
दुनिया इस वक्त तीसरे विश्व युद्ध की दहलीज पर खड़ी थी और हर तरफ तबाही का मंजर दिखने की आशंका गहरा गई थी। लेकिन इसी बीच वैश्विक राजनीति से अब तक की सबसे बड़ी और राहत भरी खबर सामने आई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ तय किए चुके अपने भीषण सैन्य हमलों और बमबारी के आदेश को अचानक पूरी तरह रद्द कर दिया है। भयंकर तनाव के बीच ट्रंप ने पूरी दुनिया को चौंकाते हुए एक व्यापक और ऐतिहासिक क्षेत्रीय शांति समझौते की मजबूत संभावना जताई है। उन्होंने साफ किया है कि इस महा-समझौते पर अंतिम मुहर लगाने और हस्ताक्षर करने का समय व स्थान बहुत जल्द घोषित कर दिया जाएगा। डोनाल्ड ट्रंप के इस अप्रत्याशित कदम ने पूरी दुनिया के बाजारों और वैश्विक नेताओं को अचंभे में डाल दिया है।
ट्रूथ सोशल पर ट्रंप का विस्तृत पोस्ट: ईरान से लेकर सऊदी और इजरायल तक सब समझौते को तैयार
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रूथ सोशल’ पर एक बेहद विस्तृत और सनसनीखेज पोस्ट साझा करते हुए इस पूरे घटनाक्रम की इनसाइड स्टोरी बताई। ट्रंप ने लिखा कि ईरान के साथ पिछले कई दिनों से चल रही पर्दे के पीछे की गहन चर्चाओं के सभी अंतिम और महत्वपूर्ण बिंदुओं को संयुक्त राज्य अमेरिका, इजरायल, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात (UAE), कतर, तुर्की, पाकिस्तान, बहरीन, कुवैत, जॉर्डन, मिस्र और अन्य सभी संबंधित देशों ने सर्वसम्मति से स्वीकार कर लिया है। उन्होंने आगे बताया कि यह शांति वार्ता ईरानी नेतृत्व के उच्चतम स्तर यानी सीधे सर्वोच्च कमांडर तक पहुंचाई गई थी, जहां से इसे आधिकारिक मंजूरी भी मिल चुकी है। ट्रंप ने लिखा, ‘चूंकि ईरान शांति के लिए तैयार है, इसलिए मैंने अमेरिकी राष्ट्रपति के रूप में आज शाम ईरान के खिलाफ निर्धारित सभी सैन्य हमलों और बमबारी को तुरंत प्रभाव से रद्द करने का फैसला किया है।’ हालांकि, ट्रंप ने यह भी साफ कर दिया कि जब तक इस ऐतिहासिक शांति समझौते पर अंतिम रूप से हस्ताक्षर नहीं हो जाते, तब तक ईरान के खिलाफ लगाई गई अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी (Naval Blockade) पूरी तरह से लागू रहेगी।
कुछ घंटे पहले ही दी थी खार्ग द्वीप तबाह करने की धमकी, तेल और गैस बाजारों पर कब्जे का था प्लान
ट्रंप का यह यू-टर्न इसलिए दुनिया भर के रक्षा विशेषज्ञों को हैरान कर रहा है क्योंकि इस फैसले से महज कुछ घंटे पहले ही ट्रंप ने ईरान को नेस्तनाबूद करने की ‘बहुत कड़ी और शक्तिशाली’ सैन्य कार्रवाई की खुली चेतावनी दी थी। ट्रंप ने खुलेआम कहा था कि अमेरिकी सेना ईरान के सबसे प्रमुख तेल बुनियादी ढांचे वाले ‘खार्ग द्वीप’ (Kharg Island) पर कब्जा करने जा रही है, जिसे वैश्विक स्तर पर एक पूर्ण और विनाशकारी युद्ध की शुरुआत माना जा रहा था। लगातार तीसरी रात ‘बड़े और अधिक शक्तिशाली’ मिसाइल हमलों की धमकी देते हुए ट्रंप ने तेहरान के सामने शर्त रखी थी कि उसे अपने नाममात्र के युद्धविराम को एक स्थायी शांति समझौते में बदलना ही होगा, वरना अमेरिका वेनेजुएला की तर्ज पर ईरान के पूरे तेल और गैस बाजारों पर अपना पूर्ण नियंत्रण स्थापित कर लेगा। लेकिन कुछ ही घंटों में स्थितियां पूरी तरह बदल गईं।
अपाचे हेलीकॉप्टर गिराए जाने और अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइल हमलों से चरम पर पहुंच गया था तनाव
दरअसल, पिछले कुछ दिनों में अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य तनाव अपने इतिहास के सबसे खतरनाक स्तर पर पहुंच गया था। अमेरिका ने हाल ही में ईरान के कई ठिकानों पर ताबड़तोड़ बमबारी की थी, जिसे वाशिंगटन ने खाड़ी क्षेत्र (Gulf Region) में गश्त कर रहे अपने अत्याधुनिक ‘अपाचे हेलीकॉप्टर’ को ईरानी सेना द्वारा मार गिराए जाने का करारा जवाब बताया था। हालांकि, ईरान ने अमेरिका के इस दावे को सिरे से खारिज करते हुए इसे हमले का एक ‘झूठा बहाना’ करार दिया था। इसके बाद जवाबी कार्रवाई करते हुए तेहरान ने बहरीन, जॉर्डन और कुवैत में स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डों पर एक साथ दर्जनों मिसाइलें और घातक आत्मघाती ड्रोन दाग दिए थे, जिससे कई अमेरिकी ठिकाने दहल गए थे।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जलमार्ग को बंद करने की घोषणा के बाद आमने-सामने आ गई थीं दोनों नौसेनाएं
तनाव तब और ज्यादा हिंसक मोड़ पर आ गया जब ईरान ने वैश्विक व्यापार के लिए सबसे महत्वपूर्ण माने जाने वाले ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ (Strait of Hormuz) जलमार्ग की पूरी निगरानी अपने हाथ में लेते हुए एक नए सैन्य निकाय का गठन कर दिया था। इसके साथ ही ईरान ने अगले आदेश तक इस अत्यंत संवेदनशील अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग को पूरी तरह बंद करने की बड़ी घोषणा कर दी थी, जिससे दुनिया भर में कच्चे तेल की सप्लाई ठप होने का खतरा पैदा हो गया था। अमेरिका ने तुरंत ईरान के इस फैसले को चुनौती देते हुए अपनी नौसेना को अलर्ट मोड पर डाल दिया था और कहा था कि होर्मुज जलमार्ग अंतरराष्ट्रीय आवागमन के लिए खुला रहेगा और इसमें पैदा की जाने वाली किसी भी सैन्य बाधा को अमेरिका बर्दाश्त नहीं करेगा। लेकिन अब इस नए शांति समझौते के प्रस्ताव के बाद दोनों देशों की नौसेनाओं के पीछे हटने की उम्मीद जग गई है।
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