साइलेंट किलर बन सकती है ब्लड प्रेशर की गड़बड़ी! जानिए हाई और लो बीपी में क्या है असली अंतर

आज की भागदौड़ भरी जिंदगी, खराब जीवनशैली और अत्यधिक मानसिक तनाव के कारण ब्लड प्रेशर यानी रक्तचाप की समस्या बेहद आम हो चुकी है। घर-घर में लोग या तो हाई ब्लड प्रेशर (High BP) से परेशान हैं या फिर लो ब्लड प्रेशर (Low BP) की समस्या से जूझ रहे हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इन दोनों ही स्थितियों में हमारे शरीर के भीतर क्या बदलाव होते हैं और कौन सी स्थिति ज्यादा खतरनाक साबित हो सकती है? अक्सर लोग दोनों के लक्षणों और पहचान को लेकर भ्रमित रहते हैं, जिसके चलते सही समय पर सही इलाज या देखभाल नहीं मिल पाती। चिकित्सा विज्ञान में इन दोनों ही स्थितियों को शरीर के लिए बेहद संवेदनशील माना गया है। आइए एक खोजी रिपोर्टर की नजर से विस्तार से समझते हैं कि हाई और लो बीपी में क्या बुनियादी अंतर है, आप इनकी पहचान कैसे कर सकते हैं और इनसे बचने के लिए देखभाल के कौन से तरीके सबसे ज्यादा कारगर हैं।

जानिए क्या होता है हाई और लो ब्लड प्रेशर और इनके बीच का असली अंतर

एक स्वस्थ और सामान्य इंसान का ब्लड प्रेशर 120/80 mmHg माना जाता है, जिसमें ऊपर वाले नंबर को सिस्टोलिक और नीचे वाले नंबर को डायस्टोलिक प्रेशर कहते हैं। जब यह ग्राफ लगातार बढ़कर 140/90 mmHg या उससे ऊपर चला जाता है, तो इस स्थिति को हाई ब्लड प्रेशर या मेडिकल भाषा में हाइपरटेंशन (Hypertension) कहा जाता है। इसमें दिल को शरीर के अंगों तक खून पहुंचाने के लिए सामान्य से बहुत ज्यादा ताकत लगानी पड़ती है। इसके विपरीत, जब ब्लड प्रेशर का स्तर सामान्य से काफी गिरकर 90/60 mmHg या उससे नीचे आ जाता है, तो इसे लो ब्लड प्रेशर या हाइपोटेंशन (Hypotension) कहते हैं। इस स्थिति में शरीर के महत्वपूर्ण अंगों जैसे मस्तिष्क और दिल तक पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन और खून की सप्लाई नहीं हो पाती है।

लक्षणों से करें सटीक पहचान, दोनों स्थितियों में शरीर देता है ये अलग-अलग संकेत

हाई और लो बीपी की पहचान उनके द्वारा शरीर में दिखने वाले लक्षणों के आधार पर आसानी से की जा सकती है। हाई ब्लड प्रेशर को ‘साइलेंट किलर’ भी कहा जाता है क्योंकि कई बार इसके लक्षण शुरुआत में दिखाई नहीं देते, लेकिन जब यह गंभीर होता है तो मरीज को तेज सिरदर्द, छाती में भारीपन या दर्द, सांस लेने में तकलीफ, चक्कर आना, धुंधला दिखाई देना और कभी-कभी नाक से खून आने की समस्या होने लगती है। वहीं दूसरी ओर, लो ब्लड प्रेशर होने पर मरीज को अचानक से बहुत ज्यादा कमजोरी और थकान महसूस होने लगती है। चक्कर खाकर गिर जाना या आंखों के सामने अंधेरा छा जाना लो बीपी का सबसे प्रमुख लक्षण है। इसके अलावा त्वचा का ठंडा और पीला पड़ना, बार-बार प्यास लगना, उथली सांसें चलना और किसी काम में मन न लगना इसके शुरुआती संकेत हैं।

हाई ब्लड प्रेशर के मरीजों के लिए बेहद जरूरी हैं देखभाल के ये तरीके

अगर किसी व्यक्ति को हाई बीपी की समस्या है, तो उसे अपनी जीवनशैली में तुरंत बड़े बदलाव करने की जरूरत होती है। हाई बीपी को कंट्रोल करने का सबसे पहला और मुख्य नियम है भोजन में नमक (सोडियम) की मात्रा को तुरंत कम करना। डिब्बाबंद जूस, अचार, पापड़ और अत्यधिक तैलीय या जंक फूड से पूरी तरह दूरी बना लेनी चाहिए। अपने आहार में हरी पत्तेदार सब्जियां, ताजे फल, साबुत अनाज और पोटैशियम से भरपूर चीजें जैसे केला और नारियल पानी शामिल करें। रोजाना कम से कम 30 से 45 मिनट का वॉक, योग या प्राणायाम करने से तनाव का स्तर कम होता है और ब्लड प्रेशर प्राकृतिक रूप से नियंत्रित रहने लगता है। इसके साथ ही डॉक्टर की सलाह के बिना अचानक से बीपी की दवा बंद करने की भूल कभी न करें।

लो बीपी का अचानक हो हमला तो तुरंत अपनाएं देखभाल के ये आसान घरेलू उपाय

लो ब्लड प्रेशर की स्थिति में मरीज को तुरंत राहत पहुंचाना बेहद जरूरी होता है ताकि वह बेहोश न हो। जैसे ही लो बीपी के लक्षण दिखें, मरीज को तुरंत एक गिलास पानी में आधा चम्मच नमक और चीनी मिलाकर शिकंजी या ओआरएस (ORS) का घोल पिलाएं, क्योंकि सोडियम ब्लड प्रेशर को तुरंत बढ़ाने में मदद करता है। लो बीपी के मरीजों को दिनभर में पर्याप्त मात्रा में पानी और तरल पदार्थ जैसे छाछ, लस्सी या नींबू पानी पीते रहना चाहिए ताकि शरीर में डिहाइड्रेशन न हो। अचानक से बिस्तर या कुर्सी से उठने के बजाय धीरे-धीरे उठें। इसके अलावा, रात में 7-8 बादाम भिगोकर सुबह उनका पेस्ट दूध के साथ लेने से भी लो बीपी की समस्या में हमेशा के लिए आराम मिलता है। अगर स्थिति ज्यादा गंभीर हो, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना ही सबसे सुरक्षित कदम है।