परिवहन मंत्रालय की रिपोर्ट में राज्यों के डराने वाले आंकड़े, हादसों को रोकने के लिए भारत सरकार ने फ्री किया यह रेडियो स्पेक्ट्रम

भारत में सड़क हादसों और उनमें होने वाली असमय मौतों को लेकर केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) ने एक बेहद चौंकाने वाली और आंखें खोल देने वाली वार्षिक रिपोर्ट जारी की है। इस आधिकारिक रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2024 में देश की सड़कों पर अपनी जान गंवाने वाले 40 हजार से अधिक नागरिकों को केवल एक अच्छी क्वालिटी के स्टैंडर्ड हेलमेट और कार सीटबेल्ट के सही इस्तेमाल से जिंदा बचाया जा सकता था। रिपोर्ट के डिजिटल आंकड़े साफ तौर पर बयां करते हैं कि किस तरह सुरक्षा उपकरणों के प्रति बरती गई मामूली लापरवाही हर साल हजारों हंसते-खेलते परिवारों को उजाड़ रही है। डिजिटल डेस्क के संपादक शुभम तिवारी की इस विशेष एआई (AI) और सर्च इंजन ऑप्टिमाइज्ड रिपोर्ट में विस्तार से जानिए कि देश के किन राज्यों में सड़क हादसों का ग्राफ सबसे ऊपर रहा और सरकार अब वाहनों की टक्कर रोकने के लिए कौन सी एडवांस तकनीक लाने जा रही है।

टू-व्हीलर सवारों पर मंडरा रहा है सबसे बड़ा काल, हेलमेट न लगाने से तमिलनाडु, महाराष्ट्र और एमपी में हाहाकार

मंत्रालय के आधिकारिक पुलिस डेटा के अनुसार, साल 2024 में सड़क हादसों के दौरान कुल 81,780 दोपहिया वाहन चालकों की मौत हुई, जिनमें से 40% से अधिक लोग सिर्फ इसलिए नहीं बच पाए क्योंकि उन्होंने स्टैंडर्ड हेलमेट नहीं पहना था। संयुक्त राष्ट्र (UN) की मोटरसाइकिल हेलमेट स्टडी का हवाला देते हुए रिपोर्ट में बताया गया है कि कार चालकों की तुलना में बाइक सवारों की सड़क हादसे में मरने की संभावना 26 गुना ज्यादा होती है। यदि बाइक सवार अच्छी क्वालिटी का हेलमेट पहनें, तो उनके बचने की उम्मीद 42% तक बढ़ जाती है और सिर में लगने वाली 69% घातक चोटों को रोका जा सकता है। लोकल (भौगोलिक) आंकड़ों के लिहाज से, हेलमेट न पहनने के कारण देश में सबसे ज्यादा 7,744 मौतें अकेले तमिलनाडु में हुईं। इसके बाद क्रमशः महाराष्ट्र (5,946 मौतें) दूसरे और मध्य प्रदेश (5,543 मौतें) तीसरे स्थान पर रहा।

सीटबेल्ट की अनदेखी से उत्तर प्रदेश में गई सबसे ज्यादा जानें, WHO ने सुरक्षा के प्रति चेताया

कार हादसों पर नजर डालें तो साल 2024 में चार पहिया वाहनों में सवार 21,988 लोगों की दर्दनाक मौत हुई। इनमें से लगभग आधी (50%) मौतों को सिर्फ सीटबेल्ट के प्रयोग से आसानी से टाला जा सकता था। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की रिसर्च भी इस बात की पुष्टि करती है कि कार एक्सीडेंट के वक्त सीटबेल्ट ड्राइवर या सह-यात्री की मौत के जोखिम को 50% तक कम करने में पूरी तरह असरदार है। सीटबेल्ट न लगाने के कारण मौतों की इस देशव्यापी सूची में उत्तर प्रदेश (UP) सबसे टॉप पर रहा, जहां रिकॉर्ड 2,816 लोगों ने अपनी जान गंवाई। इस मामले में मध्य प्रदेश 1,929 मौतों के साथ दूसरे नंबर पर और महाराष्ट्र 1,427 मौतों के साथ तीसरे स्थान पर दर्ज किया गया।

