
जब भी हमें कोई नई नौकरी मिलती है, तो हमारा पूरा ध्यान सालाना सीटीसी (CTC) और इन-हैंड सैलरी पर होता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि आपकी सीटीसी का एक छोटा सा हिस्सा, जो प्रोविडेंट फंड (EPF) में जाता है, आपके रिटायरमेंट के बाद की पूरी आर्थिक तस्वीर को बदल सकता है?
अक्सर कई कंपनियां ईपीएफ योगदान की गणना के लिए बेसिक सैलरी की एक न्यूनतम सरकारी सीमा तय कर देती हैं, जिसके कारण लंबे समय में आपका रिटायरमेंट फंड बहुत छोटा रह जाता है। लेकिन अगर आप सही फाइनेंशियल प्लानिंग के साथ कर्मचारी भविष्य निधि (EPF) और वॉलंटरी प्रोविडेंट फंड (VPF) का सही तालमेल बिठाएं, तो बुढ़ापे में मिलने वाला फंड 5 गुना तक बढ़ सकता है और आप आसानी से करोड़ों रुपये के मालिक बन सकते हैं। आइए समझते हैं इसका पूरा गणित।
कैसे मामूली अंतर से बन जाएगा ₹1.9 करोड़ का फंड?
मान लीजिए एक कर्मचारी की सालाना सीटीसी ₹12 लाख है। अब ईपीएफ योगदान दो अलग-अलग तरीकों से तय होता है और दोनों का अंतर आपको चौंका देगा:
केस 1: न्यूनतम सीमा पर योगदान (मंथली सेविंग ₹3,600)
ज्यादातर कंपनियां बेसिक सैलरी की सरकारी सीमा यानी ₹15,000 प्रति महीने पर ही 12% ईपीएफ काटती हैं। इस स्थिति में आपके और कंपनी के हिस्से को मिलाकर हर महीने कुल ₹3,600 ईपीएफ में जमा होंगे। अगर वर्तमान ब्याज दर 8.25% और निवेश की अवधि 30 साल मान लें, तो रिटायरमेंट पर आपको मिलेंगे करीब ₹57 लाख।
केस 2: वास्तविक बेसिक सैलरी पर योगदान (मंथली सेविंग ₹12,000)
अब मान लीजिए आपकी कंपनी आपकी वास्तविक बेसिक सैलरी, जो सीटीसी का 50% यानी ₹50,000 महीना है, उस पर 12% पीएफ काटती है। ऐसे में आपका और कंपनी का मिलाकर हर महीने कुल योगदान ₹12,000 हो जाता है। इसी 8.25% ब्याज दर और 30 साल की अवधि में आपका कुल फंड बढ़कर ₹1.9 करोड़ हो जाएगा!
यानी सिर्फ बेसिक सैलरी पर पीएफ कैलकुलेट करवाने से आपकी जेब में बिना किसी अतिरिक्त प्रयास के ₹1.3 करोड़ से अधिक का अतिरिक्त फंड जुड़ जाता है। यह है पीएफ पर मिलने वाली कंपाउंडिंग की असली ताकत।
VPF कराएगा रिटायरमेंट फंड को सीधे ₹3.2 करोड़ के पार
अगर आप अपने बुढ़ापे को और भी सुरक्षित और आलीशान बनाना चाहते हैं, तो आप वीपीएफ (Voluntary Provident Fund) का विकल्प चुन सकते हैं। वीपीएफ आपको अनिवार्य 12% की सीमा से अधिक अपनी मर्जी से पीएफ में निवेश करने की पूरी छूट देता है।
ऊपर दिए गए उदाहरण में अगर आप ईपीएफ के ₹12,000 के योगदान के साथ हर महीने वीपीएफ के जरिए ₹8,000 का अतिरिक्त निवेश करते हैं, तो आपकी कुल मासिक बचत ₹20,000 हो जाएगी। 30 साल बाद 8.25% ब्याज के हिसाब से आपका यह फंड बढ़कर करीब ₹3.2 करोड़ हो जाएगा! यह शुरुआती ₹57 लाख के मुकाबले 5 गुना से भी ज्यादा है।
नौकरी बदलते या जॉइन करते समय इन 3 बातों का रखें विशेष ध्यान
हर कंपनी का पीएफ काटने का नियम और सैलरी स्ट्रक्चर अलग होता है। इसलिए नई नौकरी जॉइन करते समय या सैलरी डिस्कशन के वक्त ये बातें जरूर जांचें:
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पीएफ कैलकुलेशन का आधार: कंपनी के एचआर से साफ पूछें कि वे पीएफ का योगदान ₹15,000 की न्यूनतम सीमा पर कर रहे हैं या आपकी वास्तविक बेसिक सैलरी पर।
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बेसिक सैलरी का हिस्सा: आपकी सीटीसी में बेसिक सैलरी का कुल हिस्सा कितना है, क्योंकि आपका पीएफ फंड इसी से तय होता है।
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VPF की सुविधा: क्या कंपनी आपको वीपीएफ के जरिए अपनी सैलरी से अतिरिक्त निवेश करने की अनुमति देती है।
महत्वपूर्ण नोट: ज्यादा पीएफ और वीपीएफ काटने का एक ही सीधा असर होता है कि इससे आपकी हर महीने हाथ में आने वाली (Take-Home) सैलरी कम हो जाती है। इसलिए भविष्य के लिए निवेश बढ़ाने से पहले यह जरूर सुनिश्चित कर लें कि आपके पास पर्याप्त इमरजेंसी फंड तैयार है और आपके मंथली घरेलू खर्चे आसानी से पूरे हो रहे हैं।
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