
भारतीयों का सोने के प्रति लगाव तो जगजाहिर है, लेकिन इस समय देश का केंद्रीय बैंक यानी भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) भी सोने की चमक से पूरी तरह सराबोर है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतों में आ रही रिकॉर्ड तेजी और अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपये की मौजूदा स्थिति के कारण आरबीआई के गोल्ड रिजर्व (स्वर्ण भंडार) की वैल्यू एक ऐतिहासिक मुकाम पर पहुंच गई है।
ताजा आंकड़ों के मुताबिक, रिजर्व बैंक के पास मौजूद कुल सोने की कीमत अब करीब 11 लाख करोड़ रुपये हो चुकी है। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि केवल एक साल के भीतर आरबीआई के इस सोने के भंडार की कीमत में लगभग 64% की भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
सिर्फ 2 महीने में बढ़ी 2 लाख करोड़ रुपये की वैल्यू
अगर हम समय के इस चक्र को थोड़ा करीब से देखें, तो मार्च 2026 के अंत तक आरबीआई के कुल सोने का मूल्य 9,42,699 करोड़ रुपये के आसपास था। लेकिन इसके बाद के महज दो महीनों (22 मई 2026 तक) के भीतर ही इसकी वैल्यू बढ़कर 10,98,889 करोड़ रुपये (लगभग 11 लाख करोड़ रुपये) हो गई। वित्तीय विशेषज्ञों का कहना है कि यह जादुई बढ़ोतरी आरबीआई द्वारा नया सोना खरीदने से नहीं, बल्कि दुनिया भर के बाजारों में सोने के दाम बढ़ने और डॉलर के मुकाबले रुपये में आए बदलावों की वजह से हुई है।
आरबीआई के पास आखिर कितना सोना है और वह कहां रखा है?
आरबीआई की वार्षिक रिपोर्ट के मुताबिक, देश के पास सोने की कुल मात्रा में बहुत मामूली बदलाव हुआ है, लेकिन उसकी तिजोरी की कीमत कई गुना बढ़ गई है। रिजर्व बैंक के पास मौजूद इस सोने के पूरे गणित को नीचे दी गई तालिका से आसानी से समझा जा सकता है:
| विवरण (Gold Reserve Breakdown) | मात्रा / मूल्य (Amount / Value) |
| कुल स्वर्ण भंडार (Total Gold Weight) | 880.52 मीट्रिक टन (पिछले साल 879.58 टन था) |
| इश्यू डिपार्टमेंट के पास (चलन में मौजूद मुद्रा के सपोर्ट के लिए) | 312.32 मीट्रिक टन (वैल्यू बढ़कर ₹3.88 लाख करोड़ हुई) |
| बैंकिंग डिपार्टमेंट के पास (सोना और गोल्ड डिपॉजिट्स) | 568.20 मीट्रिक टन (वैल्यू बढ़कर ₹7.06 लाख करोड़ हुई) |
| भारत के भीतर सुरक्षित रखा सोना | 367.73 मीट्रिक टन |
| विदेशों के सुरक्षित बैंकों में जमा सोना | 200.47 मीट्रिक टन |
आरबीआई ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि उसने जनवरी 2026 में सिर्फ 0.13 टन सोने की छोटी सी खरीदारी की थी, जबकि फरवरी में कोई नया सोना नहीं खरीदा गया। यानी खजाने में सोने की मात्रा केवल 0.94 टन बढ़ी, लेकिन उसकी कुल कीमत में जबरदस्त उछाल आया।
विदेशी मुद्रा भंडार में बढ़ा सोने का दबदबा
पिछले दो सालों में भारत के कुल विदेशी मुद्रा भंडार (Foreign Exchange Reserves) में सोने की हिस्सेदारी बहुत तेजी से बढ़ी है। मार्च 2024 में जहां कुल विदेशी असेट्स में सोना सिर्फ 8.3% था, वहीं मार्च 2026 के अंत तक यह बढ़कर 17.2% पर पहुंच गया है। इसका मतलब है कि संकट के समय सबसे भरोसेमंद माना जाने वाला सोना अब हमारे विदेशी मुद्रा भंडार को और ज्यादा मजबूती दे रहा है।
?? अपने देश वापस लाया जा रहा है भारत का सोना
पिछले कुछ वर्षों से आरबीआई ने एक बेहद रणनीतिक फैसला लिया है, जिसके तहत विदेशों (जैसे बैंक ऑफ इंग्लैंड) में रखे भारत के सोने को वापस देश की सीमाओं के भीतर लाया जा रहा है। इसी योजना के तहत वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान 168.06 मीट्रिक टन सोना सुरक्षित तरीके से भारत वापस लाया गया। इससे पहले भी 2023-24 में 107.21 टन और 2024-25 में 103.68 टन सोना भारत की धरती पर वापस मंगाया जा चुका है। सुरक्षा और रणनीतिक लिहाज से इसे एक बड़ा और ठोस कदम माना जा रहा है।
विदेशी मुद्रा भंडार की ताजा स्थिति
अगर बात भारत के कुल विदेशी मुद्रा भंडार की करें, तो मार्च 2026 तक रुपये के मूल्य के हिसाब से यह 14.7% की बढ़त के साथ 65.54 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया था। हालांकि, डॉलर के मूल्य में यह बढ़ोतरी करीब 3.4% रही, जिससे यह 691.11 अरब डॉलर दर्ज किया गया था (जो मई के अंत तक मामूली गिरावट के साथ 681.38 अरब डॉलर के स्तर पर आ गया)। कुल मिलाकर, सोने की लगातार बढ़ती कीमतें भारतीय अर्थव्यवस्था और आरबीआई की बैलेंस शीट को एक अभेद्य सुरक्षा कवच प्रदान कर रही हैं।
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