संसद में संख्या बल कम, फिर भी आर-पार के मूड में विपक्ष: मॉनसून सत्र के लिए INDIA गठबंधन ने चली नई चाल

नई दिल्ली: देश की राजनीति और विपक्षी मोर्चे में मची भारी उथल-पुथल के बीच राष्ट्रीय राजधानी में एक बेहद महत्वपूर्ण राजनीतिक हलचल देखने को मिली है। पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (TMC) और महाराष्ट्र में शिवसेना (UBT) के भीतर हुए हालिया विभाजन और तमिलनाडु में डीएमके (DMK) की आंतरिक नाराजगी के कारण संसद में विपक्ष का संख्या बल भले ही पहले से थोड़ा कम हो गया हो, लेकिन इंडिया (INDIA) गठबंधन सरकार को घेरने के लिए पहले से कहीं अधिक आक्रामक और रणनीतिक रूप से संगठित होने की तैयारी कर चुका है। आगामी मॉनसून सत्र को लेकर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के आवास पर हुई एक हाई-प्रोफाइल बैठक में विपक्षी दलों ने आपसी मतभेदों को दरकिनार कर संसद के भीतर एक नई और आक्रामक रणनीति को अंतिम रूप देना शुरू कर दिया है।

खरगे के आवास पर रणनीति बैठक: राहुल गांधी और वेणुगोपाल ने संभाली कमान

मॉनसून सत्र के दौरान विधायी रणनीति तय करने के लिए कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की अध्यक्षता में पार्टी के शीर्ष नीति-निर्माताओं की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। इस उच्च-स्तरीय मंथन में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष (LoP) राहुल गांधी और कांग्रेस संगठन महासचिव के.सी. वेणुगोपाल मुख्य रूप से मौजूद रहे। पार्टी के विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार, इस आंतरिक बैठक में केवल कांग्रेस की भूमिका पर ही नहीं, बल्कि पूरे विपक्षी गठबंधन की एकजुटता को अक्षुण्ण रखने और देश से जुड़े गंभीर ज्वलंत मुद्दों पर सरकार से सीधे तीखे सवाल पूछने के रोडमैप पर विस्तृत चर्चा की गई। कांग्रेस रणनीतिकारों का स्पष्ट मानना है कि क्षेत्रीय दलों में हुई टूट से भले ही विरोध की धार पर कुछ असर दिखा हो, लेकिन जनहित के मुद्दों पर विपक्ष अपनी पूरी ताकत झोंकने से पीछे नहीं हटेगा।

आस्था और भ्रष्टाचार का बड़ा मुद्दा: राम मंदिर चढ़ावा चोरी पर सरकार को घेरने का संकल्प

बैठक के समापन के बाद मीडिया से औपचारिक बातचीत करते हुए कांग्रेस महासचिव के.सी. वेणुगोपाल ने सरकार पर हमला बोलने के लिए विपक्ष के सबसे बड़े एजेंडे का खुलासा किया। उन्होंने बेहद कड़े शब्दों में आरोप लगाया कि अयोध्या के राम मंदिर में कथित रूप से हुआ चढ़ावा चोरी का मामला देश के सबसे बड़े वित्तीय भ्रष्टाचारों में से एक है। वेणुगोपाल ने कहा कि यह केवल धन की हेराफेरी का प्रशासनिक विषय नहीं है, बल्कि देश के करोड़ों हिंदुओं की धार्मिक आस्था पर किया गया एक बहुत बड़ा आघात है। इस कथित घोटाले के लिए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और विश्व हिंदू परिषद (VHP) को सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि इंडिया गठबंधन संसद के दोनों सदनों में इस मुद्दे को पूरी ताकत और शोर-शराबे के साथ उठाकर सरकार को कटघरे में खड़ा करेगा।

डीएमके (DMK) की नाराजगी और गठबंधन के भीतर समन्वय की कोशिशें

तमिलनाडु की क्षेत्रीय राजनीति में कांग्रेस के तमिलगा वेत्री कड़गम (TVK) सरकार में शामिल होने के फैसले से उपजी नाराजगी के बाद डीएमके और कांग्रेस के रिश्तों में आई खटास को लेकर भी विपक्षी खेमे में गंभीर चर्चा हुई। हालांकि, कांग्रेस के एक वरिष्ठ राष्ट्रीय नेता ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि इंडिया गठबंधन के कई शीर्ष नेता लगातार डीएमके के शीर्ष नेतृत्व के साथ सीधा संवाद बनाए हुए हैं। कांग्रेस आलाकमान को पूरा भरोसा है कि स्थानीय स्तर पर चाहे जो भी मतभेद हों, लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर संसद के भीतर सरकार विरोधी मोर्चे पर डीएमके इंडिया गठबंधन के सामूहिक निर्णयों के खिलाफ कभी नहीं जाएगी, जिससे विपक्षी एकजुटता को कोई बड़ा खतरा नहीं है।

‘एक समय पर एक मुद्दा’: सरकार पर लगातार दबाव बनाने का नया चक्रव्यूह

संसद के इस मॉनसून सत्र में विपक्ष ने अपनी पुरानी गलतियों से सीख लेते हुए एक बेहद परिपक्व और सोची-समझी संसदीय रणनीति तैयार की है, जिसे ‘एक समय, एक मुद्दा’ का नाम दिया गया है। विपक्षी दलों के एक वरिष्ठ रणनीतिकार ने बताया कि इस बार सत्र के दौरान विपक्ष सभी बड़े मुद्दों को एक साथ उठाकर सदन में हंगामा करने के बजाय, उन्हें बेहद सिलसिलेवार और व्यवस्थित ढंग से एक-एक करके उठाएगा। इस नई योजना का मुख्य उद्देश्य यह है कि हर हफ्ते एक नया और प्रभावी मुद्दा उठाकर सदन में चर्चा की मांग की जाए, जिससे पूरे मॉनसून सत्र के दौरान केंद्र सरकार पर चौतरफा और निरंतर राजनैतिक दबाव बना रहे और आम जनता के मुद्दों को संसद के पटल पर भटकने न दिया जाए।