
महाराष्ट्र के सियासी गलियारों से इस समय की सबसे बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है, जिसने राज्य की राजनीति में एक बार फिर बड़े उठापटक के संकेत दे दिए हैं। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के दोनों गुटों के शीर्ष नेताओं की मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के साथ मंगलवार की देर रात हुई ताबड़तोड़ गुप्त बैठकों ने राजनीतिक हलचल तेज कर दी है। राजनीतिक विशेषज्ञों के अनुसार, महाविकास अघाड़ी (MVA) को बड़ा झटका देते हुए शरद पवार की अगुवाई वाली एनसीपी (शरदचंद्र पवार) के कई विधायक पाला बदलने की तैयारी में हैं, जिससे केंद्र और राज्य दोनों ही स्तरों पर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) का पलड़ा भारी हो सकता है।
देर रात ‘सिल्वर ओक’ से वर्षा बंगले तक दौड़ी सियासी गाड़ियां
पर्दे के पीछे चल रही इस बड़ी बिसात की शुरुआत मंगलवार शाम को हुई, जब एनसीपी (SP) के प्रदेश अध्यक्ष जयंत पाटिल ने पहले दक्षिण मुंबई स्थित शरद पवार के आधिकारिक आवास ‘सिल्वर ओक’ पर जाकर उनसे लंबी मंत्रणा की। इस मुलाकात के तुरंत बाद जयंत पाटिल सीधे मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मिलने पहुंचे। इसी दौरान सत्ताधारी एनसीपी (अजित पवार गुट) के कद्दावर नेता प्रफुल्ल पटेल और सुनील तटकरे भी अलग से मुख्यमंत्री आवास पर चर्चा के लिए पहुंचे। हालांकि मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) या बैठक में शामिल किसी भी नेता ने इस मैराथन बैठक के एजेंडे पर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है, लेकिन सूत्रों का दावा है कि राज्य में एक बहुत बड़ा राजनीतिक गठजोड़ आकार ले रहा है।
विपक्षी खेमे में फंड की किल्लत: असमंजस में शरद पवार गुट के विधायक
जुलाई 2023 में अजित पवार के विद्रोह के बाद यह पहला मौका है जब शरद पवार की पार्टी सबसे गंभीर रणनीतिक संकट से गुजर रही है। अंदरूनी सूत्रों के मुताबिक, एनसीपी (SP) के 10 मौजूदा विधायकों में से कम से कम पांच विधायक विकास कार्यों के लिए प्रशासनिक मंजूरियों और निर्वाचन क्षेत्र के लिए फंड (Vikas Nidhi) न मिलने के कारण बेहद परेशान हैं। विपक्षी बेंच पर बैठने की वजह से उनके क्षेत्रों में विकास कार्य ठप पड़े हैं। जयंत पाटिल ने हाल ही में शरद पवार को विधायकों की इस नाराजगी और एनडीए (NDA) की तरफ उनके बढ़ते झुकाव से अवगत कराया था। फिलहाल इस पूरे घटनाक्रम पर ‘चाणक्य’ कहे जाने वाले शरद पवार ने रहस्यमयी चुप्पी साध रखी है।
दिल्ली से लेकर मुंबई तक सीटों का गणित और एनडीए को फायदा
अगर शरद पवार का गुट एनडीए के पाले में आता है या पार्टी में एक और टूट होती है, तो इसका सीधा असर दिल्ली की राजनीति पर पड़ेगा। वर्तमान में एनसीपी (SP) के पास लोकसभा में 8 महत्वपूर्ण सांसद और विधानसभा में 10 विधायक हैं। हालांकि यह महाराष्ट्र के प्रमुख दलों में संख्या बल के हिसाब से छोटा है, लेकिन केंद्र में भाजपा नीत एनडीए सरकार के लिए आगामी संसद सत्रों में सीमांकन विधेयक (Delimitation Bill) जैसे अत्यंत महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक कानूनों को पास कराने के लिए ये 8 सांसद बेहद निर्णायक साबित होंगे।
अजित पवार के असामयिक निधन के बाद दोनों गुटों में छिड़ी वर्चस्व की जंग
महाराष्ट्र की राजनीति में यह अनिश्चितता इस साल जनवरी के अंत में एक दुखद विमान हादसे में तत्कालीन उपमुख्यमंत्री अजित पवार के असामयिक और अचानक हुए निधन के बाद से और ज्यादा गहरी हो गई है। उनके निधन के बाद दोनों गुटों के एक होने की अटकलें थीं, लेकिन अब सुनेत्रा पवार के नेतृत्व को लेकर अजित पवार खेमे के भीतर ही आंतरिक कलह खुलकर सामने आ गई है। पूर्व राष्ट्रीय सचिव सच्चिदानंद सिंह द्वारा सुनेत्रा पवार के पार्टी अध्यक्ष पद के निर्वाचन को कानूनी चुनौती दिए जाने और राज्यसभा सांसद पार्थ पवार के बढ़ते प्रभाव से पार्टी के पुराने नेता नाराज हैं। इसी सांगठनिक खींचतान के बीच अब शरद पवार गुट के विधायकों की एनडीए से बढ़ती नजदीकियों ने कांग्रेस और पूरे इंडिया (INDIA) गठबंधन की धड़कनें बढ़ा दी हैं।
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