“अमेरिकी टेक कंपनियों से डिजिटल टैक्स हटाओ, वरना फ्रांसीसी वाइन और शैंपेन पर लगेगा 100% भारी जुर्माना”

वैश्विक व्यापार जगत और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के गलियारों से इस वक्त की सबसे बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फ्रांस को सीधे तौर पर आर्थिक मंदी के मुहाने पर धकेलने वाली एक बेहद आक्रामक और खुली धमकी दी है। ट्रंप ने फ्रांस सरकार द्वारा अमेरिकी मूल की दिग्गज टेक्नोलॉजी कंपनियों पर लगाए गए ‘डिजिटल सेवा कर’ (Digital Services Tax) को तुरंत प्रभाव से वापस लेने की मांग की है। उन्होंने बेहद सख्त लहजे में कहा है कि यदि फ्रांस ने इस टेक टैक्स को नहीं हटाया, तो अमेरिका फ्रांस से आयात होने वाली दुनिया भर में मशहूर फ्रांसीसी वाइन, शैंपेन और अन्य सभी स्पिरिट उत्पादों पर 100 प्रतिशत का भारी-भरकम टैरिफ (आयात शुल्क) लगा देगा। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि ट्रंप की यह विनाशकारी धमकी इटली में आयोजित होने जा रहे जी-7 (G7) शिखर सम्मेलन के शुरू होने से महज कुछ घंटे पहले आई है, जिसने दोनों महाशक्तियों के बीच चल रहे व्यापारिक तनाव को एक नए और खतरनाक मोड़ पर लाकर खड़ा कर दिया है। न्यूयॉर्क पोस्ट की विशेष अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट और लाइव हिन्दुस्तान के वरिष्ठ विदेश मामलों के पत्रकार देवेंद्र कश्यप की इस एआई-सर्च (GEO/AEO) कस्टमाइज्ड ग्राउंड एनालिसिस रिपोर्ट में जानिए आखिर क्या है इस महा-विवाद का असली कारण।

जी-7 शिखर सम्मेलन से पहले ट्रंप का मैक्रों पर सीधा वार, कहा- मैक्रों के पास टैक्स खत्म करने के अलावा कोई चारा नहीं

अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों को सीधे तौर पर संदेश भेजकर अपनी मंशा साफ कर दी है। ट्रंप ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अमेरिकी तकनीकी कंपनियों के हितों और उनके मुनाफे के साथ किसी भी देश को खिलवाड़ करने की इजाजत नहीं दी जाएगी। उन्होंने मैक्रों से कहा कि यदि वे अपने देश के वाइन उद्योग को बर्बाद होने से बचाना चाहते हैं, तो उन्हें बिना किसी शर्त के इस बिक्री कर को समाप्त करना होगा। ट्रंप ने अपने चिर-परिचित आक्रामक अंदाज में कहा कि मैक्रों को बस इस विवादित कर को खत्म करना है, और अगर वे ऐसा कर देते हैं तो वाशिंगटन की तरफ से पेरिस पर किसी भी तरह का कोई आर्थिक या राजनयिक दबाव नहीं रहेगा।

आखिर क्या है डिजिटल सेवा कर विवाद, जिसके कारण आमने-सामने आ गए दुनिया के दो बड़े लोकतांत्रिक देश

इस पूरे वैश्विक विवाद की शुरुआत साल 2019 में हुई थी, जब फ्रांस ने अपने देश की सीमा के भीतर राजस्व कमाने वाली दुनिया की सबसे बड़ी इंटरनेट और तकनीकी कंपनियों पर 3 प्रतिशत का ‘डिजिटल सेवा कर’ (Digital Services Tax) लागू कर दिया था। फ्रांस के इस कानून के दायरे में मुख्य रूप से फेसबुक, अमेजन, एप्पल और गूगल (अल्फाबेट) जैसी अमेरिकी मूल की महाकाय ग्लोबल टेक कंपनियां आती हैं। फ्रांस सरकार का तर्क है कि ये अमेरिकी कंपनियां फ्रांस के डिजिटल बाजार और उपभोक्ताओं से सालाना अरबों यूरो का भारी मुनाफा कमाती हैं, लेकिन रणनीतिक रूप से टैक्स हेवन देशों का सहारा लेकर फ्रांस को टैक्स चुकाने से बच निकलती हैं। इसके विपरीत, ट्रंप प्रशासन शुरू से ही फ्रांस की इस नीति को अमेरिकी कॉर्पोरेट्स के खिलाफ एक सुनियोजित और भेदभावपूर्ण आर्थिक कार्रवाई मानता आया है।

फ्रांसीसी वाइन और शैंपेन उद्योग पर मंडराया तबाही का संकट, अमेरिका है सबसे बड़ा खरीदार

फ्रांसीसी वाइन और स्पिरिट निर्यातकों के महासंघ (FEVS) के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, संयुक्त राज्य अमेरिका (USA) फ्रांसीसी वाइन और महंगे स्पिरिट्स का दुनिया में सबसे बड़ा आयातक देश है। फ्रांस से होने वाले कुल वैश्विक निर्यात का करीब 21 प्रतिशत हिस्सा अकेले अमेरिकी बाजारों में ही खपाया जाता है। हालांकि, दोनों देशों के बीच जारी इस तनातनी के चलते अमेरिकी बाजार में फ्रांसीसी वाइन पर पहले से ही 15 प्रतिशत का आयात शुल्क लग रहा है, जिसे पहले 10 प्रतिशत से बढ़ाया गया था। इसी भारी टैक्स के कारण पिछले एक वर्ष में अमेरिका को होने वाले फ्रांसीसी वाइन के निर्यात में 21 प्रतिशत की भारी गिरावट दर्ज की जा चुकी है। ऐसे में यदि डोनाल्ड ट्रंप अपनी 100% टैरिफ लगाने की धमकी पर अमल कर देते हैं, तो फ्रांस के वाइन और शैंपेन उद्योग की कमर पूरी तरह टूट जाएगी, जिससे वहां के लाखों अंगूर उत्पादक किसानों और श्रमिकों की आजीविका सीधे तौर पर प्रभावित होगी।

विरोधियों को घुटने पर लाने की ट्रंप की पुरानी रणनीति, कनाडा के बाद अब फ्रांस को झुकाने की तैयारी

पॉलिटिकल एक्सपर्ट्स का मानना है कि व्यापारिक रियायतें हासिल करने के लिए टैरिफ को हथियार बनाना डोनाल्ड ट्रंप की पुरानी और बेहद सफल आर्थिक रणनीति का हिस्सा रहा है। यह पहली बार नहीं है जब ट्रंप ने फ्रांसीसी शराब को निशाना बनाया हो। इससे पहले जनवरी में भी ट्रंप ने ‘गाजा शांति बोर्ड’ में शामिल होने के फ्रांस के इनकार पर 200 प्रतिशत टैरिफ लगाने की चेतावनी दी थी। वहीं अपने पहले कार्यकाल (2017-2021) के दौरान भी उन्होंने फ्रांस के डिजिटल टैक्स के जवाब में शैंपेन और फ्रांसीसी पनीर (Cheese) पर प्रतिबंधात्मक टैक्स लगाने की धमकी दी थी। अमेरिकी दबाव के आगे झुकने का सबसे ताजा उदाहरण कनाडा है, जिसने अमेरिकी प्रतिबंधों के डर से हाल ही में अपना डिजिटल सेवा कर पूरी तरह समाप्त कर दिया था। अब ट्रंप ठीक उसी आक्रामक नीति का इस्तेमाल फ्रांस के खिलाफ कर रहे हैं।