जेट, सेट, गो… चीन-पाकिस्तान की उड़ी नींद, 114 नए राफेल खरीदने की तैयारी में भारत, फ्रांस पहुंचे वायुसेना प्रमुख

India News Live, Digital Desk : भारतीय आसमान की सुरक्षा को अभेद्य बनाने और दुश्मनों के दांत खट्टे करने के लिए रक्षा जगत से इस वक्त की सबसे बड़ी और धमाकेदार खबर सामने आ रही है। भारतीय वायुसेना (IAF) अपनी मारक क्षमता को एक नए और घातक स्तर पर ले जाने के लिए पूरी तरह तैयार है। वायुसेना के इतिहास की सबसे बड़ी डिफेंस डील में से एक यानी 114 नए राफेल लड़ाकू विमानों (Rafale Fighter Jets) की खरीद की प्रक्रिया अब सुपरफास्ट ट्रैक पर आ गई है। इस महासौदे को अंतिम रूप देने और तकनीकी बारीकियों पर चर्चा करने के लिए भारतीय वायुसेना के प्रमुख एयर चीफ मार्शल अमर प्रीत सिंह खुद चार दिवसीय अत्यंत महत्वपूर्ण और रणनीतिक यात्रा पर फ्रांस पहुंच चुके हैं। रक्षा मंत्रालय के उच्च पदस्थ सूत्रों के अनुसार, भारत सरकार ने इन अत्याधुनिक लड़ाकू विमानों को खरीदने के लिए फ्रांस को एक औपचारिक प्रस्ताव (Official Proposal) भी भेज दिया है, जिसके बाद रक्षा गलियारों में हलचल तेज हो गई है।

अगले एक साल के भीतर पक्का हो सकता है महासौदा, फ्रांस से मांगा गया विस्तृत ब्यौरा

भारत द्वारा भेजे गए आधिकारिक प्रस्ताव के बाद अब फ्रांस की सरकार और वहां की विमान निर्माता कंपनी डसॉल्ट एविएशन इसकी कुल कीमत, विमानों की सालाना उत्पादन क्षमता और भविष्य में मिलने वाली लॉजिस्टिक्स सहायता से जुड़ी बेहद गोपनीय और विस्तृत जानकारी के साथ भारत को जवाब देगी। रक्षा विशेषज्ञों का अनुमान है कि फ्रांस की ओर से यह तकनीकी और वित्तीय जवाब अगले दो से तीन महीनों के भीतर आ जाएगा। इसके ठीक बाद दोनों परमाणु संपन्न मित्र देशों के बीच उच्च स्तरीय औपचारिक कूटनीतिक बातचीत का दौर शुरू होगा। वायुसेना के वरिष्ठ अधिकारियों का मानना है कि सब कुछ योजना के मुताबिक रहा, तो आगामी एक साल के भीतर यह ऐतिहासिक रक्षा सौदा पूरी तरह से पक्का हो सकता है।

वायुसेना प्रमुख का यह फ्रांस दौरा बेहद खास, अत्याधुनिक मिसाइलों पर भी होगी बात

एयर चीफ मार्शल अमर प्रीत सिंह के इस दौरे को रक्षा विशेषज्ञ महज एक औपचारिक कूटनीतिक यात्रा नहीं मान रहे हैं। चार दिनों के इस व्यस्त दौरे में वायुसेना प्रमुख फ्रांस की सबसे प्रमुख रक्षा कंपनियों के शीर्ष अधिकारियों और वैज्ञानिकों के साथ आमने-सामने की बैठकें करेंगे। इनमें राफेल विमान बनाने वाली दिग्गज कंपनी डसॉल्ट एविएशन (Dassault Aviation) और दुनिया की सबसे घातक ‘मिटिओर’ (Meteor) व ‘स्कैल्प’ (SCALP) जैसी एडवांस्ड मिसाइलें बनाने वाली कंपनी एमबीडीए (MBDA) के अधिकारी शामिल हैं। माना जा रहा है कि यह चर्चा सिर्फ विमानों को खरीदने तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इसमें भारत की भौगोलिक परिस्थितियों के अनुकूल तकनीकी सहयोग और राफेल जेट के भीतर भारत में बने स्वदेशी हथियारों व सेंसरों को इंटीग्रेट (शामिल) करने जैसे अत्यंत महत्वपूर्ण विषयों पर भी गहन रणनीति बनाई जाएगी।

जून के मध्य में पीएम नरेंद्र मोदी भी जा सकते हैं फ्रांस, ‘जी-टू-जी’ मॉडल से बढ़ेगी बात

