
भीषण गर्मी के लंबे दौर के बाद मानसून की पहली बारिश हर किसी के चेहरे पर मुस्कान ले आती है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह सुहाना मौसम गर्भवती महिलाओं के लिए कई तरह की स्वास्थ्य चिंताएं और चुनौतियां भी साथ लेकर आता है? हवा में बढ़ी हुई अत्यधिक नमी, जगह-जगह जलभराव, दूषित खान-पान और मच्छरों का तेजी से पनपना— ये सभी कारक प्रेग्नेंसी के दौरान संक्रमण (Infection) के खतरे को कई गुना बढ़ा देते हैं। चूंकि गर्भावस्था में महिलाओं का शरीर पहले से ही गर्भस्थ शिशु के विकास के लिए अत्यधिक काम कर रहा होता है, इसलिए इस मौसम में जरा सी लापरवाही भी मां और बच्चे दोनों की सेहत पर भारी पड़ सकती है।
मुंबई के प्रतिष्ठित नारायणा हेल्थ एसआरसीसी चिल्ड्रन हॉस्पिटल की कंसल्टेंट ऑब्स्टेट्रिक्स एंड गायनेकोलॉजी डॉ. रुजुल झावेरी कहती हैं, “मानसून का समय डरने का नहीं, बल्कि सही तैयारियों के साथ अपनी और शिशु की सुरक्षा सुनिश्चित करने का है। कुछ आसान आदतों को बदलकर एक सुखद और सुरक्षित प्रेग्नेंसी का आनंद लिया जा सकता है।”
पानी और भोजन में बरतें कड़ाई: मामूली पेट दर्द भी बन सकता है आफत
बरसात के दिनों में टाइफाइड, हेपेटाइटिस ए, डायरिया और गैस्ट्रोएंटेराइटिस जैसी घातक जलजनित बीमारियों (Waterborne Diseases) का ग्राफ तेजी से ऊपर जाता है। सामान्य दिनों के मुकाबले प्रेग्नेंसी में पेट का मामूली संक्रमण भी शरीर में पानी की कमी (निर्जलीकरण) पैदा कर सकता है, जो गर्भावस्था में गंभीर जटिलताएं खड़ी कर सकता है। डॉ. रुजुल झावेरी सलाह देती हैं कि इस मौसम में हमेशा विश्वसनीय स्रोत से प्राप्त, अच्छी तरह उबला हुआ या फिल्टर किया हुआ पानी ही पीएं। बाहर जाते समय घर से अपनी पानी की बोतल साथ ले जाना सबसे बेहतरीन आदत है।
खान-पान के मामले में भी इस मौसम में अत्यधिक संयम की जरूरत होती है। सड़क किनारे मिलने वाले चाट-पकौड़े और स्नैक्स जितने लुभावने लगते हैं, उनमें बैक्टीरिया का खतरा उतना ही ज्यादा होता है। इसलिए हमेशा ताजा और घर का बना संतुलित भोजन ही करें। अपनी डाइट में अच्छी तरह पकी हुई हरी सब्जियां, छिलके वाले ताजे फल, साबुत अनाज और अंडे, दालें, डेयरी प्रोडक्ट्स या लीन मीट जैसे उच्च गुणवत्ता वाले प्रोटीन स्रोतों को जरूर शामिल करें। मानसून में कच्चे सलाद, अधपके मांस और लंबे समय तक बिना ढके रखे गए भोजन से पूरी तरह दूरी बना लेनी चाहिए।
नमी और उमस से बढ़ता है फंगल इन्फेक्शन: व्यक्तिगत स्वच्छता है सबसे बड़ा हथियार
बरसात के मौसम में तापमान में उतार-चढ़ाव और उमस का कॉम्बिनेशन बैक्टीरिया और फंगस के पनपने के लिए सबसे अनुकूल माहौल तैयार करता है। यही कारण है कि इस दौरान पर्सनल हाइजीन (व्यक्तिगत स्वच्छता) का खास ख्याल रखना चाहिए। दिन में कम से कम दो बार हल्के गुनगुने पानी से स्नान करें, बार-बार साबुन से हाथ धोएं और हमेशा पूरी तरह से सूखे सूती (Cotton) के आरामदायक कपड़े ही पहनें।
