
मानव शरीर में लिवर दूसरा सबसे बड़ा अंग है और यह भोजन को पचाने, विषैले पदार्थों को बाहर निकालने तथा ऊर्जा को संचित करने जैसे 500 से अधिक महत्वपूर्ण कार्य करता है। लेकिन आधुनिक दौर की अस्वस्थ जीवनशैली, रिफाइंड भोजन का अत्यधिक सेवन और शारीरिक गतिविधि में कमी के कारण फैटी लिवर की समस्या तेजी से बढ़ रही है। शुरुआत में फैटी लिवर के लक्षण बहुत स्पष्ट नहीं होते, जिससे लोग इसे नजरअंदाज कर देते हैं। हालांकि, हमारा शरीर कई माध्यमों से अंदरूनी गड़बड़ी के संकेत देने लगता है, जिनमें से एक सबसे महत्वपूर्ण और प्रत्यक्ष माध्यम हमारी आंखें और उनके आसपास की त्वचा है। यदि आपकी आंखों के आसपास कुछ खास तरह के बदलाव दिखाई दे रहे हैं, तो यह सीधे तौर पर लिवर में वसा के अत्यधिक जमाव यानी फैटी लिवर का बड़ा संकेत हो सकता है।
आंखों के पास पीले चकत्ते (Xanthelasma): फैटी लिवर का सबसे बड़ा संकेत
आंखों के आसपास या पलकों के ऊपर पीले रंग के छोटे-छोटे उभार या चकत्ते दिखना एक बेहद आम लेकिन गंभीर लक्षण है। डॉक्टरी भाषा में इसे ‘जैंथेलैज्मा’ (Xanthelasma) कहा जाता है। यह त्वचा के नीचे कोलेस्ट्रॉल और फैट के जमाव के कारण होता है। जब लिवर में अतिरिक्त वसा जमा होने लगती है, तो उसका मेटाबॉलिज्म असंतुलित हो जाता है। इसके कारण रक्त में बैड कोलेस्ट्रॉल (LDL) और ट्राइग्लीसराइड्स का स्तर बहुत तेजी से बढ़ता है। लिवर जब इस वसा को सही तरीके से संसाधित नहीं कर पाता, तो यह त्वचा के पतले हिस्सों, खासकर पलकों के कोनों में जमने लगती है। यदि आपकी पलकों पर इस तरह के पीले पैच बन रहे हैं, तो यह नॉन-अल्कोहलिक फैटी लिवर डिजीज (NAFLD) का स्पष्ट संकेत हो सकता है।
आंखों की सफेदी में पीलापन: लिवर की कार्यप्रणाली प्रभावित होने की चेतावनी
आंखों का सफेद भाग जिसे ‘स्क्लेरा’ कहा जाता है, यदि वह हल्का पीला या पूरी तरह से पीला दिखाई देने लगे, तो यह लिवर में आई खराबी का सीधा प्रमाण है। जब लिवर की कोशिकाएं अत्यधिक वसा के कारण क्षतिग्रस्त होने लगती हैं, तो वे ‘बिलीरुबिन’ नामक तत्व को सही तरीके से फ़िल्टर नहीं कर पाती हैं। बिलीरुबिन रक्त में एकत्र होने लगता है और इसका असर सबसे पहले आंखों के सफेद हिस्से में दिखाई देता है। इसे सामान्य भाषा में पीलिया या ‘जॉन्डिस’ कहा जाता है। फैटी लिवर के गंभीर चरण या लिवर सिरोसिस की ओर बढ़ने पर आंखों का यह पीलापन और अधिक गहरा हो जाता है, जिसे किसी भी स्थिति में अनदेखा नहीं किया जाना चाहिए।
आंखों के नीचे काले घेरे और सूजन: लिवर में टॉक्सिन्स का जमाव
अक्सर आंखों के नीचे डार्क सर्कल्स और सूजन (Puffiness) को केवल नींद की कमी या तनाव से जोड़कर देखा जाता है। लेकिन लंबे समय तक रहने वाले गहरे काले घेरे और आंखों के नीचे की सूजन लिवर में जमा हो रहे हानिकारक विषैले पदार्थों (टॉक्सिन्स) की ओर इशारा करते हैं। जब फैटी लिवर के कारण लिवर की डिटॉक्सिफिकेशन क्षमता कम हो जाती है, तो शरीर में अपशिष्ट पदार्थ जमा होने लगते हैं। इसका असर चेहरे की महीन रक्त वाहिकाओं पर पड़ता है, जिससे आंखों के आसपास की त्वचा का रंग गहरा होने लगता है और वहां तरल पदार्थ जमने से सूजन आने लगती है।
आंखों का सूखापन और रोशनी में बदलाव: विटामिन A का असंतुलन
