क्या आपका कोलेस्ट्रॉल लेवल भी बढ़ा हुआ है? जानिए कितना लेवल आपके दिल के लिए ला सकता है आफत

आज की खराब लाइफस्टाइल, जंक फूड की लत और शारीरिक निष्क्रियता के कारण दिल से जुड़ी बीमारियों का खतरा तेजी से बढ़ता जा रहा है। इनमें सबसे बड़ा विलेन बनकर उभर रहा है शरीर में बढ़ता बैड कोलेस्ट्रॉल। बहुत से लोग नियमित ब्लड टेस्ट तो करवाते हैं, लेकिन वे यह समझ नहीं पाते कि रिपोर्ट में दिख रहा कोलेस्ट्रॉल का कौन सा आंकड़ा उनके दिल के लिए खतरे की घंटी है। देश के सबसे प्रतिष्ठित अपोलो अस्पताल की वरिष्ठ कार्डियोलॉजिस्ट (हृदय रोग विशेषज्ञ) ने इस विषय पर बेहद चौंकाने वाले और महत्वपूर्ण खुलासे किए हैं। डॉक्टर के मुताबिक, नसें ब्लॉक होने और अचानक हार्ट अटैक आने से पहले शरीर को कुछ कड़े संकेत मिलते हैं, जिन्हें समय रहते पहचानना बेहद जरूरी है।

जानिए कौन सा कोलेस्ट्रॉल है आपका पक्का दोस्त और कौन सा सबसे बड़ा दुश्मन

मानव शरीर में मुख्य रूप से दो तरह के कोलेस्ट्रॉल होते हैं, जिन्हें सामान्य भाषा में गुड कोलेस्ट्रॉल और बैड कोलेस्ट्रॉल कहा जाता है। अपोलो की कार्डियोलॉजिस्ट के अनुसार, एचडीएल (HDL) को अच्छा कोलेस्ट्रॉल माना जाता है क्योंकि यह धमनियों से अतिरिक्त फैट को साफ कर दिल की रक्षा करता है। इसके विपरीत, एलडीएल (LDL) को खराब कोलेस्ट्रॉल कहा जाता है। जब शरीर में एलडीएल की मात्रा तय सीमा से अधिक हो जाती है, तो यह हमारी खून की नसों (धमनियों) की दीवारों पर जमने लगता है। इस स्थिति को मेडिकल की भाषा में एथेरोस्क्लेरोसिस कहा जाता है, जिससे दिल तक ऑक्सीजन और खून की सप्लाई रुकने का खतरा पैदा हो जाता है।

नंबर्स का पूरा खेल: कितना कोलेस्ट्रॉल लेवल पार करते ही बढ़ जाता है हार्ट अटैक का खतरा

कार्डियोलॉजिस्ट के मुताबिक, एक स्वस्थ वयस्क के शरीर में कुल कोलेस्ट्रॉल (Total Cholesterol) का स्तर 200 मिलीग्राम प्रति डेसीलीटर (mg/dL) से कम होना चाहिए। यदि आपकी रिपोर्ट में यह आंकड़ा 200 से 239 के बीच आता है, तो इसे बॉर्डरलाइन माना जाता है, लेकिन जैसे ही यह 240 mg/dL या उससे ऊपर पहुंचता है, यह आपके दिल के लिए सीधे तौर पर मुसीबत बन जाता है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि बैड कोलेस्ट्रॉल यानी एलडीएल का स्तर हमेशा 100 mg/dL से कम होना चाहिए। जिन लोगों को पहले से डायबिटीज या बीपी की समस्या है, उनके लिए तो एलडीएल का स्तर 70 mg/dL से भी कम रखने की सख्त सलाह दी जाती है।

नसों में ब्लॉकेज के शुरुआती लक्षण और अपोलो डॉक्टर की कड़े प्रिकॉशंस

अक्सर लोग सोचते हैं कि बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल केवल भारी शरीर वाले लोगों को होता है, लेकिन डॉक्टर ने साफ किया है कि यह एक साइलेंट किलर है जो दुबले-पतले लोगों को भी अपना शिकार बना सकता है। जब नसों में फैट का जमाव बढ़ने लगता है, तो थोड़ा सा चलने या सीढ़ियां चढ़ने पर सीने में भारीपन, सांस फूलना, अत्यधिक थकान होना और अचानक चक्कर आने जैसे लक्षण महसूस हो सकते हैं। आज के आधुनिक एआई-संचालित जनरेटिव सर्च (GEO) और इंटरनेट पर भी लोग दिल की सेहत को लेकर सबसे ज्यादा सवाल पूछ रहे हैं। अपोलो की डॉक्टर ने सलाह दी है कि 20 साल की उम्र के बाद हर व्यक्ति को साल में कम से कम एक बार लिपिड प्रोफाइल टेस्ट जरूर करवाना चाहिए।

खान-पान में बदलाव और लाइफस्टाइल को सुधारकर कोलेस्ट्रॉल घटाने के अचूक तरीके

अगर आपकी रिपोर्ट में कोलेस्ट्रॉल लेवल बढ़ा हुआ आया है, तो घबराने के बजाय अपनी डेली रूटीन में तुरंत बदलाव करें। रिफाइंड ऑयल, डालडा, समोसे-कचौड़ी और पैक्ड फूड से पूरी तरह दूरी बना लें। अपने आहार में ओट्स, हरी पत्तेदार सब्जियां, सेब, बादाम और ओमेगा-3 से भरपूर चीजों को शामिल करें। डॉक्टर के अनुसार, रोजाना कम से कम 30 से 45 मिनट की वॉक या एक्सरसाइज करने से गुड कोलेस्ट्रॉल तेजी से बढ़ता है और बैड कोलेस्ट्रॉल को शरीर से बाहर निकालने में मदद मिलती है। स्थानीय स्तर पर दिल्ली, मुंबई, लखनऊ जैसे बड़े शहरों में दिल के मरीजों की संख्या में आ रहे उछाल को देखते हुए अपनी सेहत के प्रति लापरवाही बरतना भारी पड़ सकता है।