पेपर लीक कानून में भारी खामियां: राहुल गांधी का बड़ा दावा—एक भी बड़े मास्टरमाइंड को नहीं मिली सजा

देश भर में नीट (NEET) और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक के मुद्दे को लेकर सियासी घमासान मचा हुआ है। संसद से लेकर सड़कों तक विपक्ष केंद्र सरकार को घेरने में जुटा है। इसी कड़ी में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर एंटी-पेपर लीक कानून (Public Examinations Act) पर सवाल खड़े किए हैं। राहुल गांधी ने दावा किया कि केंद्र सरकार द्वारा बनाए गए इस कड़े कानून में कई ऐसी बड़ी खामियां (Loopholes) हैं, जिनकी वजह से पेपर लीक सिंडिकेट चलाने वाले बड़े सरगना और मास्टरमाइंड्स आसानी से बच निकलते हैं। आइए एक पॉलिटिकल और ग्राउंड रिपोर्टर के नजरिए से समझते हैं कि राहुल गांधी ने कानून पर क्या-क्या सवाल उठाए हैं।

“10 सालों में 152 पेपर लीक, पर एक भी बड़े मास्टरमाइंड को सजा नहीं”

राहुल गांधी ने आंकड़ों का हवाला देते हुए केंद्र सरकार की नीतियों पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि पिछले 10 वर्षों में देश भर में 152 से ज्यादा सरकारी परीक्षाओं के पेपर लीक हो चुके हैं, जिससे करोड़ों युवाओं का भविष्य अधर में लटक गया है।

  • कानून में खामियां: राहुल गांधी के अनुसार, मौजूदा कानून का इस्तेमाल केवल छोटे-मोटे दलालों या जमीनी स्तर के मोहरों को पकड़ने के लिए होता है।

  • सजा का अभाव: उन्होंने दावा किया कि आज तक एक भी ऐसे बड़े संस्थान, प्रिंटिंग प्रेस मालिक या कोचिंग माफिया के बड़े सरगना को सख्त सजा नहीं मिली है जो इन घोटालों के असली सूत्रधार होते हैं।

एंटी-पेपर लीक कानून में राहुल गांधी ने बताईं 3 बड़ी कमियां

  1. जवाबदेही का अभाव: कानून में परीक्षा आयोजित कराने वाली प्रमुख एजेंसियों (जैसे NTA) के शीर्ष अधिकारियों और जवाबदेह मंत्रालयों पर सीधी आपराधिक जिम्मेदारी तय करने का कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं है।

  2. जांच प्रक्रिया में देरी: मामले की जांच में सालों लग जाते हैं, जिससे समय के साथ सबूत कमजोर हो जाते हैं और कानूनी दांव-पेच का फायदा उठाकर मुख्य आरोपी जमानत पर बाहर आ जाते हैं।

  3. वित्तीय रिकवरी और मुआवजा नहीं: पेपर रद्द होने से प्रभावित हुए छात्रों को आर्थिक और मानसिक नुकसान का कोई मुआवजा नहीं मिलता, जबकि परीक्षा शुल्क के नाम पर युवाओं से करोड़ों रुपये ऐंठ लिए जाते हैं।

संसद में निष्पक्ष चर्चा और केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग

राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी ने स्पष्ट किया कि जब तक सरकार इस कानून की कमियों को दूर नहीं करती और परीक्षा प्रणाली में आमूलचूल बदलाव नहीं लाती, तब तक छात्रों को न्याय मिलना मुमकिन नहीं है। उन्होंने संसद के सत्र के दौरान इस पर व्यापक और निष्पक्ष चर्चा की मांग की है।

साथ ही, विपक्ष ने निष्पक्ष जांच का हवाला देते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को दोहराया है। फिलहाल, पीएम मोदी द्वारा पेपर लीक मामलों की त्वरित सुनवाई के लिए ‘फास्ट ट्रैक कोर्ट’ के ऐलान के बाद राहुल गांधी का यह हमला सरकार के लिए एक नई राजनीतिक चुनौती बन गया है।