दिनभर की थकान, फिर भी रातभर करवटें, कहीं आप भी तो नहीं शिकार, नींद न आने के 5 छिपे हुए कारण और बचाव के असरदार तरीके

सामान्यतः दिनभर की शारीरिक मेहनत के बाद शरीर को गहरी नींद की जरूरत होती है, लेकिन कई बार यह लॉजिक काम नहीं करता। अगर आप भी रातभर बिस्तर पर करवटें बदलते रहते हैं और आंखों में नींद का नामोनिशान नहीं होता, तो इसे हल्के में न लें। नींद न आना यानी ‘स्लीप डिसऑर्डर’ आपकी शारीरिक और मानसिक सेहत पर गहरा असर डाल सकता है। इसे समझने के लिए हमें इसके पीछे की शारीरिक और जीवनशैली से जुड़ी जड़ों तक जाना होगा।

नींद उड़ाने वाले प्रमुख कारक नींद न आने के कारणों में सबसे मुख्य ‘इंसोम्निया’ है, जो एक गंभीर स्लीप डिसऑर्डर है। इसके अलावा, आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में तनाव और एंग्जाइटी स्लीप साइकल को पूरी तरह तहस-नहस कर देते हैं। अगर आप लंबे समय से तनाव में हैं, तो दिमाग सोते समय भी सक्रिय रहता है, जिससे नींद आने में बाधा आती है। इन मानसिक कारणों के अलावा, थायरॉइड असंतुलन भी नींद न आने का एक बड़ा मेडिकल कारण हो सकता है। महिलाओं के मामले में, मेनोपॉज के दौरान होने वाले हार्मोनल बदलाव और हॉट फ्लैश रात की नींद छीनने के लिए जिम्मेदार होते हैं। साथ ही, ब्लड प्रेशर, डिप्रेशन या अन्य गंभीर समस्याओं के लिए ली जाने वाली दवाइयां भी अनजाने में हमारी नींद का दुश्मन बन जाती हैं।

गहरी नींद के लिए अपनाएं ये ‘गोल्डन रूल्स’ अपनी स्लीप साइकल को पटरी पर लाने के लिए कुछ छोटे बदलाव बड़े चमत्कार कर सकते हैं। सबसे पहले, अपने सोने के कमरे को ‘स्लीप फ्रेंडली’ बनाएं; वहां पर्याप्त अंधेरा और हल्की ठंडक रखें। अपने सोने और जागने का एक निश्चित समय तय करें ताकि आपकी बॉडी क्लॉक (Body Clock) एक अनुशासन में आ जाए। सोने से कम से कम 4 से 6 घंटे पहले कैफीन, निकोटीन और शराब से दूरी बनाना बेहद जरूरी है। इसके अलावा, डिजिटल युग में ‘डिजिटल डिटॉक्स’ सबसे महत्वपूर्ण है—सोने से कम से कम एक घंटे पहले मोबाइल, लैपटॉप और स्क्रीन से पूरी तरह दूर हो जाएं ताकि आपका दिमाग शांत हो सके। यदि समस्या लंबे समय से बनी हुई है, तो डॉक्टर से परामर्श लेकर अपनी दवाइयों और सेहत की जांच जरूर कराएं।