
मासिक धर्म यानी पीरियड्स के दौरान पेट और कमर में क्रैम्प्स आना एक बेहद आम प्रक्रिया है। हालांकि, हर महिला के लिए यह अनुभव एक जैसा नहीं होता। कुछ महिलाओं को इस दौरान सिर्फ हल्का-फुल्का दर्द महसूस होता है, जबकि कुछ के लिए यह तीन से चार दिन किसी बुरे सपने की तरह होते हैं। इस असहनीय दर्द से छुटकारा पाने के लिए ज्यादातर महिलाएं दादी-नानी के नुस्खे या घरेलू उपायों का सहारा लेती हैं, तो कुछ तुरंत पेनकिलर दवाएं खा लेती हैं। ऐसे में हर महिला के मन में यह सवाल जरूर उठता है कि क्या पीरियड पेन में घरेलू उपायों पर भरोसा करना पूरी तरह सुरक्षित और फायदेमंद है? इस गंभीर विषय पर एस्टर व्हाइटफील्ड हॉस्पिटल की प्रसूति एवं स्त्री रोग विशेषज्ञ (गायनेकोलॉजिस्ट) डॉक्टर दीप्ती अश्विन ने बेहद जरूरी जानकारियां साझा की हैं।
डॉक्टर दीप्ती अश्विन के मुताबिक, पीरियड्स के दौरान होने वाले हल्के से मध्यम स्तर के दर्द को शांत करने में घरेलू उपाय वाकई काफी मददगार और असरदार साबित होते हैं। मेडिकल भाषा में इसे ‘प्राइमरी डिसमेनोरिया’ कहा जाता है, जिसका सीधा मतलब है कि यह दर्द सिर्फ पीरियड्स की वजह से हो रहा है, न कि शरीर के भीतर छिपी किसी अन्य बीमारी के कारण। ऐसे सामान्य दर्द को कम करने के लिए महिलाएं पेट के निचले हिस्से पर हीटिंग पैड या गर्म पानी की थैली से सिकाई कर सकती हैं। इसके साथ ही शरीर में पानी की कमी न होने दें, भरपूर नींद लें और शरीर को बहुत ज्यादा थका देने वाले कामों से बचाकर रखें।
गर्म सिकाई और अदरक की चाय का वैज्ञानिक सच
विभिन्न चिकित्सा शोधों में भी यह बात साबित हो चुकी है कि गर्म सिकाई पीरियड्स के दर्द को कम करने का एक बेहतरीन वैज्ञानिक तरीका है। जब आप पेट के निचले हिस्से की सिकाई करती हैं, तो इससे गर्भाशय (यूट्रस) की सिकुड़ी हुई मांसपेशियों को आराम मिलता है और ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है। डॉक्टर दीप्ती बताती हैं कि कुछ स्टडीज में अदरक को भी पीरियड पेन के लिए रामबाण माना गया है। पीरियड्स के दिनों में थोड़ा सा अदरक चबाना या गुनगुने पानी में अदरक उबालकर पीना काफी राहत देता है, क्योंकि अदरक में प्राकृतिक रूप से सूजन और दर्द को कम करने वाले गुण पाए जाते हैं।
लेकिन इसके साथ ही डॉक्टर यह भी आगाह करती हैं कि घरेलू उपायों की अपनी एक तय सीमा होती है। अगर आपका दर्द असहनीय है, समय के साथ कम होने के बजाय लगातार बढ़ता जा रहा है, ब्लीडिंग बहुत ज्यादा (हैवी फ्लो) हो रही है, या फिर इस दर्द की वजह से आप अपने रोजमर्रा के सामान्य काम भी नहीं कर पा रही हैं, तो तुरंत अलर्ट हो जाएं। अगर शादीशुदा महिलाओं को गर्भधारण करने में परेशानी हो रही है और साथ में पीरियड पेन भी बहुत तेज रहता है, तो यह एंडोमेट्रियोसिस, फाइब्रॉइड (बच्चादानी में गांठ) या पेल्विक इन्फ्लेमेटरी डिजीज (PID) जैसी गंभीर अंदरूनी बीमारियों के शुरुआती लक्षण हो सकते हैं।
इन आसान घरेलू उपायों से पा सकती हैं राहत
यदि दर्द सामान्य है, तो आप डॉक्टर द्वारा बताए गए इन बेहद सुरक्षित और आसान उपायों को अपने घर पर आजमा सकती हैं।
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पेट के निचले हिस्से और कमर पर हीटिंग पैड या हॉट वॉटर बैग का इस्तेमाल करें।
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दिनभर गुनगुना पानी पीती रहें और खुद को पूरी तरह हाइड्रेट रखें।
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इन दिनों में जंक फूड से दूरी बनाएं और हरी सब्जियों व पोषण से भरपूर संतुलित आहार लें।
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बिल्कुल सुस्त होकर बैठने के बजाय हल्की शारीरिक गतिविधियां जैसे थोड़ा टहलना या बॉडी स्ट्रेचिंग करें।
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दर्द को कम करने के लिए अदरक के टुकड़े या अदरक वाले गुनगुने पानी का सेवन करें।
लाइफस्टाइल में ये बदलाव हमेशा के लिए दूर कर देंगे क्रैम्प्स
जिन महिलाओं को हर महीने पीरियड्स के दौरान तेज दर्द का सामना करना पड़ता है, उन्हें केवल दर्द के वक्त उपाय ढूंढने के बजाय अपनी लाइफस्टाइल में कुछ बुनियादी बदलाव करने चाहिए। यह बदलाव भविष्य में होने वाले दर्द को जड़ से कम करने में मदद करते हैं।
सबसे पहली और जरूरी बात यह है कि महीने के पूरे तीस दिन नियमित रूप से हल्की एक्सरसाइज या योग करने की आदत डालें। जब आप शारीरिक रूप से एक्टिव रहती हैं, तो शरीर में ब्लड का फ्लो बेहतर होता है और दिमाग से ‘एंडोर्फिन’ नाम का एक प्राकृतिक केमिकल रिलीज होता है, जिसे बॉडी का नेचुरल पेनकिलर भी कहा जाता है। इसके अलावा अपने वजन को हमेशा कंट्रोल में रखें, क्योंकि बढ़ा हुआ वजन पीरियड्स की समस्याओं को और गंभीर बना देता है। तनाव से बचने के लिए मेडिटेशन और योग का सहारा लें। डॉक्टर दीप्ती अश्विन का साफ कहना है कि अगर इन तमाम बदलावों के बाद भी आराम न मिले, या दर्द की वजह से आपका स्कूल, कॉलेज या ऑफिस छूटना शुरू हो जाए, तो इसे सामान्य समझने की भूल बिल्कुल न करें और तुरंत किसी अच्छी स्त्री रोग विशेषज्ञ से अपनी जांच करवाएं।
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