UP की सियासत में नया मोड़… सीमा राजभर को देखते ही क्यों घबरा जाते हैं राजभर, अखिलेश के करीबी नेता ने खोल दिया अंदर का बड़ा राज

India News Live, Digital Desk : उत्तर प्रदेश की राजनीति में राजभर समाज के वोटों पर एकाधिकार को लेकर समाजवादी पार्टी (सपा) और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के बीच जंग बेहद तेज हो गई है। जब से सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने महिला सभा की कमान तेजतर्रार नेता सीमा राजभर के हाथों में सौंपी है, तब से पूर्वांचल की राजनीतिक फिजा बदली-बदली नजर आ रही है। सियासी गलियारों में सीमा राजभर को सुभासपा प्रमुख और सूबे के कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर (OP Rajbhar) की सबसे मजबूत काट के तौर पर देखा जा रहा है। इसी बीच, समाजवादी पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने बेहद सनसनीखेज दावा करते हुए बताया है कि आखिर क्यों ओपी राजभर अक्सर सीमा राजभर का नाम सुनते ही असहज हो जाते हैं और उनके सामने आने से कतराते हैं।

सत्ता की मलाई में डूबे हैं ओपी राजभर, अपने ही समाज की मौतों पर साधी चुप्पी – फखरुल हसन

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता फखरुल हसन ने उत्तर प्रदेश में हाल ही में राजभर समाज के कुछ लोगों की हुई हत्याओं का मुद्दा उठाते हुए ओम प्रकाश राजभर पर तीखा हमला बोला। सपा प्रवक्ता ने बड़ा दावा करते हुए कहा कि ओम प्रकाश राजभर असल में सीमा राजभर और पंकज राजभर जैसे युवा नेताओं से बुरी तरह डरे हुए हैं। इसका कारण यह है कि समाजवादी पार्टी के ये नेता लगातार जमीन पर जाकर राजभर समाज के हक और उनकी सुरक्षा को लेकर तीखे सवाल पूछ रहे हैं। फखरुल हसन ने तंज कसते हुए कहा कि सुभासपा प्रमुख को सत्ता इतनी प्यारी हो गई है कि वे कैबिनेट मंत्री बनकर सत्ता की मलाई चाटने में व्यस्त हैं, जबकि उनके अपने ही समाज के लोगों के साथ सरेआम नाइंसाफी हो रही है और वे डर के मारे पूरी तरह खामोश बैठे हैं।

बीजेपी के डर से कांपते हैं मंत्री जी, सरकार में रहकर भी कोई नहीं सुनता उनकी बात

सपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता ने कहा कि ओम प्रकाश राजभर को समाजवादी पार्टी से कोई व्यक्तिगत डर नहीं है, बल्कि उन्हें डर उन तीखे सवालों से लगता है जिनका जवाब उनके पास नहीं है। उन्होंने दावा किया कि जब सीमा राजभर और पंकज राजभर पीड़ितों के न्याय के लिए आवाज उठाते हैं, तो ओपी राजभर उनसे मुंह छिपाकर भागते हैं क्योंकि वे भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सामने बोलने की हिम्मत नहीं जुटा पाते। फखरुल हसन के मुताबिक, राजभर जी को सबसे बड़ा डर बीजेपी से लगता है कि कहीं उनकी मंत्री पद की कुर्सी न छिन जाए। उन्होंने आरोप लगाया कि योगी सरकार में मंत्री होने के बावजूद प्रशासनिक स्तर पर ओपी राजभर की कोई सुनवाई नहीं होती है और वे केवल नाम के मंत्री बनकर रह गए हैं, जबकि उनके समाज के युवाओं के साथ लगातार अन्याय किया जा रहा है।

सुभासपा से ही शुरू हुआ था सीमा राजभर का सफर, अब अखिलेश की बनीं सबसे बड़ी ढाल

सियासी समीकरणों को समझने वाले विश्लेषकों का मानना है कि अखिलेश यादव ने सीमा राजभर को आगे करके ओम प्रकाश राजभर के गढ़ में सीधी सेंधमारी कर दी है। मूल रूप से बलिया की रहने वाली सीमा राजभर कोई नया नाम नहीं हैं, बल्कि वे लंबे समय से जमीनी स्तर पर पिछड़ों और वंचितों की राजनीति कर रही हैं। दिलचस्प बात यह है कि सीमा राजभर ने अपनी राजनीतिक पारी की शुरुआत खुद ओम प्रकाश राजभर की पार्टी सुभासपा से ही की थी। लेकिन साल 2022 के विधानसभा चुनाव के बाद उन्होंने सुभासपा प्रमुख पर टिकट बेचने और समाज के हितों की अनदेखी करने जैसे कई गंभीर और सनसनीखेज आरोप लगाते हुए पार्टी से इस्तीफा दे दिया था। अब समाजवादी पार्टी की महिला विंग की कमान संभालकर वे पूर्वांचल में सुभासपा के वोट बैंक को बिखेरने में पूरी ताकत से जुट गई हैं।