News India Live, Digital Desk: केंद्र सरकार द्वारा 16 से 18 अप्रैल 2026 तक बुलाए गए संसद के तीन दिवसीय विशेष सत्र से पहले देश का राजनीतिक पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया है। महिला आरक्षण कानून (नारी शक्ति वंदन अधिनियम) को लागू करने के लिए सरकार द्वारा लाए जा रहे ‘संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026’ और ‘परिसीमन विधेयक’ को लेकर INDIA गठबंधन ने कड़ा रुख अपनाया है। विपक्षी दलों ने आरोप लगाया है कि सरकार महिला आरक्षण की आड़ में लोकसभा सीटों के परिसीमन (Delimitation) के जरिए दक्षिण भारतीय राज्यों की राजनीतिक शक्ति को कम करने की कोशिश कर रही है।
विपक्ष की मुख्य आपत्तियां: परिसीमन या ‘सीटों का खेल’?
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के आवास पर हुई विपक्षी नेताओं की बैठक में सरकार की रणनीति को चुनौती देने का फैसला लिया गया। विपक्ष की मुख्य चिंताएं इस प्रकार हैं:
2011 की जनगणना का आधार: सरकार परिसीमन के लिए 2011 की जनगणना के आंकड़ों का उपयोग करना चाहती है। विपक्ष का कहना है कि यह पुरानी जनगणना है और इसके आधार पर सीटों का बंटवारा दक्षिण भारतीय राज्यों के साथ अन्याय होगा, जिन्होंने जनसंख्या नियंत्रण में बेहतर प्रदर्शन किया है।
सीटों की संख्या में भारी बढ़ोतरी: प्रस्तावित विधेयक के तहत लोकसभा की सीटों को 543 से बढ़ाकर 816 या 850 करने का लक्ष्य है। विपक्ष का मानना है कि इससे उत्तर भारत के राज्यों (जैसे यूपी, बिहार) की सीटें भारी संख्या में बढ़ेंगी, जबकि दक्षिण के राज्यों का प्रतिनिधित्व संसद में तुलनात्मक रूप से कम हो जाएगा।
‘कोटा के भीतर कोटा’: सपा और राजद जैसे दल महिला आरक्षण के भीतर ओबीसी (OBC) महिलाओं के लिए अलग से कोटा की मांग पर अड़े हुए हैं।
16-18 अप्रैल का विशेष सत्र: सरकार बनाम विपक्ष
सरकार का तर्क है कि महिला आरक्षण को 2029 के चुनावों से पहले लागू करने के लिए परिसीमन जरूरी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सभी दलों से इस ‘ऐतिहासिक’ बदलाव का समर्थन करने की अपील की है। हालांकि, संविधान संशोधन के लिए दो-तिहाई बहुमत की आवश्यकता होती है, जो एनडीए के पास अकेले नहीं है। ऐसे में सरकार को इस बिल को पास कराने के लिए विपक्ष के समर्थन की सख्त जरूरत होगी।
चुनावी टाइमिंग पर भी सवाल
तृणमूल कांग्रेस (TMC) और द्रमुक (DMK) जैसे दलों ने इस सत्र की टाइमिंग पर भी सवाल उठाए हैं। बता दें कि पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में 23 अप्रैल और 29 अप्रैल को विधानसभा चुनाव होने हैं। विपक्षी सांसदों का कहना है कि चुनावों के बीच में इस तरह का सत्र बुलाना मतदाताओं को प्रभावित करने और क्षेत्रीय दलों के प्रचार में बाधा डालने की कोशिश है।
‘स्मोकस्क्रीन’ या वास्तविक सुधार?
महिला अधिकार कार्यकर्ताओं और सिविल सोसाइटी ने भी चिंता जाहिर की है कि महिला आरक्षण को परिसीमन के साथ जोड़ना इसे अनिश्चितकाल के लिए टालने या इसे ‘स्मोकस्क्रीन’ (छलावा) की तरह उपयोग करने जैसा है। उनकी मांग है कि आरक्षण को वर्तमान सीटों की संख्या (543) पर ही तुरंत लागू किया जाना चाहिए।
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