
डिजिटल मनोरंजन और स्टैंड-अप कॉमेडी के नाम पर महिलाओं की अस्मत, सहमति और गरिमा का सरेआम मजाक उड़ाने वाले कलाकारों पर कानून का शिकंजा कसना शुरू हो गया है। गुरुग्राम में आयोजित एक स्टैंड-अप कॉमेडी शो के दौरान महिलाओं के प्रति कथित तौर पर बेहद आपत्तिजनक, अश्लील और यौन उत्पीड़न को बढ़ावा देने वाली टिप्पणियां करने के मामले में राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) ने बेहद कड़ा रुख अपनाया है। आयोग ने इस पूरे मामले पर स्वत: संज्ञान (Suo Motu) लेते हुए विवादित ‘370 की बिरयानी’ मामले में हरियाणा के डीजीपी को तत्काल और सख्त कानूनी कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही आयोग ने विवादों के घेरे में आए मुख्य स्टैंड-अप कॉमेडियन प्रणित मोरे और महिलाओं पर भद्दे कमेंट्स करने वाले हिमांशु जांगड़ा को समन जारी कर सीधे दिल्ली मुख्यालय में तलब कर लिया है। देश की राजधानी से लेकर मुंबई तक इस समय इन दोनों कलाकारों को भारी जन-आक्रोश और कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ रहा है। खोजी पत्रकार संजय कुमार साह और साकेत राय की इस विशेष ग्राउंड रिपोर्ट में जानिए कि कैसे कॉमेडी के नाम पर अश्लीलता परोसना इन कलाकारों को भारी पड़ गया।
मनोरंजन के नाम पर लैंगिक हिंसा बर्दाश्त नहीं, महिला आयोग की अध्यक्ष ने हरियाणा DGP को लिखा कड़ा पत्र
गुरुग्राम के इस विवादित शो का वीडियो सोशल मीडिया पर आग की तरह वायरल होने के बाद राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष ने इसे समाज के लिए बेहद घातक बताया है। आयोग ने अपने आधिकारिक बयान में स्पष्ट किया है कि किसी भी महिला की सहमति, मर्यादा, शारीरिक स्वायत्तता और सम्मान को ठेस पहुंचाने वाले व्यवहार या भाषा को मनोरंजन या कॉमेडी का रूप देकर समाज में नहीं परोसा जा सकता। इस तरह का कंटेंट न केवल महिलाओं की सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा है, बल्कि यह समाज में लैंगिक हिंसा (Gender Violence) के प्रति लोगों की सोच को भी दूषित करता है। आयोग ने हरियाणा के पुलिस महानिदेशक (DGP) को पत्र भेजकर मामले में बिना किसी देरी के सख्त और समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा है। इसके साथ ही पुलिस प्रशासन से अगले सात दिनों के भीतर विस्तृत ‘कार्रवाई रिपोर्ट’ (ATR) भी तलब की गई है, जिसमें पूछा गया है कि वायरल वीडियो की सत्यता जांचने और दोषियों पर केस दर्ज करने की वर्तमान स्थिति क्या है।
22 जून को शाम 4 बजे आयोग के सामने होना होगा पेश, डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर अश्लीलता रोकने के लिए पुलिस को निर्देश
राष्ट्रीय महिला आयोग ने मामले की गंभीरता और समाज पर पड़ने वाले इसके दुष्प्रभावों को देखते हुए दोनों आरोपी कलाकारों, प्रणित मोरे और हिमांशु जांगड़ा को आधिकारिक समन जारी कर दिया है। दोनों को आगामी 22 जून 2026 को शाम ठीक 4 बजे दिल्ली में महिला आयोग के समक्ष व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर अपनी टिप्पणियों पर सफाई देनी होगी। आयोग ने राज्य पुलिस को यह भी सख्त हिदायत दी है कि भविष्य में किसी भी सार्वजनिक मनोरंजन मंच, थियेटर या डिजिटल सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का उपयोग महिलाओं के प्रति अपमानजनक बातें फैलाने या उत्पीड़न को बढ़ावा देने वाले कंटेंट का प्रमोशन करने के लिए न होने दिया जाए। आयोग ने कड़े शब्दों में दोहराया कि महिला की सहमति किसी भी परिस्थिति में समझौते का विषय नहीं हो सकती।
महाराष्ट्र साइबर पुलिस का बड़ा हंटर: प्रणित मोरे, हिमांशु और डॉ. सेजल पवार पर BNS और IT एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज
इस मामले में केवल हरियाणा ही नहीं, बल्कि महाराष्ट्र पुलिस ने भी कड़ा एक्शन लिया है। ऑनलाइन सोशल मीडिया इकोसिस्टम और अश्लील कंटेंट पर पैनी नजर रखने वाली महाराष्ट्र राज्य की नोडल एजेंसी ‘महाराष्ट्र साइबर’ ने स्टैंड-अप कॉमेडियन प्रणित मोरे, हिमांशु जांगड़ा, डॉ. सेजल पवार और इस शो से जुड़े अन्य आयोजकों के खिलाफ बड़ी कानूनी कार्रवाई की है। मुंबई के नोडल साइबर पुलिस स्टेशन में इन सभी के खिलाफ FIR नंबर 36/2026 दर्ज कर ली गई है। पुलिस ने नए कानून ‘भारतीय न्याय संहिता’ (BNS), 2023 की धारा 75(1)(iv), 75(3) (यौन उत्पीड़न से संबंधित), 294 (सार्वजनिक स्थान पर अश्लील कृत्य), 353(2) और सूचना प्रौद्योगिकी (IT) एक्ट, 2000 की धारा 67 (इलेक्ट्रॉनिक रूप में अश्लील सामग्री प्रकाशित करना) के तहत बेहद गंभीर मामला दर्ज किया है, जिसमें जेल की सजा का भी प्रावधान है।
कॉमेडी और विवादों का पुराना चोली-दामन का साथ, समय रैना से लेकर मुनव्वर फारूकी तक आ चुके हैं रडार पर
यह कोई पहली बार नहीं है जब भारत में कोई स्टैंड-अप कॉमेडियन अपने विवादित और आपत्तिजनक कंटेंट के कारण कानूनी पचड़े में फंसा हो। इससे ठीक पहले मशहूर कॉमेडियन समय रैना को भी अपने लोकप्रिय यूट्यूब शो ‘इंडियाज गॉट लेटेंट’ (India’s Got Latent) के एक विशेष एपिसोड में मर्यादा लांघने के कारण भयंकर जन-आक्रोश का सामना करना पड़ा था, जिसके बाद भारी दबाव में उन्हें अपना यह हिट शो हमेशा के लिए बंद करना पड़ा। इसके अलावा मुनव्वर फारूकी, कुणाल कामरा और मशहूर सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर एल्विश यादव भी अतीत में अपने बयानों और अपमानजनक कंटेंट के चलते कानून और सोशल मीडिया पर तीखी आलोचनाओं का सामना कर चुके हैं। इस ताज़ा मामले ने एक बार फिर यह बहस छेड़ दी है कि क्या कॉमेडी के नाम पर किसी को भी अभिव्यक्ति की असीमित और अमर्यादित आजादी दी जा सकती है?
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