
आज के इस भागदौड़ भरे दौर में अक्सर हम छोटी-मोटी बातें या चीजें रखकर भूल जाते हैं। कभी चाबी ढूंढनी पड़ती है तो कभी किसी का नाम याद नहीं आता। अक्सर हम इसे काम का तनाव मानकर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि आपकी यह भूलने की आदत किसी गंभीर बीमारी की दस्तक भी हो सकती है?
भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद-राष्ट्रीय पोषण संस्थान (ICMR-NIN) की एक हालिया रिसर्च में बेहद चिंताजनक बात सामने आई है। इस रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीयों के खानपान में कुछ खास विटामिन्स की कमी उनके मानसिक स्वास्थ्य (ब्रेन हेल्थ) को भारी नुकसान पहुंचा रही है, जिससे भूलने की बीमारी यानी डिमेंशिया (Dementia) का खतरा तेजी से बढ़ रहा है। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि अब लोग कम उम्र में ही इस बीमारी की चपेट में आ रहे हैं।
डिमेंशिया (Dementia) क्या है?
सरल शब्दों में कहें तो डिमेंशिया दिमाग से जुड़ी एक ऐसी स्थिति है जिसमें व्यक्ति की याददाश्त कमजोर होने लगती है। यह कोई एक अकेली बीमारी नहीं है, बल्कि लक्षणों का एक समूह है।
इसके मुख्य लक्षण:
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रोजमर्रा की बातें या चीजें याद रखने में भारी दिक्कत होना।
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सोचने-समझने और सही निर्णय लेने की क्षमता का लगातार कम होना।
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स्वभाव और व्यवहार में अचानक बदलाव आना।
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दिनचर्या के सामान्य कामों को ठीक से न कर पाना।
आमतौर पर डिमेंशिया को बढ़ती उम्र (बुढ़ापे) से जोड़कर देखा जाता है, लेकिन एक्सपर्ट्स का मानना है कि खराब लाइफस्टाइल और खानपान में पोषक तत्वों की कमी के कारण अब युवा भी इसका शिकार हो रहे हैं।
क्या कहती है लैंसेट की यह चौंकाने वाली रिसर्च?
यह महत्वपूर्ण शोध मशहूर मेडिकल जर्नल ‘द लैंसेट रीजनल हेल्थ- साउथ ईस्ट एशिया’ में प्रकाशित हुआ है। इस स्टडी के मुख्य आंकड़ों और निष्कर्षों को आप नीचे दी गई तालिका से समझ सकते हैं:
इस रिसर्च के दौरान वैज्ञानिकों ने लोगों के सोचने की क्षमता (Cognitive Health), उनके खानपान की आदतों और उनके ब्लड सैंपल में विटामिन्स के स्तर की बारीकी से जांच की। जांच में सामने आया कि जिन लोगों में डिमेंशिया का जोखिम सबसे अधिक था, उनके शरीर में कुछ खास विटामिन्स का स्तर बेहद कम पाया गया।
दिमाग के स्वास्थ्य के लिए ‘विलेन’ बन रही हैं ये 4 कमियां
इन विटामिन्स की कमी से कमजोर हो रहा है दिमाग
वैज्ञानिकों के अनुसार, केवल विटामिन बी12 ही नहीं, बल्कि तीन अन्य विटामिन्स भी हमारी ब्रेन हेल्थ के लिए रीढ़ की हड्डी की तरह काम करते हैं। अगर आपके शरीर में इनकी कमी है, तो आपका दिमाग समय से पहले बूढ़ा हो सकता है:
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विटामिन डी (Vitamin D): हड्डियों के साथ-साथ यह मानसिक सतर्कता के लिए बेहद जरूरी है।
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विटामिन बी12 (Vitamin B12): नसों और दिमाग की कोशिकाओं (Neurons) को दुरुस्त रखता है।
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विटामिन बी6 (Vitamin B6): मूड को रेगुलेट करने और याददाश्त को मजबूत बनाने में मदद करता Lights।
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विटामिन बी2 (Vitamin B2): मस्तिष्क की ऊर्जा और मेटाबॉलिज्म के लिए आवश्यक है।
रिसर्च में देखा गया कि जो लोग लगातार असंतुलित खानपान का पालन कर रहे हैं, भोजन में सैचुरेटेड फैट (जंक फूड, ऑयली खाना) ज्यादा ले रहे हैं और हरी चीजों से दूरी बनाए हुए हैं, उनमें यह कमी सबसे ज्यादा देखने को मिली। इसके विपरीत, जो लोग अपनी डाइट में ताजे फल, हरी सब्जियां और माइक्रोन्यूट्रिएंट्स से भरपूर चीजें ले रहे थे, उनमें डिमेंशिया का खतरा काफी कम पाया गया।
क्या सिर्फ खराब खानपान ही एकमात्र कारण है?
वैज्ञानिकों ने स्पष्ट किया है कि डिमेंशिया होने के पीछे केवल विटामिन्स की कमी ही एकमात्र वजह नहीं है, बल्कि इसके कुछ जेनेटिक (अनुवांशिक) कारण भी हो सकते हैं। यानी अगर परिवार में पहले किसी को यह बीमारी रही हो, तो आगे की पीढ़ी में इसका खतरा बढ़ जाता है।
इसके अलावा, हमारी कुछ अन्य आदतें और स्वास्थ्य संबंधी बीमारियां भी इस खतरे को कई गुना बढ़ा देती हैं, जैसे:
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डायबिटीज (मधुमेह) और मोटापा (Obesity)
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हाई ब्लड प्रेशर (उच्च रक्तचाप)
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स्मोकिंग (धूम्रपान) करना
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शारीरिक रूप से एक्टिव न रहना (Physical Inactivity)
साल 2050 तक की डरावनी तस्वीर और बचाव के उपाय
चिकित्सा विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यदि भारतीयों ने अपनी लाइफस्टाइल और खानपान में सुधार नहीं किया, तो साल 2050 तक भारत में डिमेंशिया के मामलों में अप्रत्याशित और बेहद तेज उछाल देखने को मिल सकता है।
इससे बचने के लिए आज से ही अपनी थाली में बदलाव करना शुरू करें। अपनी डाइट में दूध, दही, अंडे, अंकुरित अनाज, हरी पत्तेदार सब्जियां, धूप (विटामिन डी के लिए) और नट्स को शामिल करें। एक संतुलित आहार, नियमित व्यायाम और तनाव मुक्त जीवनशैली अपनाकर आप लंबे समय तक अपने दिमाग को सुपरफास्ट और सेहतमंद बनाए रख सकते हैं।
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