
भारतीय सेना में ऑफिसर बनकर देश की सेवा करने का जज्बा रखने वाले लाखों युवाओं और उनके माता-पिता के लिए सैनिक स्कूल (Sainik School) और राष्ट्रीय भारतीय सैन्य कॉलेज (RIMC) हमेशा से पहली पसंद रहे हैं। इन प्रतिष्ठित संस्थानों को भारतीय सशस्त्र बलों की नर्सरी कहा जाता है, जहां से निकले कैडेट्स आगे चलकर देश के गौरवशाली सैन्य अफसर बनते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इन स्कूलों की आलीशान और अनुशासित दिखने वाली लाइफ के पीछे कितनी कड़ी मेहनत और तपस्या छिपी होती है? सैनिक स्कूल और RIMC में दाखिला पाना जितना मुश्किल है, वहां के सख्त नियमों और कड़े अनुशासन के सांचे में खुद को ढालना उससे भी कहीं ज्यादा चुनौतीपूर्ण है। यहां पढ़ने वाले बच्चों का पूरा दिन एक कड़े टाइम टेबल के तहत बीतता है, जिसकी शुरुआत सुबह के घने अंधेरे में ही हो जाती है।
सुबह 5 बजे की परेड और पीटी से होती है दिन की शुरुआत
सैनिक स्कूल और RIMC में पढ़ने वाले कैडेट्स के दिन की शुरुआत सुबह ठीक 5:00 बजे (कुछ मौसमों में 5:30 बजे) के सायरन या बिगुल की आवाज के साथ होती है। आंख खुलते ही बच्चों को बिना एक मिनट गंवाए अपनी बेड मेकिंग यानी बिस्तर को सलीके से तय करना होता है। इसके तुरंत बाद सभी कैडेट्स को पीटी (Physical Training) या परेड ग्राउंड में रिपोर्ट करना अनिवार्य होता है। चाहे कड़कड़ाती ठंड हो या फिर चिलचिलाती गर्मी, सुबह की दौड़, पीटी, योगा और सैन्य ड्रिल से किसी भी छात्र को कोई छूट नहीं मिलती। यह सख्त सुबह का रूटीन बच्चों को शारीरिक रूप से बेहद मजबूत और मानसिक रूप से हर चुनौती का सामना करने के लिए तैयार करता है।
सख्त अनुशासन और जीरो टॉलरेंस पॉलिसी है यहां की पहचान
इन सैन्य शिक्षण संस्थानों की सबसे बड़ी खासियत यहां का कड़ा अनुशासन है। यहां रहने वाले छात्रों के लिए यूनिफॉर्म कोड, हेयरकट और बातचीत के तौर-तरीकों को लेकर बेहद सख्त नियम बनाए गए हैं। कैडेट्स के बाल हमेशा सैन्य कटिंग (Military Haircut) में होने चाहिए और उनकी वर्दी पूरी तरह से साफ और जूते शीशे की तरह चमकते होने चाहिए। क्लासरूम से लेकर डाइनिंग हॉल (Mess) तक, हर जगह शिष्टाचार का पालन करना जरूरी होता है। अनुशासनहीनता, लड़ाई-झगड़े या नियमों के उल्लंघन पर यहां ‘जीरो टॉलरेंस पॉलिसी’ अपनाई जाती है। छोटी सी गलती पर भी सीनियर कैडेट्स या अधिकारियों द्वारा सख्त सजा या फिर स्कूल से सीधे निष्कासन (Expulsion) तक की कार्रवाई हो सकती है।
पढ़ाई के साथ-साथ स्पोर्ट्स और हॉबीज का बेहतरीन तालमेल
परेड और नाश्ते के बाद कैडेट्स का औपचारिक शैक्षणिक सत्र यानी स्कूल की क्लासेस शुरू होती हैं, जहां सीबीएसई (CBSE) या आरआईएमसी के विशेष पाठ्यक्रम के तहत उच्च स्तरीय शिक्षा दी जाती है। दोपहर के भोजन और थोड़े से आराम के बाद का समय खेलकूद के लिए रिजर्व होता है। सैनिक स्कूल और RIMC में हर छात्र के लिए किसी न किसी आउटडोर गेम जैसे फुटबॉल, हॉकी, बास्केटबॉल, घुड़सवारी या तैराकी में भाग लेना अनिवार्य होता है। शाम को अनिवार्य रूप से सेल्फ-स्टडी (Prep Time) का वक्त होता है, जहां बच्चे अपनी पढ़ाई पूरी करते हैं। इसके बाद रात को सही समय पर ‘लाइट्स ऑफ’ (Lights Off) का नियम लागू होता है, जिसके बाद सभी को सोना पड़ता है। यही संतुलित रूटीन लड़कों और लड़कियों को एक जिम्मेदार नागरिक और निडर योद्धा बनाता है।
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