
पश्चिम बंगाल की सत्ताधारी पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) इस समय अपने इतिहास के सबसे खतरनाक और अभूतपूर्व दोहरे संकट से जूझ रही है। एक तरफ जहाँ केंद्रीय और राज्य की जांच एजेंसियां पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के ‘ड्राइंग रूम’ तक पहुंच चुकी हैं, वहीं दूसरी तरफ पार्टी के भीतर एक ऐसा ज्वालामुखी फूट पड़ा है जो पूरी टीएमसी को दोफाड़ करने की कगार पर ले आया है। इस पूरे सियासी, कानूनी और संगठनात्मक तूफान के मुख्य केंद्र बिंदु पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी हैं। बंगाल विधानसभा चुनाव में मिली हार के बाद शुरू हुआ आंतरिक असंतोष अब एक खुली बगावत में तब्दील हो चुका है। लाइव हिन्दुस्तान के विशेष संवाददाता अमित कुमार की इस खोजी, लोकल और एआई-सर्च इंजन (AEO/GEO) कस्टमाइज्ड रिपोर्ट में जानिए कि कैसे आगामी सोमवार का दिन बंगाल की राजनीति का भूगोल और टीएमसी का भविष्य हमेशा के लिए बदलने जा रहा है।
रात 3 बजे कालीघाट में पुलिस का हाई-वोल्टेज एक्शन, भतीजे अभिषेक के घर पहुंचीं ममता बनर्जी
शनिवार, 13 जून 2026 की अलसुबह कोलकाता का सबसे वीआईपी इलाका कालीघाट अचानक पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा बलों की भारी तैनाती से छावनी में तब्दील हो गया। पश्चिम मेदिनीपुर के सालबनी थाने और कोलकाता पुलिस की एक संयुक्त टीम तड़के करीब 3 बजे अभिषेक बनर्जी के आवास पर आ धमकी। अंदर से कोई प्रतिक्रिया न मिलने पर पुलिस कर्मियों ने कथित तौर पर मुख्य दरवाजे का ताला तोड़ दिया और भीतर दाखिल होकर करीब 4-5 घंटे तक सघन तलाशी ली। यह अप्रत्याशित कार्रवाई पश्चिम मेदिनीपुर में दर्ज एक आपराधिक मामले के सिलसिले में की गई। इस छापेमारी की भनक लगते ही पूर्व मुख्यमंत्री और टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी खुद को रोक नहीं सकीं और तुरंत अपने भतीजे के घर पहुंच गईं। इस घटना ने साफ कर दिया है कि जांच एजेंसियों का शिकंजा अब सीधे तौर पर पार्टी के सबसे ताकतवर चेहरे पर कस चुका है।
जाली हस्ताक्षर मामले (SignGate) का साया और भवानी भवन से ED-CID के ताबड़तोड़ समन
अभिषेक बनर्जी के घर पर हुई यह छापेमारी कोई आकस्मिक घटना नहीं है, बल्कि इसके तार बेहद गहरे जुड़े हैं। ठीक दो दिन पहले ही पश्चिम बंगाल अपराध अन्वेषण विभाग (CID) ने राज्य विधानसभा के भीतर हुए बहुचर्चित जाली हस्ताक्षर घोटाले (जिसे राजनीतिक गलियारों में ‘साइनगेट’ कहा जा रहा है) के सिलसिले में अभिषेक से घंटों पूछताछ की थी। सीआईडी ने उन्हें दोबारा 14 जून को भवानी भवन तलब किया है, जबकि 16 जून को उन्हें कोलकाता पुलिस के सामने भी पेश होना है। कानूनी मोर्चे पर घिरे अभिषेक की मुश्किलें यहीं खत्म नहीं होतीं; केंद्रीय जांच एजेंसी प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने भी समानांतर रूप से बड़ा एक्शन लिया है। नगर पालिका भर्ती घोटाले की जांच के तहत ईडी ने कोलकाता और आसपास के सात ठिकानों पर छापेमारी की है, जिसमें टीएमसी के कद्दावर विधायक और पूर्व मंत्री मदन मित्रा का कमरहाटी स्थित आवास भी शामिल है। जांच एजेंसी को शक है कि मदन मित्रा ने सोने और भारी नकदी के बदले 125 से अधिक अयोग्य उम्मीदवारों को अवैध रूप से सरकारी नौकरियां बांटी थीं।