अगर आप किसी वजह से बारिश में भीग जाती हैं, तो गीले कपड़ों या अंडरगारमेंट्स में ज्यादा देर तक बिल्कुल न रहें। जितनी जल्दी हो सके सूखे और साफ कपड़े बदल लें, ताकि त्वचा पर होने वाले फंगल या यीस्ट इन्फेक्शन की संभावना को शुरुआत में ही खत्म किया जा सके।
मच्छरों का आतंक: डेंगू और मलेरिया प्रेग्नेंसी में हो सकते हैं जानलेवा
गर्भवती महिलाओं के लिए डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया जैसी मच्छर जनित बीमारियां बेहद खतरनाक साबित हो सकती हैं। डॉ. झावेरी के अनुसार, प्रेग्नेंसी में इन बीमारियों के कारण प्लेटलेट्स तेजी से गिर सकते हैं जो प्री-मैच्योर डिलीवरी का कारण बन सकते हैं। मच्छरों से बचने के लिए हमेशा पूरी आस्तीन वाले और शरीर को ढकने वाले कपड़े पहनें। सोते समय मच्छरदानी का उपयोग सबसे सुरक्षित उपाय है।
इसके साथ ही ध्यान रखें कि घर या आसपास कहीं भी गमलों, कूलरों या गड्ढों में पानी जमा न होने दें। यदि आप किसी मॉस्किटो रिपेलेंट (मच्छर भगाने वाले उत्पाद या क्रीम) का इस्तेमाल करना चाहती हैं, तो पहले अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें कि वह गर्भावस्था में सुरक्षित है या नहीं। यदि तेज बुखार, जोड़ों में तेज दर्द, शरीर पर चकत्ते या असामान्य ब्लीडिंग जैसे लक्षण दिखें, तो इसे बिल्कुल भी नजरअंदाज न करें।
फिसलन भरी सड़कों पर अतिरिक्त सावधानी: सीढ़ियों पर रेलिंग का लें सहारा
मानसून के दौरान जलभराव के कारण सड़कें बेहद फिसलन भरी हो जाती हैं, जिससे गर्भवती महिलाओं के गिरने या असंतुलित होने का खतरा बढ़ जाता है। इस मौसम में हाई हील्स या कम ग्रिप वाले सैंडल पहनने की भूल बिल्कुल न करें। अच्छी पकड़ (एंटी-स्लिप) वाले फ्लैट जूते या सैंडल ही पहनें।
सीढ़ियां चढ़ते या उतरते समय हमेशा साइड रेलिंग को मजबूती से पकड़ें। डॉ. झावेरी का कहना है कि “यदि दुर्भाग्य से आप फिसलकर गिर जाती हैं और बाहर से पूरी तरह ठीक महसूस कर रही हैं, तब भी बिना देरी किए अपने गायनेकोलॉजिस्ट से संपर्क करें। प्रेग्नेंसी से जुड़ी आंतरिक चोट या जटिलताएं तुरंत सामने नहीं आतीं, इसलिए मेडिकल चेकअप जरूरी है।”
वॉक और डॉक्टर के अपॉइंटमेंट को न करें मिस
खराब मौसम या भारी बारिश के बहाने अक्सर महिलाएं अपने रूटीन डॉक्टरी चेकअप या प्रसवपूर्व अपॉइंटमेंट (Antenatal Checkups) को टाल देती हैं, जो कि बेहद गलत है। अपनी जांच के दिन मौसम का हाल देखकर पहले से प्लानिंग करें और यात्रा के लिए अतिरिक्त समय लेकर निकलें।
साथ ही, अगर डॉक्टर ने बेड रेस्ट की सलाह न दी हो, तो घर के अंदर ही हल्की वॉक, प्रसवपूर्व योग (Prenatal Yoga) और स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज जारी रखें। इससे शरीर में ब्लड सर्कुलेशन बेहतर रहता है और पीठ दर्द में आराम मिलता है। याद रखें कि शिशु की हलचल (Fetal Movement) अचानक कम होना, ब्लीडिंग होना, पेट में तेज मरोड़ उठना या फ्लूइड का रिसाव होना सीधे तौर पर मेडिकल इमरजेंसी है, ऐसी स्थिति में तुरंत नजदीकी अस्पताल पहुंचें।
girls globe