सियासी दांव-पेंच फ्लॉप, ‘दादा’ हिट! जय शाह के राज में सौरव गांगुली को मिला क्रिकेट का सर्वोच्च सम्मान

क्रिकेट की हरी पिच हो या फिर क्रिकेट प्रशासन का हाई-प्रोफाइल बोर्ड रूम, ‘प्रिंस ऑफ कोलकाता’ यानी सौरव गांगुली का नाम हमेशा सुर्खियों के केंद्र में रहता है। भारतीय क्रिकेट इतिहास के सबसे आक्रामक और सफल कप्तानों में शुमार ‘दादा’ ने अपने 54वें जन्मदिन पर एक ऐसा ऐतिहासिक मुकाम हासिल कर लिया है, जिसने हर भारतीय क्रिकेट प्रेमी का सीना गर्व से चौड़ा कर दिया है। जय शाह के नेतृत्व वाली अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (ICC) ने सौरव गांगुली को प्रतिष्ठित ‘आईसीसी हॉल ऑफ फेम’ में शामिल कर क्रिकेट जगत का सबसे बड़ा सम्मान दिया है। आईसीसी का यह फैसला न सिर्फ एक महान खिलाड़ी की विरासत को सलाम करता है, बल्कि उन आलोचकों को भी करारा जवाब है जो गांगुली और जय शाह के बीच कड़वाहट की मनगढ़ंत कहानियां बुन रहे थे।

दिग्गजों के एलीट क्लब में शामिल हुए सौरव गांगुली

इस ऐतिहासिक सम्मान के साथ ही सौरव गांगुली अब भारतीय क्रिकेट के उन चुनिंदा कालजयी खिलाड़ियों की विशेष कतार में शामिल हो गए हैं, जिन्होंने विश्व पटल पर भारत की धाक जमाई थी। ‘हॉल ऑफ फेम’ का हिस्सा बनते ही दादा ने आधिकारिक रूप से सुनील गावस्कर, कपिल देव और सचिन तेंदुलकर जैसे लेजेंड्स के एलीट क्लब में अपनी जगह पक्की कर ली है। क्रिकेट के मक्का कहे जाने वाले ‘लॉर्ड्स’ की बालकनी में टी-शर्ट लहराकर गोरे हुक्मरानों को उनकी औकात याद दिलाने से लेकर टीम इंडिया को विदेशों में जीत का हुनर सिखाने तक, गांगुली का यह सफर अब क्रिकेट के इतिहास में सुनहरे अक्षरों में दर्ज हो चुका है।

खेल भावना के आगे राजनीति ढेर, अफवाहों पर लगा पूर्णविराम

जब सौरव गांगुली की बीसीसीआई (BCCI) अध्यक्ष पद से विदाई हुई थी, तब सोशल मीडिया और गलियारों में कई तरह के राजनीतिक नैरेटिव सेट करने की कोशिश की गई थी। कई विश्लेषकों ने इसे जय शाह और गांगुली के बीच की तथाकथित आपसी खींचतान का नतीजा करार दिया था। लेकिन आज जब जय शाह आईसीसी के सर्वोच्च पद पर आसीन हैं, तब उनके कार्यकाल में गांगुली को यह सर्वोच्च सम्मान मिलना खेल की शुद्धता को दर्शाता है। इस फैसले ने साफ कर दिया है कि खेल के मैदान पर की गई तपस्या और बेजोड़ टैलेंट के आगे हर तरह के राजनीतिक दांव-पेंच और मनगढ़ंत अफवाहें घुटने टेक देती हैं।

मैच फिक्सिंग के अंधेरे से निकालकर टीम इंडिया को निडर बनाना

आईसीसी हॉल ऑफ फेम में गांगुली की यह शानदार एंट्री सिर्फ उनके बल्ले से निकले 18,000 से अधिक अंतरराष्ट्रीय रनों का परिणाम नहीं है, बल्कि यह उस बेखौफ ‘लीडरशिप’ का सम्मान है जिसने भारतीय क्रिकेट को सबसे कठिन दौर से बाहर निकाला था। साल 2000 में जब मैच फिक्सिंग के काले साए ने भारतीय क्रिकेट की साख को हिलाकर रख दिया था, तब दादा ने ही टीम की कमान संभाली और खिलाड़ियों में आंखों में आंखें डालकर लड़ने का जज्बा भरा। वीरेंद्र सहवाग, युवराज सिंह, हरभजन सिंह, जहीर खान और खुद महेंद्र सिंह धोनी जैसे मैच-विनर्स गांगुली की पारखी नजरों की ही देन हैं। साल 2003 वर्ल्ड कप का फाइनल हो या नेटवेस्ट सीरीज की ऐतिहासिक जीत, गांगुली ने हमेशा भारतीय टीम को फ्रंट से लीड किया।

‘हॉल ऑफ फेम’ का गौरव पाने वाले 12वें भारतीय बने दादा

इस अभूतपूर्व उपलब्धि को हासिल करने के साथ ही सौरव गांगुली ‘आईसीसी हॉल ऑफ फेम’ की प्रतिष्ठित सूची में जगह बनाने वाले भारत के 12वें महान खिलाड़ी बन गए हैं। आईसीसी के इस सर्वोच्च मंच पर अब तक सम्मान पाने वाले भारतीय दिग्गजों की पूरी सूची इस प्रकार है:

  • बिशन सिंह बेदी (2009)

  • सुनील गावस्कर (2009)

  • कपिल देव (2010)

  • अनिल कुंबले (2015)

  • राहुल द्रविड़ (2018)

  • सचिन तेंदुलकर (2019)

  • वीनू मांकड़ (2021)

  • डायना एडुल्जी (2022)

  • वीरेंद्र सहवाग (2023)

  • नीतू डेविड (2024)

  • एमएस धोनी (2025)

  • सौरव गांगुली (2026)

राजनीति में एंट्री को लेकर उड़ने वाली तमाम अफवाहों और अटकलों पर खुद सौरव गांगुली ने हमेशा के लिए विराम लगा दिया है। दादा ने स्पष्ट लहजे में कहा कि वे अपने जीवन में कभी भी किसी राजनीतिक मामले या दल का हिस्सा नहीं रहे हैं और उनका एकमात्र प्यार और ध्यान हमेशा क्रिकेट पर ही केंद्रित रहा है।