इन कूटनीतिक गतिविधियों के बीच एक और बड़ी खबर यह आ रही है कि देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी जून 2026 के मध्य में फ्रांस का एक महत्वपूर्ण दौरा कर सकते हैं। अगर पीएम मोदी की यह फ्रांस यात्रा तय समय पर होती है, तो दोनों देशों के राष्ट्राध्यक्षों के बीच होने वाली द्विपक्षीय वार्ता में 114 राफेल विमानों का यह सौदा सबसे प्रमुख एजेंडा रहने वाला है। आपको बता दें कि यह पूरा सौदा पूरी तरह से ‘सरकार-से-सरकार’ (Government-to-Government) यानी सीधे दो देशों की सरकारों के बीच के मॉडल के तहत आगे बढ़ाया जा रहा है। ऐसे में किसी भी बिचौलिए की भूमिका न होने के कारण दोनों देशों के शीर्ष राजनीतिक नेतृत्व की आपसी समझ और भूमिका को इस प्रोजेक्ट के लिए सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

आखिर भारतीय वायुसेना को क्यों है 114 नए मल्टीरोल विमानों की अर्जेंट जरूरत

इस वक्त भारतीय वायुसेना के सामने अपनी स्क्वाड्रन स्ट्रेंथ को बनाए रखने की एक बेहद गंभीर और बड़ी चुनौती है। देश की दोतरफा सीमाओं (चीन और पाकिस्तान) की सुरक्षा को देखते हुए वायुसेना के लिए कुल 42 स्क्वाड्रन की स्वीकृत संख्या निर्धारित की गई है, लेकिन पुराने पड़ चुके मिग-21 (MiG-21) जैसे लड़ाकू विमानों को लगातार सेवा से हटाए जाने (रिटायर करने) के कारण वर्तमान में भारत के पास केवल 29 स्क्वाड्रन ही बची हैं। विमानों की इसी भारी कमी को तेजी से पूरा करने के लिए रक्षा मंत्रालय ने 114 नए मल्टीरोल लड़ाकू विमानों (MRFA) को खरीदने का मेगा प्लान तैयार किया है। इस वैश्विक रेस में फ्रांस का राफेल विमान सबसे मजबूत और पसंदीदा दावेदार माना जा रहा है क्योंकि भारतीय पायलटों को इसे उड़ाने का पहले से ही बेहतरीन अनुभव है।

‘मेक इन इंडिया’ का दिखेगा दम, 114 में से 94 राफेल विमान सीधे भारत में ही बनेंगे

इस प्रस्तावित मेगा डिफेंस डील की सबसे अनूठी और ऐतिहासिक विशेषता इसका निर्माण मॉडल है, जो पूरी तरह से प्रधानमंत्री मोदी के ‘आत्मनिर्भर भारत’ के सपने को साकार करता है। सूत्रों के मुताबिक, कुल 114 लड़ाकू विमानों में से केवल 20 विमान ही सीधे फ्रांस से बनकर भारत आएंगे, जबकि बाकी बचे 94 राफेल जेट विमानों का निर्माण पूरी तरह से ‘मेक इन इंडिया’ (Make in India) पहल के तहत भारतीय धरती पर ही किया जाएगा। इसके लिए फ्रांस की डसॉल्ट एविएशन कंपनी भारत की किसी दिग्गज घरेलू रक्षा कंपनी के साथ एक बड़ा संयुक्त उद्यम (Joint Venture) या साझेदारी करेगी। भारतीय रक्षा मंत्रालय ने इस पूरे प्रोजेक्ट में कम से कम 50% स्वदेशीकरण (Localisation) की कड़ी शर्त रखी है, जिसका सीधा मतलब यह है कि भारत में बनने वाले इन राफेल विमानों में कई एडवांस भारतीय सॉफ्टवेयर, रडार, इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम और घातक स्वदेशी मिसाइलें लगाई जाएंगी।

अंबाला से हाशिमारा तक पहले ही तैनात हैं राफेल, अब 176 विमानों का बनेगा महाबेड़ा

भारत और फ्रांस के बीच रक्षा और राफेल विमानों को लेकर सहयोग का इतिहास बेहद शानदार और पुराना रहा है। इससे पहले साल 2016 में दोनों देशों ने आपातकालीन जरूरतों के तहत 36 राफेल जेट विमानों के लिए एक अंतर-सरकारी समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। उन सभी 36 विमानों की सफल डिलीवरी भारत को बहुत पहले ही पूरी हो चुकी है, जिन्हें वर्तमान में चीन और पाकिस्तान सीमा की निगरानी के लिए अंबाला और हाशिमारा जैसे रणनीतिक एयर बेस पर तैनात किया गया है। वर्तमान में वायुसेना के इन 36 राफेल विमानों के अलावा, भारतीय नौसेना (Indian Navy) के विमानवाहक पोतों के लिए भी 26 राफेल-एम (Rafale-M) समुद्री लड़ाकू विमानों का सौदा पहले ही अंतिम चरण में पहुंच चुका है। ऐसे में यदि वायुसेना के लिए इन 114 नए विमानों का यह ताजा समझौता भी फाइनल हो जाता है, तो आने वाले समय में भारतीय सेनाओं के पास कुल 176 राफेल विमानों का एक ऐसा अजेय और महाशक्तिशाली बेड़ा तैयार हो जाएगा, जिसका सामना करने की जुर्रत दुनिया की कोई भी ताकत नहीं कर पाएगी।