
अक्सर हमारे देश के वर्क कल्चर में देर रात तक ऑफिस का काम करना, छुट्टियों के दिन भी ईमेल या मैसेज का जवाब देना और हर समय ‘एक्टिव’ रहना कर्मठता और मेहनत की निशानी माना जाता है। लेकिन इसके विपरीत, यूरोपीय देशों और खासकर ब्रिटेन (UK) में वर्क-लाइफ बैलेंस को लेकर बिल्कुल अलग और सख्त नजरिया देखने को मिलता है। हाल ही में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर एक भारतीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर ने अपना ऐसा ही अनुभव शेयर किया है, जो इन दिनों इंटरनेट पर चर्चा का केंद्र बना हुआ है। ब्रिटेन के एक सीनियर डेवलपर के साथ काम कर रहे इस भारतीय टेकी को जब देर रात काम करने पर तारीफ के बजाय चेतावनी मिली, तो उसका सोचने का तरीका ही बदल गया।
देर रात रिप्लाई करना पड़ा भारी, ब्रिटिश बॉस ने दी अनोखी चेतावनी
ओम नाम के एक भारतीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर ने सोशल मीडिया पर खुलासा किया कि वह इंग्लैंड स्थित एक सीनियर सॉफ्टवेयर डेवलपर के साथ मिलकर काम करते हैं। भारत और ब्रिटेन के समयांतर (Time Zone) में अंतर होने के कारण, जब यूके का सीनियर डेवलपर उनके कोड का रिव्यू करता था और उस पर कमेंट्स छोड़ता था, तो ओम तुरंत (भारत के समयानुसार रात के 9 या 10 बजे) उसका जवाब दे देते थे।
एक दिन उनके ब्रिटिश बॉस की नजर इस बात पर पड़ी और उन्होंने पूछा कि क्या वह ऑफिस ऑवर्स के बाद भी काम कर रहे हैं। जब ओम ने ‘हां’ कहा, तो बॉस ने उन्हें कड़ी चेतावनी दी और समझाया कि ऐसा करने की कोई जरूरत नहीं है।
“शाम 7 बजे के बाद रिप्लाई किया तो एक हफ्ते नहीं करूंगा PR रिव्यू”
बार-बार समझाने के बावजूद जब भारतीय टेकी ने तय समय के बाद कमेंट्स का जवाब देना बंद नहीं किया, तो यूके के सीनियर डेवलपर को सख्त रुख अपनाना पड़ा। ओम ने अपनी पोस्ट में लिखा कि एक दिन उनके बॉस ने चेतावनी देते हुए कहा, “अगर तुमने भारतीय समयानुसार शाम 7 बजे के बाद मेरे कमेंट्स का दोबारा जवाब दिया, तो मैं पूरे एक हफ्ते तक तुम्हारे पीआर (Pull Request) का रिव्यू नहीं करूंगा।”
बॉस की इस अनोखी और सख्त हिदायत का असर यह हुआ कि ओम ने जानबूझकर अगले दिन का इंतजार करना शुरू कर दिया। हालांकि वे कभी-कभार अब भी देर तक काम कर लेते हैं, लेकिन इस घटना ने उन्हें यह अहसास कराया कि विदेशी प्रोफेशनल अपनी पर्सनल लाइफ को कितनी प्राथमिकता देते हैं। ओम का कहना है कि सचमुच, उन साहब को मुझसे ज्यादा मेरे खुद के वर्क-लाइफ बैलेंस की परवाह थी, जो कि एक बहुत अच्छा अनुभव रहा।
सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस, यूजर्स ने शेयर किए अपने अनुभव
यह पोस्ट सोशल मीडिया पर आग की तरह फैल गई और इसके बाद अन्य भारतीय यूजर्स ने भी विदेशी बॉस और पश्चिमी वर्क कल्चर के साथ अपने ऐसे ही दिलचस्प अनुभव शेयर करने शुरू कर दिए।
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एक यूजर ने लिखा कि शुक्रवार को जब उन्होंने एक पीआर (PR) रेज किया, तो उनके रोमानियाई सहकर्मी ने तुरंत लैपटॉप बंद करने को कहा। उस दिन उन्हें समझ आया कि हमेशा सही वर्क कल्चर वाली जगह पर काम करना चाहिए।
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एक अन्य यूजर ने अपना अनुभव साझा करते हुए बताया कि उनकी शिफ्ट दोपहर 2:30 से रात 11:30 बजे तक है। उन्होंने काम से जुड़े एक जरूरी सवाल के लिए अमेरिकी सीनियर आर्किटेक्ट को कॉल किया और कहा कि वे ज्यादा समय नहीं लेंगे। इस पर उस अमेरिकी सीनियर ने दो टूक जवाब दिया, “हां, तुम्हें ज्यादा समय लेना भी नहीं चाहिए क्योंकि तुम्हारे काम के घंटे खत्म हो चुके हैं, तुम्हें अब काम नहीं करना चाहिए!”
यह वायरल किस्सा इस बात की मिसाल है कि कैसे पेशेवर जिंदगी के साथ मानसिक शांति और निजी जीवन का संतुलन विदेशी कंपनियों में सर्वोच्च प्राथमिकता माना जाता है।
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