप रावत

तेलुगु, तमिल और हिंदी सिनेमा में अपनी बेहतरीन अदायगी का लोहा मनवाने वाले प्रदीप रावत ने साल 2005 में आई तमिल फिल्म ‘गजनी’ में भी काम किया और जब इसका हिंदी रीमेक बना, तो उसमें भी उन्होंने अपने खतरनाक खलनायक ‘गजनी धर्मात्मा’ के किरदार से थिएटर्स में तहलका मचा दिया। अपने लंबे और शानदार अभिनय करियर में उन्होंने अनगिनत फिल्मों में यादगार भूमिकाएं निभाईं। साउथ और बॉलीवुड के बीच सेतु का काम करने वाले इस दिग्गज कलाकार ने अपनी अदाकारी से दर्शकों के दिलों पर हमेशा के लिए राज किया। सिनेमा जगत को अपनी बेजोड़ कला से समृद्ध करने वाले प्रदीप रावत भले ही आज शारीरिक रूप से हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन ‘महाभारत’ के अश्वत्थामा और ‘गजनी’ के विलेन के रूप में उनका नाम भारतीय सिनेमा के इतिहास में हमेशा अमर रहेगा।