लिवर हमारे शरीर में वसा में घुलनशील विटामिन, जैसे कि विटामिन A, D, E और K को स्टोर करने का काम करता है। विटामिन A हमारी आंखों की रोशनी और आंखों की नमी बनाए रखने के लिए बेहद जरूरी होता है। जब फैटी लिवर की समस्या होती है, तो लिवर की विटामिन A को स्टोर करने और इस्तेमाल करने की क्षमता प्रभावित हो जाती है। इसके परिणामस्वरूप आंखों में लगातार सूखापन (Dry Eyes), जलन, और कम रोशनी में देखने में कठिनाई (रतौंधी के शुरुआती लक्षण) जैसी समस्याएं उत्पन्न होने लगती हैं।
त्वचा पर लाल महीन रेखाएं (Spider Angiomas)
आंखों के आसपास या गालों पर मकड़ी के जाले जैसी लाल या बैंगनी रंग की महीन रक्त वाहिकाएं दिखाई देना भी लिवर से जुड़ी बीमारी का एक लक्षण है। इसे ‘स्पाइडर एंजियोमा’ कहा जाता है। जब फैटी लिवर के कारण लिवर सही तरीके से काम नहीं कर पाता, तो शरीर में एस्ट्रोजन हार्मोन का स्तर असंतुलित हो जाता है। इसके कारण त्वचा की छोटी-छोटी धमनियां फैल जाती हैं और आंखों के पास लाल रंग के धब्बों या जाले के रूप में दिखाई देने लगती हैं।
फैटी लिवर के अन्य सामान्य लक्षण जिन्हें पहचानना है जरूरी
आंखों में होने वाले बदलावों के अलावा, फैटी लिवर के मरीज में कई अन्य लक्षण भी देखने को मिलते हैं। पेट के ऊपरी दाहिने हिस्से में हल्का दर्द या भारीपन महसूस होना इसका एक प्रमुख लक्षण है। इसके साथ ही, लगातार थकान और कमजोरी महसूस होना, बिना किसी कारण के वजन बढ़ना या अचानक तेजी से कम होना, भूख में कमी आना, जी मिचलाना और पैरों या टखनों में सूजन आना भी लिवर में वसा जमा होने के संकेत हैं। यदि आंखों के लक्षणों के साथ ये समस्याएं भी महसूस हो रही हों, तो तुरंत जांच करानी चाहिए।
लिवर को स्वस्थ रखने और आंखों की सुरक्षा के आसान उपाय
फैटी लिवर की समस्या को शुरुआती चरण में सही जीवनशैली और खान-पान में बदलाव करके पूरी तरह से ठीक किया जा सकता है। इसके लिए सबसे पहले अपने आहार में सुधार करें। जंक फूड, अत्यधिक तैलीय भोजन, चीनी और रिफाइंड आटे के सेवन से बचें। अपने भोजन में ताजे फल, हरी पत्तेदार सब्जियां, ओट्स, दलिया, लहसुन, हल्दी और ग्रीन टी जैसी एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर चीजों को शामिल करें।
नियमित रूप से कम से कम 30 से 40 मिनट की शारीरिक गतिविधि या एरोबिक एक्सरसाइज जरूर करें। इससे शरीर में जमा अतिरिक्त फैट बर्न होता है और लिवर की सेहत में सुधार होता है। यदि आपका वजन अधिक है, तो उसे धीरे-धीरे नियंत्रित करने का प्रयास करें। शराब और धूम्रपान का सेवन पूरी तरह से बंद कर दें, क्योंकि ये लिवर की कोशिकाओं को सीधे नुकसान पहुंचाते हैं। पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं ताकि शरीर से विषैले तत्व बाहर निकल सकें।
यदि आपकी आंखों के आसपास पीले चकत्ते, पीलापन या असामान्य सूजन दिखाई दे रही है, तो सबसे पहले किसी योग्य डॉक्टर से परामर्श लें। डॉक्टर ‘लिवर फंक्शन टेस्ट’ (LFT) और अल्ट्रासाउंड के जरिए लिवर की स्थिति का सटीक पता लगाकर सही मार्गदर्शन दे सकते हैं। समय पर की गई पहचान और लाइफस्टाइल में बदलाव से लिवर पूरी तरह से रिकवर हो सकता है।
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