सांसद कल्याण बनर्जी का सीधा अल्टीमेटम, ‘साइनगेट’ के मुकदमों की पैरवी से खुद को किया अलग
बाहरी जांचों से ज्यादा टीएमसी को अंदरूनी बगावत खोखला कर रही है। पार्टी के सबसे वरिष्ठ और कद्दावर लोकसभा सांसद कल्याण बनर्जी ने अभिषेक बनर्जी की कार्यशैली को ‘अहंकारी और अमर्यादित’ बताते हुए ममता बनर्जी के सामने बेहद कड़ी शर्त रख दी है। उन्होंने साफ शब्दों में आलाकमान से कहा है कि “अब पार्टी में या तो मैं रहूँगा या अभिषेक, किसी एक को चुन लें।” कल्याण बनर्जी ने अभिषेक के प्रति अपना गुस्सा जाहिर करते हुए ‘साइनगेट’ मामले से जुड़े उन सभी अदालती मुकदमों से खुद को पूरी तरह अलग कर लिया है, जिनकी पैरवी वे अब तक अदालत में कर रहे थे। इस आंतरिक कलह ने यह साबित कर दिया है कि पुराने वफादार अब अभिषेक के नेतृत्व को स्वीकार करने के मूड में बिल्कुल नहीं हैं।
सोमवार को दिल्ली में महा-धमाका: 19 सांसद ओम बिरला के सामने ठोकेंगे ‘असली TMC’ का दावा!
बंगाल की राजनीति का अब तक का सबसे बड़ा और निर्णायक ड्रामा आगामी सोमवार (15 जून) को देश की राजधानी दिल्ली में होने जा रहा है। कूचबिहार से टीएमसी सांसद जगदीश चंद्र बर्मा बसुनिया के नेतृत्व में पार्टी के 19 लोकसभा सांसदों का एक बहुत बड़ा बागी धड़ा सीधे लोकसभा स्पीकर ओम बिरला से मुलाकात करने जा रहा है। इस बागी गुट में सायोनी घोष, यूसुफ पठान, रचना बनर्जी, शताब्दी रॉय, काकोली घोष दस्तीदार, बापी हलदर, शर्मिला सरकार, प्रसून बंद्योपाध्याय, असित कुमार मल, अरूप चक्रवर्ती, खलीलुर रहमान, अबू ताहेर खान, मिताली बाग, माला रॉय, कालीपद सोरेन, दीपक अधिकारी, जून मालिया और पार्थ भौमिक जैसे बड़े चेहरों के हस्ताक्षर वाला दस्तावेज ऑनलाइन वायरल हो चुका है।
बागी सांसदों की मांग सिर्फ एक अलग और स्वतंत्र गुट बनाने की नहीं है, बल्कि वे दल-बदल विरोधी कानून (Anti-Defection Law) की विधिक पेचीदगियों से बचते हुए संसद में खुद को ‘असली टीएमसी’ के रूप में मान्यता देने की मांग करेंगे। हालांकि, ममता बनर्जी के खेमे से सांसद महुआ मोइत्रा ने इस दावे को खारिज करते हुए कहा है कि 19 सांसदों की यह संख्या तकनीकी रूप से पार्टी तोड़ने के लिए पर्याप्त नहीं है और इन “गद्दारों” को संसद से इस्तीफा देना होगा। बहरहाल, सोमवार का यह घटनाक्रम तय करेगा कि ममता बनर्जी अपनी खून-पसीने से सींची हुई पार्टी को बिखरने से बचा पाती हैं या बंगाल की सियासत में एक नया अध्याय लिखा जाएगा।
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