वामांगी या दायां हिस्सा? पूजा और हवन में पति के किस तरफ बैठना चाहिए पत्नी को, जानें शास्त्रों के नियम!

सनातन धर्म में किसी भी पूजा-पाठ, यज्ञ या मांगलिक कार्य का पूर्ण फल तभी प्राप्त होता है, जब उसे पूरी विधि-विधान और सही नियमों के साथ संपन्न किया जाए. हिंदू संस्कृति में वैवाहिक जीवन को आध्यात्मिक यात्रा माना गया है, यही वजह है कि गृहस्थ जीवन में पति-पत्नी को एक-दूसरे का पूरक माना जाता है. अक्सर लोग इस बात को लेकर उलझन में रहते हैं कि धार्मिक अनुष्ठानों के दौरान पत्नी को पति के दाईं (Right) तरफ बैठना चाहिए या बाईं (Left) तरफ. शास्त्रों में इस विषय पर बहुत ही स्पष्ट और विस्तार से नियम बताए गए हैं, जिनका पालन करने से ही पूजा सफल मानी जाती है. आइए जानते हैं कि किस कार्य में पत्नी का स्थान कहां होना चाहिए.

कब दाईं ओर बैठना है जरूरी? यज्ञ, हवन और संकल्प के नियम

वैसे तो शास्त्रों में पत्नी को ‘वामांगी’ कहा गया है, जिसका अर्थ होता है बाईं ओर रहने वाली. लेकिन जब बात शुभ कार्यों, यज्ञ और अनुष्ठानों की आती है, तो नियम बदल जाते हैं. शास्त्रों के अनुसार, जब भी कोई विवाहित पुरुष कोई धार्मिक अनुष्ठान या देव-कार्य करता है, तो उसकी पत्नी को उसके दाईं ओर बैठना अनिवार्य और शुभ माना गया है.

यदि घर में सत्यनारायण भगवान की कथा हो रही हो, कोई यज्ञ, हवन या विशेष पूजन चल रहा हो, तो पत्नी हमेशा पति के दाहिने हिस्से में ही बैठेगी. इसके अलावा निम्नलिखित परिस्थितियों में भी पत्नी का दाईं ओर बैठना शास्त्रों सम्मत है:

  • कन्यादान: विवाह के समय बेटी का कन्यादान करते हुए और पवित्र संकल्प लेते समय.

  • संस्कार और व्रत: संतान के नामकरण संस्कार के दौरान या किसी भी धार्मिक व्रत का उद्यापन करते समय.

  • पितृ कार्य: श्राद्ध, तर्पण और पितरों से जुड़े अनुष्ठानों में.

  • दान और तीर्थ: किसी को दान देते समय, तीर्थ स्नान करते हुए या किसी विशेष पर्व-त्योहार पर पूजा करते समय.

कब बाईं ओर होना चाहिए पत्नी का स्थान?

शास्त्रों के नियमों के मुताबिक, कुछ विशेष और सांसारिक परिस्थितियों में पत्नी को पति के बाईं (Left) ओर रहने का विधान है. प्रेम, भौतिक सुख और पारिवारिक दायित्वों से जुड़े मामलों में पत्नी का स्थान बाईं तरफ होता है. इन प्रमुख अवसरों पर पत्नी को बाईं ओर होना चाहिए:

  • सिंदूरदान: विवाह के समय सिंदूरदान की रस्म के दौरान.

  • आशीर्वाद लेते समय: पूजा के बाद जब ब्राह्मणों या घर के बड़े-बुजुर्गों से आशीर्वाद लिया जा रहा हो.

  • चरण वंदन: बड़ों के पैर धोते समय या उनका सम्मान करते समय.

  • शयन काल: सोते समय पत्नी को हमेशा पति के बाईं ओर ही लेटना चाहिए.

इन प्राचीन और सांस्कृतिक नियमों का पालन करने से न केवल पूजा-पाठ का पूरा पुण्य मिलता है, बल्कि वैवाहिक जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और आपसी सामंजस्य भी बढ़ता है.