
विश्व क्रिकेट के गलियारों और भारतीय खेल प्रेमियों के लिए एक बेहद हैरान कर देने वाली और गर्व से भर देने वाली खबर सामने आ रही है। भारतीय क्रिकेट की धरती ने हमेशा से ही एक से बढ़कर एक नायाब हीरे पैदा किए हैं, जिन्होंने न सिर्फ देश के भीतर बल्कि सात समंदर पार जाकर भी अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है। इस वक्त एक ऐसा ही नाम क्रिकेट जगत में सबसे बड़ा ट्रेंडिंग टॉपिक बना हुआ है और वह नाम है ‘निखिल चौधरी’ (Nikhil Chaudhary) का। कभी घरेलू क्रिकेट में स्टार बल्लेबाज शुभमन गिल के साथ ड्रेसिंग रूम साझा करने वाले और मैदान पर बिल्कुल ‘गब्बर’ यानी शिखर धवन के अनोखे अंदाज में थाई-फाइव (Thigh-Five) सेलिब्रेशन करने वाले निखिल चौधरी इस समय ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट सर्किट में तहलका मचा रहे हैं। सबसे बड़ी और ऐतिहासिक बात यह है कि निखिल चौधरी पिछले 60 सालों के लंबे इतिहास में ऑस्ट्रेलिया की अंतरराष्ट्रीय मुख्य टीम से खेलने वाले पहले भारतीय मूल के खिलाड़ी बनने की दहलीज पर खड़े हैं। आइए एक स्पोर्ट्स रिपोर्टर की नजर से करीब से जानते हैं कि कौन हैं निखिल चौधरी और उनका भारत से ऑस्ट्रेलिया की नेशनल टीम तक पहुंचने का सफर कितना संघर्षपूर्ण रहा है।
पंजाब क्रिकेट से शुरू हुआ था सफर, शुभमन गिल और अनमोलप्रीत के साथ खेला है घरेलू मैच
मूल रूप से भारत के पंजाब प्रांत से ताल्लुक रखने वाले निखिल चौधरी एक बेहतरीन ऑलराउंडर हैं, जो आक्रामक बल्लेबाजी के साथ-साथ शानदार स्पिन गेंदबाजी करने में भी माहिर हैं। ऑस्ट्रेलिया जाने से पहले निखिल ने पंजाब की तरफ से टी-20 और लिस्ट-ए क्रिकेट में अपना दमखम दिखाया था। पंजाब की घरेलू टीम में खेलते हुए वे वर्तमान भारतीय स्टार शुभमन गिल और अनमोलप्रीत सिंह जैसे दिग्गज खिलाड़ियों के बेहद करीबी टीममेट और पार्टनर रह चुके हैं। उस दौरान भी उनकी आक्रामक बल्लेबाजी की काफी चर्चा होती थी, लेकिन भारतीय क्रिकेट के घरेलू कड़े कॉम्पिटिशन और सही समय पर बड़े मौके न मिल पाने के कारण उन्होंने अपने करियर को एक नया मोड़ देने का साहसिक फैसला किया और वे साल 2020 में उच्च शिक्षा और क्रिकेट के बेहतर भविष्य के लिए ऑस्ट्रेलिया चले गए।
ऑस्ट्रेलिया में कड़ा संघर्ष, कूरियर बॉय की नौकरी करते हुए क्लब क्रिकेट में मचाया तहलका
सात समंदर पार ऑस्ट्रेलिया पहुंचने के बाद निखिल चौधरी का सफर बिल्कुल भी आसान नहीं था। एक अजनबी देश में अपनी पहचान बनाने के लिए उन्हें शुरुआती दिनों में काफी कड़े दौर से गुजरना पड़ा। अपने खर्चों को पूरा करने और क्रिकेट किट खरीदने के लिए निखिल ने लंबे समय तक सिडनी और ब्रिस्बेन की सड़कों पर एक साधारण कूरियर बॉय (Courier Boy) की नौकरी भी की। लेकिन इस तंगहाली के बीच भी उन्होंने अपने भीतर के क्रिकेटर को कभी मरने नहीं दिया। काम से वक्त मिलते ही वे स्थानीय क्लबों के लिए क्रिकेट खेलने उतर जाते थे। ऑस्ट्रेलिया के क्लब क्रिकेट में उनके बल्ले से निकले गगनचुंबी छक्कों और शानदार ऑलराउंड प्रदर्शन ने जल्द ही बड़े-बड़े ऑस्ट्रेलियाई कोचों और सिलेक्टर्स का ध्यान अपनी ओर खींच लिया।
बिग बैश लीग (BBL) में होबार्ट हेरीकेन्स के लिए जलवा दिखाकर आए सुर्खियों में
निखिल चौधरी की किस्मत का पासा तब पूरी तरह पलट गया जब उन्हें ऑस्ट्रेलिया की सबसे बड़ी और मशहूर टी-20 लीग यानी बिग बैश लीग (Big Bash League) में होबार्ट हेरीकेन्स (Hobart Hurricanes) की टीम ने अपने साथ जोड़ा। इस बड़े मंच पर आते ही निखिल ने अपनी विस्फोटक बल्लेबाजी का ऐसा मुजाहिरा पेश किया कि ऑस्ट्रेलियाई फैंस उनके दीवाने हो गए। मैदान पर जब भी वे कोई बड़ा विकेट लेते या बाउंड्री पर कैच पकड़ते, तो वे भारतीय दिग्गज शिखर धवन की तरह अपनी जांघ पर हाथ मारकर (Thigh-Five) अनोखे अंदाज में जश्न मनाते हैं, जिसे ऑस्ट्रेलियाई मीडिया ने खूब पसंद किया। बीबीएल में हैरिस राउफ जैसे दुनिया के सबसे तेज गेंदबाजों के खिलाफ मैदान के चारों तरफ लगाए उनके शॉट्स ने यह साबित कर दिया कि उनमें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेलने का पूरा माद्दा मौजूद है।
60 साल का टूटेगा सूखा, बनने जा रहे हैं ऑस्ट्रेलिया की राष्ट्रीय टीम के सबसे बड़े दावेदार
क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया (CA) के नियमों और उनके लगातार बेहतरीन प्रदर्शन को देखते हुए अब यह कयास बेहद तेज हो गए हैं कि निखिल चौधरी को बहुत जल्द ऑस्ट्रेलिया की इंटरनेशनल टीम में शामिल किया जा सकता है। अगर ऐसा होता है, तो वे पिछले छह दशकों (60 साल) में ऑस्ट्रेलिया की तरफ से खेलने वाले पहले भारतीय मूल के पुरुष क्रिकेटर बनकर एक नया इतिहास रच देंगे। उनसे पहले साल 1960 के दशक में रेक्स सेलर्स ने ऑस्ट्रेलिया के लिए टेस्ट मैच खेला था, जो भारतीय मूल के थे। निखिल की इस जादुई कामयाबी और संघर्ष की कहानी ने आज भारत और ऑस्ट्रेलिया दोनों ही देशों के युवा क्रिकेटरों को प्रेरित किया है कि मेहनत और लगन के दम पर दुनिया के किसी भी कोने में अपना परचम लहराया जा सकता है।
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