लखनऊ/दिल्ली। उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। 2027 के विधानसभा चुनाव में जीत की ‘हैट्रिक’ लगाने के इरादे से भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने संगठन से लेकर सरकार तक में बड़े फेरबदल की पटकथा लिख ली है। दिल्ली में भाजपा के शीर्ष नेतृत्व के साथ यूपी के प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी और संगठन महामंत्री धर्मपाल सिंह की हालिया मुलाकातों ने योगी मंत्रिमंडल के विस्तार और फेरबदल की चर्चाओं को हवा दे दी है।
माना जा रहा है कि इस विस्तार के जरिए भाजपा न केवल क्षेत्रीय और जातीय समीकरणों को साधेगी, बल्कि उन मंत्रियों पर भी गाज गिर सकती है जिनका प्रदर्शन उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा है।
दिल्ली में मंथन: ‘नितिन नवीन’ और ‘बीएल संतोष’ के साथ अहम बैठक
गुरुवार को दिल्ली में हुई बैठकों का दौर यूपी के सियासी भविष्य के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी और धर्मपाल सिंह ने राष्ट्रीय संगठन महामंत्री बी.एल. संतोष और पार्टी के नए राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष नितिन नवीन के साथ लंबी चर्चा की। इस बैठक में यूपी सरकार के मंत्रियों के कामकाज की ‘सियासी कुंडली’ पर मंथन हुआ। सूत्रों की मानें तो शीर्ष नेतृत्व ने मंत्रिमंडल विस्तार के लिए हरी झंडी दे दी है और अब बस सही समय का इंतजार है।
मंत्रिमंडल में 12 चेहरों पर लटकी तलवार, खाली पदों पर होगी ‘लॉटरी’
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की कैबिनेट में वर्तमान में 54 मंत्री हैं, जबकि नियमों के मुताबिक यह संख्या 60 तक हो सकती है। यानी 6 पद फिलहाल पूरी तरह खाली हैं। चर्चा है कि इस विस्तार में:
आधा दर्जन मंत्रियों की छुट्टी: लगभग 6 मौजूदा मंत्रियों को उनके पद से हटाया जा सकता है या उन्हें संगठन में नई जिम्मेदारी दी जा सकती है।
नए चेहरों की एंट्री: खाली पड़े 6 पदों और हटाए जाने वाले मंत्रियों की जगह लगभग एक दर्जन नए चेहरों को मौका मिल सकता है।
योगी की पसंद सर्वोपरि: इस बार के फेरबदल में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की पसंद का विशेष ख्याल रखा जा रहा है, ताकि 2027 के चुनाव से पहले टीम में बेहतर सामंजस्य बना रहे।
जातीय और क्षेत्रीय संतुलन: ब्राह्मणों और ओबीसी पर फोकस
लोकसभा चुनाव 2024 के नतीजों और हाल के सर्वे (SIR) के बाद भाजपा अब कोई जोखिम नहीं लेना चाहती।
ब्राह्मणों की नाराजगी दूर करने की कोशिश: यूपी में ब्राह्मण समुदाय के बीच कथित नाराजगी को देखते हुए संगठन और सरकार में कुछ कद्दावर ब्राह्मण चेहरों को बड़ी जिम्मेदारी दी जा सकती है।
पश्चिम यूपी को तरजीह: चूंकि मुख्यमंत्री और प्रदेश अध्यक्ष दोनों पूर्वी यूपी (पूर्वांचल) से आते हैं, इसलिए कैबिनेट विस्तार में पश्चिमी उत्तर प्रदेश की भागीदारी बढ़ाई जा सकती है।
ओबीसी समीकरण: पंकज चौधरी (कुर्मी समाज) के अध्यक्ष बनने के बाद अब ओबीसी जातियों के बीच पकड़ मजबूत करने के लिए इसी वर्ग से कुछ और मंत्रियों को शपथ दिलाई जा सकती है।
संगठन में भी दिखेगा बदलाव का असर
मंत्रिमंडल विस्तार से पहले पार्टी अपने कद्दावर कार्यकर्ताओं और नेताओं को विभिन्न निगमों, आयोगों और बोर्डों में समायोजित (Adjust) करने की योजना बना रही है। हाल ही में नगर निकायों में मनोनीत सदस्यों की नियुक्ति इसी कवायद का हिस्सा मानी जा रही है। इसका उद्देश्य यह है कि मंत्रिमंडल विस्तार के समय कोई गुटबाजी या नाराजगी पैदा न हो।
भाजपा का स्पष्ट लक्ष्य 2027 में सत्ता की हैट्रिक लगाकर इतिहास रचना है। पिछले एक महीने से लखनऊ से लेकर दिल्ली तक जो ‘मैराथन एक्सरसाइज’ चल रही है, उसका नतीजा जल्द ही एक नई और युवा टीम के रूप में सामने आ सकता है।
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