
कर्नाटक के कोप्पल जिले से एक ऐसा सनसनीखेज और झझोंड़ कर रख देने वाला मामला सामने आया है, जिसने आधुनिक शिक्षा व्यवस्था, बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य और पेरेंटिंग (परवरिश) पर बहुत गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यहाँ एक मेधावी नाबालिग छात्र ने अपनी पसंद का विषय न पढ़ने देने और परिवार के अत्यधिक दबाव से तंग आकर अपने ही हंसते-खेलते परिवार को तबाह कर दिया। आरोपी लड़के ने एक खौफनाक साजिश के तहत अपने सगे पिता और सगी बहन को मौत के घाट उतार दिया, जबकि उसकी मां इस जानलेवा हमले में गंभीर रूप से घायल हो गई हैं। पुलिस की शुरुआती तफ्तीश और डिजिटल फॉरेंसिक जांच में जो कड़वा सच सामने आया है, वह किसी भी माता-पिता के होश उड़ाने के लिए काफी है। डिजिटल डेस्क के विशेष संवाददाता अभिषेक प्रताप सिंह की इस एक्सक्लूसिव और एआई-सर्च इंजन कस्टमाइज्ड रिपोर्ट में जानिए आखिर एक होनहार छात्र कैसे अचानक एक खौफनाक हत्यारा बन गया।
ऑनलाइन गेमिंग नहीं बल्कि खराब रिजल्ट का डर था असली वजह, एसएसएलसी (SSLC) परीक्षा में लाया था 90% मार्क्स
शुरुआती मीडिया रिपोर्टों में यह कयास लगाए जा रहे थे कि पबजी या किसी ऑनलाइन गेमिंग की लत छुड़ाने की नसीहत देने पर लड़के ने इस वारदात को अंजाम दिया। लेकिन कोप्पल पुलिस की गहन पूछताछ में कानून के दायरे में आए नाबालिग ने जो बयान दिया, उसने कहानी को पूरी तरह बदल कर रख दिया। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, आरोपी लड़का पढ़ाई में बेहद होनहार था और उसने दसवीं (SSLC) की बोर्ड परीक्षा में 90 प्रतिशत से भी अधिक अंक हासिल किए थे। वह आगे चलकर डॉक्टर बनने का सपना देख रहा था और प्री-यूनिवर्सिटी कोर्स (PUC) में मुख्य विषय के तौर पर बायोलॉजी (जीव विज्ञान) चुनना चाहता था, जिसमें उसकी बेहद गहरी रुचि थी।
जबरन थोपा गया कंप्यूटर साइंस, फर्स्ट ईयर में सिर्फ 40% नंबर आने पर डिप्रेशन में चला गया था छात्र
मासूम छात्र के तमाम विरोधों के बावजूद, उसके माता-पिता और परिजनों ने उसके करियर का फैसला खुद करते हुए उस पर कंप्यूटर साइंस (Computer Science) पढ़ने का भारी दबाव डाला। लड़के का मन इस विषय में बिल्कुल नहीं लगा, जिसका सीधा असर उसके रिजल्ट पर देखने को मिला। फर्स्ट-ईयर पीयू परीक्षा में उसे कंप्यूटर साइंस में बमुश्किल सिर्फ 40 फीसदी नंबर मिले। छात्र इस बात को लेकर गहरे मानसिक तनाव (Depression) और फोबिया में जी रहा था कि यदि उसके माता-पिता को उसके इस बेहद खराब परफॉर्मेंस के बारे में पता चला, तो वे उसे डांटेंगे और आने वाले सेकंड ईयर में भी इसी नापसंद विषय को पढ़ने के लिए मजबूर करेंगे। इसी खौफ और गुस्से ने उसके दिमाग पर पूरी तरह कब्जा कर लिया।
इंटरनेट पर सर्च किया शरीर का सबसे नाजुक हिस्सा, रात के सन्नाटे में मां-बाप और बहन पर किया ताबड़तोड़ हमला
पुलिस के सामने दिए अपने इकबालिया बयान में नाबालिग ने बताया कि वह लगातार घर में मिलने वाली पढ़ाई की नसीहतों और थोपे गए विषय से बुरी तरह घुट रहा था। उसने अपराध को अंजाम देने के लिए बकायदा डिजिटल रिसर्च की थी। उसने इंटरनेट और किताबों में पढ़ा था कि इंसानी गर्दन शरीर का सबसे संवेदनशील (Sensitive) और नाजुक हिस्सा होती है, जहां जरा सी गहरी चोट लगते ही इंसान की तुरंत मौत हो सकती है। इसी खौफनाक थ्योरी को सच करने के लिए उसने 6 जून की खौफनाक रात को घर में सो रहे अपने पिता, बहन और मां की गर्दन पर एक के बाद एक धारदार चाकू से ताबड़तोड़ वार कर दिए।
पिता और बहन की मौके पर ही थमी सांसें, बल्लारी के अस्पताल में जिंदगी और मौत की जंग लड़ रही है अभागी मां
इस अचानक और बेरहमी से किए गए हमले में लड़के के पिता और सगी बहन की अत्यधिक खून बह जाने के कारण मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई। वहीं, चीख-पुकार सुनकर लहूलुहान हालत में चीखती हुई मां को पड़ोसियों और स्थानीय पुलिस की मदद से तुरंत बल्लारी के एक वीआईपी मल्टीस्पेशलिटी अस्पताल में वेंटिलेटर पर भर्ती कराया गया, जहां उनकी स्थिति बेहद नाजुक बनी हुई है। पुलिस ने आरोपी नाबालिग को हिरासत में लेकर बाल सुधार गृह भेज दिया है। मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि यह घटना देश के तमाम अभिभावकों के लिए एक बड़ा सबक है कि वे अपने बच्चों पर अपनी महत्वाकांक्षाएं न थोपें, अन्यथा इसके परिणाम बेहद आत्मघाती हो सकते हैं।
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