कोलेस्ट्रॉल की यह दवा कम कर सकती है हार्ट अटैक का खतरा, रिसर्च में हुआ बड़ा खुलासा

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News India Live, Digital Desk: हृदय रोग (Heart Diseases) आज के समय में दुनिया भर में मौत के सबसे बड़े कारणों में से एक बन गए हैं। खराब लाइफस्टाइल और बढ़ता कोलेस्ट्रॉल इस जोखिम को और अधिक बढ़ा देते हैं। लेकिन हाल ही में हुई एक मेडिकल रिसर्च ने उम्मीद की एक नई किरण जगाई है। शोधकर्ताओं का दावा है कि कोलेस्ट्रॉल को कम करने वाली एक खास दवा के सेवन से हार्ट अटैक और स्ट्रोक के खतरे को 30 प्रतिशत तक कम किया जा सकता है।

क्या कहती है नई रिसर्च?

हालिया अध्ययन में उन दवाओं के प्रभाव का विश्लेषण किया गया जो शरीर में ‘बैड कोलेस्ट्रॉल’ यानी LDL (Low-Density Lipoprotein) को नियंत्रित करती हैं। रिसर्च के अनुसार, जो लोग नियमित रूप से निर्धारित कोलेस्ट्रॉल की दवाएं (विशेष रूप से स्टेटिंस और नई पीढ़ी की दवाएं) ले रहे थे, उनमें कार्डियोवैस्कुलर घटनाओं (जैसे दिल का दौरा या ब्लॉकेज) का जोखिम उन लोगों की तुलना में 30% कम देखा गया जो इलाज नहीं करा रहे थे।

कोलेस्ट्रॉल और हार्ट अटैक का संबंध

शरीर में जब LDL कोलेस्ट्रॉल की मात्रा बढ़ जाती है, तो यह धमनियों (Arteries) की दीवारों पर जमा होने लगता है। इसे ‘प्लाक’ (Plaque) कहा जाता है।

ब्लॉकेज: प्लाक जमा होने से धमनियां संकरी हो जाती हैं, जिससे रक्त का प्रवाह बाधित होता है।

रप्चर: यदि यह प्लाक अचानक टूट जाए, तो वहां खून का थक्का (Clot) जम सकता है, जो हार्ट अटैक का कारण बनता है। दवाएं इसी प्रक्रिया को रोकने या प्लाक को स्थिर करने का काम करती हैं।

बचाव के लिए 5 जरूरी टिप्स

सिर्फ दवा ही नहीं, बल्कि जीवनशैली में बदलाव भी हार्ट हेल्थ के लिए अनिवार्य हैं:

संतुलित आहार: खाने में ट्रांस फैट और सैचुरेटेड फैट की मात्रा कम करें। हरी सब्जियां, फल और ओट्स को डाइट में शामिल करें।

फिजिकल एक्टिविटी: रोजाना कम से कम 30 मिनट की पैदल चाल (Brisk Walking) या व्यायाम कोलेस्ट्रॉल को कम करने में मदद करता है।

वजन नियंत्रण: बढ़ता वजन सीधे तौर पर कोलेस्ट्रॉल और ब्लड प्रेशर को प्रभावित करता है।

नियमित जांच: 30 की उम्र के बाद साल में कम से कम एक बार लिपिड प्रोफाइल टेस्ट जरूर कराएं।

धूम्रपान से दूरी: स्मोकिंग ‘गुड कोलेस्ट्रॉल’ (HDL) को कम करती है और धमनियों को नुकसान पहुंचाती है।

डॉक्टर की सलाह क्यों है जरूरी?

हालांकि रिसर्च 30% जोखिम कम होने की बात करती है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी दवा की शुरुआत बिना डॉक्टर की सलाह के नहीं करनी चाहिए। हर मरीज की मेडिकल हिस्ट्री अलग होती है और डॉक्टर आपकी रिपोर्ट के आधार पर ही सही डोज तय करते हैं।

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