
पैसा कमाना जितना जरूरी है, उससे कहीं ज्यादा जरूरी उसे सही तरीके से मैनेज करना होता है। कई बार लोग दिन-रात एक करके बहुत मेहनत से पैसा कमाते हैं, लेकिन अनजाने में पर्सनल फाइनेंस से जुड़ी कुछ ऐसी बुनियादी गलतियां कर बैठते हैं जिससे उनकी सारी जमा-पूंजी धीरे-धीरे खत्म हो जाती है। नतीजा यह होता है कि भविष्य के बड़े और महत्वपूर्ण लक्ष्य अधूरे रह जाते हैं।
चूंकि जुलाई का महीना शुरू हो चुका है, ऐसे में यह साल के बचे हुए महीनों के लिए अपने खर्चों, बजट और निवेश (Investment) के तौर-तरीकों का आकलन करने का सबसे सही और सटीक समय है। आइए विस्तार से जानते हैं पर्सनल फाइनेंस से जुड़ी उन 6 बड़ी गलतियों के बारे में, जिनसे आपको अपने सुरक्षित भविष्य के लिए हर हाल में बचना चाहिए।
1. मंथली बजट न बनाना और फिजूलखर्ची
अक्सर लोग सैलरी आते ही बिना किसी ठोस प्लानिंग के अंधाधुंध खर्च करना शुरू कर देते हैं। बिना लिखित या डिजिटल बजट के यह ट्रैक करना नामुमकिन हो जाता है कि आपका पैसा आख़िर कहां जा रहा है। आपको पता ही नहीं चलता कि आप कब अपनी जरूरत से ज्यादा और गैर-जरूरी चीजों पर फिजूलखर्ची कर चुके हैं। इसका सबसे सीधा समाधान यह है कि हर महीने की शुरुआत में एक बजट बनाएं। इसमें अपनी फिक्स्ड जरूरतों (किराया, बिल), इनवेस्टमेंट और पर्सनल खर्चों का हिस्सा पहले ही तय कर लें।
2. निवेश को कल पर टालना और आलस करना
बहुत से युवाओं की सोच होती है कि ‘जब मेरी सैलरी बढ़ेगी या जब मेरे पास बहुत सारा पैसा इकट्ठा होगा, तब मैं निवेश शुरू करूंगा।’ यह वित्तीय दुनिया की सबसे बड़ी भूल मानी जाती है। निवेश में जितनी देरी करेंगे, आप कम्पाउंडिंग (Compounding) की जातुई ताकत का फायदा उठाने से उतना ही चूक जाएंगे। रकम चाहे कितनी भी छोटी क्यों न हो, जैसे- ₹500 या ₹1,000 की मंथली एसआईपी (SIP), जितनी जल्दी हो सके अपनी उम्र के शुरुआती दौर में ही निवेश की शुरुआत कर दें।
3. सारा पैसा सिर्फ बैंक के सेविंग्स अकाउंट में छोड़ना
अपने पूरे फंड या एक्स्ट्रा सेविंग्स को सिर्फ बैंक के साधारण सेविंग्स अकाउंट में पड़े रहने देना बिल्कुल भी समझदारी नहीं है। सेविंग्स अकाउंट पर मिलने वाला सालाना ब्याज बेहद कम होता है, जो लगातार बढ़ती महंगाई (Inflation) का मुकाबला नहीं कर पाता। इसका असर यह होता है कि समय के साथ आपके पैसे की वास्तविक वैल्यू कम होती जाती है। इसलिए इमरजेंसी फंड के अलावा बाकी के पैसों को सही म्यूचुअल फंड, फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) या अन्य सरकारी स्कीमों में निवेश करें जहां महंगाई से ज्यादा रिटर्न मिल सके।
4. क्रेडिट कार्ड और लोन का अंधाधुंध इस्तेमाल
आजकल क्रेडिट कार्ड, ईएमआई (EMI) और ‘बाय नाउ पे लेटर’ (BNPL) जैसे डिजिटल विकल्पों के कारण लोग अपनी वित्तीय क्षमता से कहीं ज्यादा खर्च करने लगे हैं। बिना उचित प्लानिंग के लिया गया यह कर्ज आपको भारी-भरकम ब्याज के जाल में फंसा देता है। समय पर भुगतान न करने से आपका सिबिल स्कोर (CIBIL Score) भी बुरी तरह खराब होता है, जिससे भविष्य में होम लोन या कार लोन मिलना मुश्किल हो जाता है। क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल सिर्फ रिवॉर्ड्स या सहूलियत के लिए करें, लोन लेकर शौक पूरे करने की आदत से बिल्कुल बचें।
5. किसी भी तरह का इमरजेंसी फंड तैयार न करना
जिंदगी में अनपेक्षित बीमारियां, नौकरी जाना या कोई भी बड़ा संकट बिना बताए आता है। बहुत से लोग इसके लिए अलग से कोई बैकअप फंड नहीं रखते। अचानक कोई बड़ी जरूरत आने पर लोग अपनी लॉन्ग-टर्म सेविंग्स जैसे- बच्चों की पढ़ाई या रिटायरमेंट का पैसा बीच में ही तोड़ देते हैं या फिर महंगे ब्याज पर पर्सनल लोन लेते हैं। आपके पास हमेशा कम से कम 6 महीने के जरूरी घरेलू खर्च के बराबर की रकम ‘इमरजेंसी फंड’ (Emergency Fund) के रूप में लिक्विड या सुरक्षित रूप में होनी चाहिए।
6. अपने फाइनेंशियल गोल्स की समय पर समीक्षा न करना
समय के साथ आपकी नौकरी बदलती है, सैलरी बढ़ती है और पारिवारिक जिम्मेदारियां भी बढ़ती हैं। लेकिन कई लोग सालों पहले शुरू किए गए महज ₹2,000 के निवेश को वैसे ही चलने देते हैं। अपनी बदलती आय के हिसाब से निवेश राशि (Step-up Investment) न बढ़ाने के कारण आप अपने लॉन्ग-टर्म लक्ष्यों को समय पर हासिल नहीं कर पाते। साल में कम से कम एक या दो बार अपने पूरे पोर्टफोलियो और वित्तीय लक्ष्यों की समीक्षा जरूर करें और आमदनी बढ़ने पर निवेश की राशि भी बढ़ाएं।
अमीर बनने या अपने पैसों को बेहतर तरीके से मैनेज करने के लिए किसी बहुत जटिल फॉर्मूले की जरूरत नहीं है। बजट बनाने, फिजूलखर्ची रोकने और समय पर अनुशासन के साथ निवेश करने जैसी छोटी और अच्छी आदतें ही आपकी फाइनेंशियल हेल्थ को लाइफटाइम मजबूत बना सकती हैं।
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