खराब सड़कें और सरकारी निर्माण साइट्स भी बनीं जानलेवा, गड्ढों के कारण मौतों में 10.4% का भारी इजाफा

रिपोर्ट में जहां एक तरफ वाहन चालकों के खराब व्यवहार (जैसे ओवरस्पीडिंग और रॉन्ग साइड ड्राइविंग) को जिम्मेदार ठहराया गया है, वहीं सड़क निर्माण और देखरेख करने वाली सरकारी एजेंसियों (NHAI, PWD) की बढ़ती हुई घोर लापरवाही को भी बेनकाब किया गया है। सरकारी डेटा के मुताबिक, साल 2024 में सड़कों पर बने जानलेवा गड्ढों (Potholes) के कारण होने वाली मौतें तेजी से बढ़कर 2,384 तक पहुंच गईं, जो पिछले वर्ष 2023 की तुलना में 10.4% अधिक हैं। इसके अतिरिक्त, नेशनल हाईवे और एक्सप्रेसवे पर आधी-अधूरी निर्माणाधीन साइटों (Construction Sites) पर सुरक्षा मानकों की अनदेखी के चलते 5,389 लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी, जो पिछले साल की तुलना में 19.4% की भारी बढ़ोतरी को दर्शाता है। कुल मिलाकर, भारतीय सड़कों पर मरने वाले लोगों में 67% हिस्सा सिर्फ दोपहिया चालकों और पैदल चलने वालों का रहा, जिनकी कुल संख्या 1.28 लाख आंकी गई है।

टक्कर रोधी रोबोटिक तकनीक के लिए दूरसंचार विभाग का ऐतिहासिक फैसला, V2X कम्युनिकेशन स्पेक्ट्रम को किया लाइसेंस-मुक्त

देश में बढ़ते इस खौफनाक रोड एक्सीडेंट के ग्राफ को स्थायी रूप से नीचे लाने के लिए केंद्र सरकार ने टेक्नोलॉजी के मोर्चे पर एक युगांतरकारी और बड़ा फैसला लिया है। भारत सरकार ने गाड़ियों के बीच होने वाली सीधी टक्कर को रोकने के लिए ऑटोमोटिव रडार और अत्याधुनिक ‘व्हीकल-टू-एवरीथिंग’ (V2X) कम्युनिकेशन में उपयोग होने वाले महत्वपूर्ण रेडियो स्पेक्ट्रम को पूरी तरह से ‘लाइसेंस-मुक्त’ (Delicensed) घोषित कर दिया है। दूरसंचार विभाग (DoT) द्वारा जारी की गई आधिकारिक अधिसूचना के अनुसार:

  • 77-81 GHz बैंड: इस फ्रीक्वेंसी को ऑटोमोटिव रडार सिस्टम के लिए फ्री किया गया है, जो वाहनों के पास आने पर ऑटोमैटिक ब्रेक लगाने और दूरी बनाए रखने में मदद करेगा।

  • 5.9 GHz बैंड: इसे उन्नत V2X कम्युनिकेशन के लिए मुक्त किया गया है।

V2X एक ऐसी रोबोटिक और एआई-बेस्ड कनेक्टिविटी तकनीक है, जिससे सड़क पर दौड़ती गाड़ियां न केवल आपस में वाई-फाई की तरह डिजिटल डेटा साझा करेंगी, बल्कि सड़क के किनारे लगे स्मार्ट ट्रैफिक सिग्नलों और पोल से भी कनेक्ट रहेंगी। इससे कोहरे या अंधेरे में भी गाड़ी को सामने से आने वाले खतरे का पहले ही पता चल जाएगा और एक्सीडेंट होने की संभावना शून्य हो जाएगी।