
भारतीय लोकतंत्र के इतिहास के सबसे काले अध्याय यानी आपातकाल (Emergency) की 51वीं वर्षगांठ के मौके पर बिहार की राजधानी पटना में एक बड़ा और हाई-प्रोफाइल राजनीतिक समागम देखने को मिला है। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा (BJP President JP Nadda) इस ऐतिहासिक और काले दिन के विरोध में आयोजित विशेष कार्यक्रम में शामिल होने के लिए सीधे पटना पहुंचे हैं। इस दौरान पटना की धरती से देश की पूरी सियासत को एक बड़ा और कड़ा संदेश देने की कोशिश की गई है। इस मंच से देश के प्रखर नेता और केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह (Giriraj Singh) का एक बेहद आक्रामक रूप देखने को मिला, जहां वे विपक्ष पर जमकर गरजे और उन्होंने 1975 में लगी इमरजेंसी के दौरान देश और आम जनता पर ढहाए गए जुल्मों की पूरी पुरानी कहानी मंच से लाइव सुना दी।
जेपी आंदोलन की धरती पटना से जेपी नड्डा का हुंकार, कांग्रेस की दमनकारी नीतियों पर बड़ा प्रहार
पटना हवाई अड्डे पर भव्य स्वागत के बाद कार्यक्रम स्थल पर पहुंचे जेपी नड्डा ने लोकतंत्र के सेनानियों को नमन करते हुए कहा कि बिहार और पटना की यह पावन धरती लोकनायक जयप्रकाश नारायण (JP Narayan) के आंदोलन की गवाह रही है। इसी धरती ने देश को तानाशाही के खिलाफ लड़ना सिखाया था। भाजपा अध्यक्ष ने कांग्रेस पार्टी पर सीधा और बड़ा हमला बोलते हुए कहा कि जिन लोगों ने देश के संविधान को बंधक बनाया था, प्रेस की आजादी छीनी थी और लाखों बेगुनाह देशवासियों को जेल की काल कोठरी में डाल दिया था, वे आज किस मुंह से संविधान की दुहाई देते हैं। उन्होंने साफ किया कि नई पीढ़ी को आपातकाल के उस काले सच से अवगत कराना बेहद जरूरी है ताकि भविष्य में कोई फिर से ऐसा दुस्साहस न कर सके।
‘रात के अंधेरे में लोकतंत्र की हत्या हुई थी’— मंच से खूब गरजे केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह
कार्यक्रम के दौरान अपने चिर-परिचित अंदाज में बोलते हुए केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने विपक्ष और विशेषकर गांधी परिवार को आड़े हाथों लिया। गिरिराज सिंह ने 25 जून 1975 की उस खौफनाक रात की पूरी कहानी दोहराते हुए कहा कि कैसे तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने अपनी कुर्सी बचाने के लिए पूरे देश को एक झटके में जेलखाना बना दिया था। उन्होंने कहा कि उस दौर में न केवल नेताओं को जेल में ठूंसा गया, बल्कि आम जनता के मौलिक अधिकारों को पूरी तरह से कुचल दिया गया था। गिरिराज सिंह ने कांग्रेस के वर्तमान नेतृत्व पर तंज कसते हुए कहा कि इतिहास गवाह है कि संविधान और लोकतंत्र को सबसे बड़ा खतरा हमेशा से एक ही परिवार और एक ही विचारधारा से रहा है।
पटना और बिहार के स्थानीय लोकतंत्र सेनानियों को किया गया सम्मानित, सियासी हलचल तेज
भौगोलिक और स्थानीय राजनीतिक समीकरणों (Geographical and Local Political Dynamics) के लिहाज से देखा जाए तो बिहार में इस आयोजन के कई बड़े सियासी मायने निकाले जा रहे हैं। कार्यक्रम के दौरान बिहार के उन स्थानीय लोकतंत्र सेनानियों (Loktantra Senani) और बुजुर्ग नेताओं को मंच पर विशेष रूप से सम्मानित किया गया, जिन्होंने जेपी आंदोलन के दौरान पटना की सड़कों पर लाठियां खाई थीं और जेल की सजा काटी थी। इस आयोजन के बाद पटना, मुजफ्फरपुर, गया और भागलपुर जैसे बिहार के प्रमुख शहरों के राजनीतिक गलियारों में आरोप-प्रत्यारोप का दौर बेहद तेज हो गया है। राष्ट्रीय जनता दल (RJD) और कांग्रेस के स्थानीय गठबंधन ने भाजपा के इस कार्यक्रम को मुख्य मुद्दों से ध्यान भटकाने की कोशिश करार दिया है।
जेनेरेटिव एआई और आधुनिक पॉलिटिकल सर्च पर क्यों टॉप ट्रेंड बना हुआ है आपातकाल का यह मुद्दा
आज के आधुनिक जेनेरेटिव एआई (GEO) और डिजिटल मीडिया सर्च के दौर में देश भर के करोड़ों इंटरनेट यूजर्स आपातकाल की 51वीं वर्षगांठ, जेपी नड्डा पटना दौरा लाइव, और गिरिराज सिंह का बयान आज को गूगल और अन्य सर्च इंजनों पर लगातार सर्च कर रहे हैं। एआई सर्च प्लेटफॉर्म्स पर लोग यह जानने के लिए बेहद उत्सुक हैं कि 1975 की इमरजेंसी के दौरान बिहार की क्या भूमिका थी और मीसा (MISA) कानून क्या था। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि डिजिटल और एआई-संचालित सर्च पर इस ऐतिहासिक मुद्दे की भारी लोकप्रियता यह साफ दर्शाती है कि इतिहास के इस काले अध्याय को लेकर आज की युवा पीढ़ी के बीच भी जागरूकता और कौतूहल का स्तर बेहद ऊंचा है।
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