Ashadha Gupt Navratri 2026: आज से शुरू हुई आषाढ़ गुप्त नवरात्रि, जानिए घटस्थापना का सटीक शुभ मुहूर्त और गृहस्थों के लिए बेहद सरल पूजा विधि

सनातन धर्म में नवरात्रि का पर्व मां भगवती की असीम कृपा पाने का सबसे पवित्र समय माना जाता है। वर्ष में आने वाली दो प्रत्यक्ष नवरात्रियों (चैत्र और शारदीय) के अलावा दो गुप्त नवरात्रियां भी आती हैं, जिनमें से एक है—आषाढ़ गुप्त नवरात्रि। आज यानी बुधवार, 15 जुलाई 2026 से इस पावन पर्व की शुरुआत हो रही है, जो 23 जुलाई 2026 तक श्रद्धा और विश्वास के साथ मनाई जाएगी।

गुप्त नवरात्रि विशेष रूप से तंत्र-मंत्र, कठिन साधना, गुप्त सिद्धियों और मंत्र जाप के लिए अत्यंत फलदायी मानी जाती है। इस दौरान मां दुर्गा के नौ अलौकिक रूपों के साथ-साथ 10 महाविद्याओं (मां काली, तारा देवी, त्रिपुर सुंदरी, भुवनेश्वरी, छिन्नमस्ता, भैरवी, धूमावती, बगलामुखी, मातंगी और कमला देवी) की विशेष गुप्त आराधना की जाती है, जिससे साधक की आध्यात्मिक उन्नति और सांसारिक मनोकामनाएं बहुत जल्दी पूरी होती हैं।

घटस्थापना (कलश स्थापना) का सटीक शुभ मुहूर्त

हिंदू पंचांग के अनुसार, आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि 14 जुलाई 2026 को सुबह 11:42 बजे प्रारंभ हो चुकी है और इसका समापन आज 15 जुलाई 2026 को सुबह 08:20 बजे होगा। शास्त्रों में प्रतिपदा तिथि के भीतर ही कलश स्थापना का विधान है, इसलिए मुहूर्त इस प्रकार है:

  • घटस्थापना शुभ मुहूर्त: सुबह 06:03 बजे से सुबह 08:20 बजे तक (आज)

  • मुहूर्त की कुल अवधि: 2 घंटे 17 मिनट

गृहस्थ श्रद्धालु इस सरल विधि से करें मां दुर्गा की पूजा

अक्सर लोगों में यह भ्रम रहता है कि गुप्त नवरात्रि केवल अघोरियों या तांत्रिकों के लिए है, लेकिन गृहस्थ श्रद्धालु भी पूरी सात्विकता के साथ मां दुर्गा की आराधना कर विशेष पुण्य फल पा सकते हैं।

1.पवित्रता और चौकी की स्थापना:चरण 1.

प्रातःकाल सूर्योदय से पूर्व उठकर स्नान आदि से निवृत्त हो जाएं। घर के उत्तर-पूर्व कोने (ईशान कोण) या पूजा स्थल की अच्छे से सफाई कर गंगाजल छिड़कें। इसके बाद एक लकड़ी की चौकी पर लाल या पीले रंग का साफ वस्त्र बिछाएं।

2.मां भगवती की स्थापना:चरण 2.

चौकी पर मां दुर्गा की प्रतिमा या चित्र, अथवा 10 महाविद्याओं की तस्वीर को श्रद्धापूर्वक स्थापित करें और माता का ध्यान लगाएं।

3.जौ बोना और कलश की तैयारी:चरण 3.

माता के सम्मुख एक मिट्टी के चौड़े पात्र में साफ मिट्टी डालकर उसमें जौ (जवारे) बो दें। अब तांबे या मिट्टी के कलश में स्वच्छ जल भरकर उसमें अक्षत (चावल), सुपारी, गंगाजल और एक सिक्का डालें।

4.कलश स्थापना:चरण 4.

कलश के मुख पर आम के 5 या 7 पत्ते लगाएं। एक कलावा (मौली) बंधे हुए नारियल को लाल चुनरी में लपेटकर कलश के ऊपर स्थापित कर दें। इस कलश को जौ वाले पात्र के बीच में रख दें।

5.अखंड दीप और पूजन सामग्री:चरण 5.

मूर्तियों के सामने घी या तिल के तेल का दीपक जलाएं (यदि संभव हो तो नौ दिनों का अखंड दीप जलाएं)। इसके बाद देवी मां को रोली, अक्षत, लाल पुष्प, फल, मिठाई और लाल चुनरी अर्पित करें।

6.पाठ और क्षमा याचना:चरण 6.

पूजा के दौरान पूरी श्रद्धा से ‘दुर्गा चालीसा’, ‘दुर्गा सप्तशती’, ‘अर्गला स्तोत्र’ या माता के बीज मंत्रों का जाप करें। अंत में मां दुर्गा की कपूर से आरती करें और पूजा में अनजाने में हुई भूलचूक के लिए हाथ जोड़कर क्षमा मांगें।

गुप्त नवरात्रि के दौरान इन नियमों का करें पालन

  • सात्विक जीवन: इन नौ दिनों के दौरान पूरी तरह सात्विक भोजन ग्रहण करें। लहसुन, प्याज और तामसिक चीजों से पूरी तरह दूरी बना लें।

  • मानसिक शुद्धता: ब्रह्मचर्य का पालन करें। मन में किसी के प्रति भी क्रोध, असत्य, कटु वचन या नकारात्मक विचारों को न आने दें।