हिजाब वाली फोटो में कान दिखने जरूरी हैं? हैदराबाद में वोटर लिस्ट चेकिंग के दौरान मुस्लिम महिलाओं में भारी भ्रम

ग्रेटर हैदराबाद नगर निगम (GHMC) क्षेत्र में इस समय चल रहे मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान के दौरान एक अनोखा प्रशासनिक और सामाजिक विवाद सामने आया है। वोटर लिस्ट फॉर्म पर चिपकाई जाने वाली पासपोर्ट साइज तस्वीरों को लेकर मुस्लिम महिला मतदाताओं के बीच भारी असमंजस और भ्रम की स्थिति बनी हुई है। विशेष रूप से हिजाब, बुर्का या सिर पर पारंपरिक स्कार्फ पहनने वाली महिलाओं में इस बात को लेकर गहरा सस्पेंस है कि क्या सरकारी रिकॉर्ड और वोटर आईडी कार्ड के लिए दी जाने वाली तस्वीर में उनके कान दिखाई देना कानूनी रूप से अनिवार्य है। यह मुद्दा तब और गंभीर हो गया जब अलग-अलग मतदान केंद्रों पर तैनात बूथ स्तर के अधिकारियों (BLO) ने महिलाओं को विरोधाभासी निर्देश देने शुरू कर दिए, जिससे पूरी प्रक्रिया में स्पष्टता की मांग तेज हो गई है।

बीएलओ के अलग-अलग बयानों से फैला भ्रम: ज़मीनी स्तर पर नियमों में एकरूपता की भारी कमी

हैदराबाद के विभिन्न मुस्लिम बहुल इलाकों से आ रही रिपोर्टों के मुताबिक, ज़मीनी स्तर पर काम कर रहे अधिकारियों को खुद इस नियम की स्पष्ट जानकारी नहीं है। कुछ बूथ स्तर के अधिकारियों (BLO) ने महिलाओं को सख्त हिदायत दी है कि वे ऐसी तस्वीरें जमा करें जिसमें उनका सिर तो ढका हो लेकिन दोनों कान पूरी तरह साफ नजर आ रहे हों। इसके उलट, कई अन्य बीएलओ इस बात को लेकर पूरी तरह अनिश्चित दिखे और उन्होंने किसी भी तरह की फोटो स्वीकार करना शुरू कर दिया।

मणिकोंडा की रहने वाली एक मुस्लिम महिला मतदाता आयशा फातिमा ने इस प्रशासनिक भ्रम पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि आमतौर पर लोगों के बीच यह धारणा बनी हुई है कि पासपोर्ट, आधार या किसी भी अन्य मुख्य आधिकारिक दस्तावेज के लिए महिला आवेदक के कान साफ दिखने चाहिए। इसी सामाजिक धारणा और अधिकारियों के अलग-अलग बयानों के कारण महिलाओं के मन में यह सवाल उठ रहा है कि क्या उनके धार्मिक पहनावे के साथ सरकारी पहचान पत्र की फोटो का कोई टकराव है।

बहादुरपुरा में सोशल मीडिया की अफवाहों ने बढ़ाई चिंता: बिना स्कार्फ और स्कार्फ वाली फोटो का घालमेल

इस असमंजस का सबसे ज्यादा असर बहादुरपुरा विधानसभा क्षेत्र में देखा जा रहा है। वहां कार्यरत एक बीएलओ ने बताया कि सोशल मीडिया पर इस विषय को लेकर कई तरह की अफवाहें और भ्रामक पोस्ट चल रहे थे, जिसके बाद से उनके पास महिलाओं के सवालों की बाढ़ आ गई है।

वर्तमान स्थिति यह है कि महिलाएं पूरी तरह असमंजस में होने के कारण तीन अलग-अलग श्रेणियों की तस्वीरें जमा कर रही हैं—कुछ महिलाएं बिना स्कार्फ के सामान्य फोटो दे रही हैं, कुछ स्कार्फ के साथ कान दिखने वाली फोटो जमा कर रही हैं, तो कुछ ऐसी तस्वीरें भी दे रही हैं जिनमें सिर और कान दोनों पूरी तरह से ढके हुए हैं। बीएलओ फिलहाल केवल इस बात पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं कि फोटो धुंधली न हो, लेकिन वे किसी को ठोस नियम बताने की स्थिति में नहीं हैं।

चुनाव पंजीकरण अधिकारियों में भी मतभेद: वरिष्ठ अधिकारियों से स्पष्टीकरण का इंतजार

यह भ्रम केवल आम जनता या बीएलओ तक सीमित नहीं है, बल्कि शीर्ष चुनाव पंजीकरण अधिकारियों (ERO) के स्तर पर भी दिशानिर्देशों को लेकर एकरूपता का भारी अभाव दिखा। जब प्रशासनिक स्तर पर इस नियम की पड़ताल की गई, तो तीन अलग-अलग अधिकारियों ने तीन अलग-अलग दलीलें दीं।

एक वरिष्ठ अधिकारी ने स्पष्ट रूप से स्वीकार किया कि भारत निर्वाचन आयोग (ECI) की ओर से हिजाब में कान दिखने की अनिवार्यता को लेकर कोई विशेष या अलग से गाइडलाइन जारी नहीं की गई है। वहीं, दूसरे अधिकारी ने कहा कि अगर फोटो में कान साफ दिखाई दे रहे हैं, तो वे उसे बिना किसी आपत्ति के तुरंत स्वीकार कर लेंगे। इसके विपरीत, तीसरे अधिकारी ने किसी भी तरह के विवाद से बचते हुए कहा कि वे इस संवेदनशील विषय पर अपने शीर्ष अधिकारियों से लिखित स्पष्टीकरण लेने के बाद ही कोई आधिकारिक जवाब देंगे।

जिला चुनाव अधिकारी आरवी कर्नन ने खत्म किया सस्पेंस: चेहरा साफ दिखना ही एकमात्र शर्त

तस्वीरों को लेकर सोशल मीडिया से लेकर प्रशासनिक गलियारों में चल रही सभी अटकलों और भ्रम पर विराम लगाते हुए आखिरकार जिला चुनाव अधिकारी (DEO) और जीएचएमसी कमिश्नर आरवी कर्नन ने पूरी स्थिति को पूरी तरह स्पष्ट कर दिया है। उन्होंने साफ और कड़े शब्दों में स्पष्ट किया है कि भारत के धर्मनिरपेक्ष ढांचे में किसी भी नागरिक के धार्मिक पहनावे से निर्वाचन प्रक्रिया को कोई आपत्ति नहीं है।

जिला चुनाव अधिकारी आरवी कर्नन ने आधिकारिक बयान जारी करते हुए कहा कि मतदाता पहचान पत्र या नए पंजीकरण फॉर्म के लिए सबसे महत्वपूर्ण और बुनियादी बात यह है कि सभी तस्वीरें बिल्कुल साफ और उच्च गुणवत्ता की होनी चाहिए। जब तक फोटो में संबंधित महिला मतदाता का चेहरा पूरी तरह से सामने से स्पष्ट, पहचानने योग्य और विजिबल दिख रहा है, तब तक कान दिखने या न दिखने से तस्वीरों की प्रामाणिकता पर कोई समस्या नहीं होनी चाहिए और ऐसी सभी तस्वीरों को बिना किसी भेदभाव के तुरंत स्वीकार किया जाएगा।