News India Live, Digital Desk : बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती (Mayawati) ने महिला आरक्षण बिल को लेकर एक बड़ा सियासी दांव चल दिया है। संसद के विशेष सत्र में पेश होने वाले इस ऐतिहासिक बिल का स्वागत करते हुए मायावती ने न केवल इसके दायरे को बढ़ाने की मांग की, बल्कि इसमें ‘कोटे के भीतर कोटा’ की शर्त रखकर नई बहस छेड़ दी है। मायावती ने साफ कहा कि महिलाओं को उनकी आबादी के अनुपात में 50 प्रतिशत आरक्षण मिलना चाहिए, जिसमें दलित, पिछड़ी और आदिवासी महिलाओं की हिस्सेदारी सुनिश्चित हो।
‘आरक्षण में आरक्षण’ के बिना बिल अधूरा
बुधवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान मायावती ने केंद्र सरकार को चेतावनी भरे लहजे में कहा कि बहुजन समाज की महिलाओं की स्थिति अन्य वर्गों की तुलना में अधिक दयनीय है। उनकी मुख्य मांगें निम्नलिखित हैं:
अलग से कोटा: एससी, एसटी और ओबीसी समाज की महिलाओं के लिए बिल के भीतर अलग से आरक्षण की व्यवस्था की जाए।
सामंती ताकतों का डर: मायावती ने तर्क दिया कि यदि इन वर्गों के लिए अलग कोटा नहीं हुआ, तो सामंती मानसिकता वाले लोग पिछड़ी और दलित महिलाओं को सत्ता के गलियारों से दूर रखेंगे।
अधूरा लाभ: उन्होंने शंका जताई कि सर्वसमाज की महिलाओं को शामिल किए बिना इस बिल का लाभ केवल गिने-चुने वर्गों तक ही सीमित रह जाएगा।
विरोधियों की ‘जातिवादी’ राजनीति और डॉ. अंबेडकर का जिक्र
मायावती ने कांग्रेस और भाजपा दोनों पर निशाना साधते हुए उन्हें ‘जातिवादी’ मानसिकता का पोषक बताया। उन्होंने इतिहास की याद दिलाते हुए कहा:
हिंदू कोड बिल: बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर ने महिलाओं को समान अधिकार दिलाने के लिए ‘हिंदू कोड बिल’ पेश किया था, लेकिन तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने इसे स्वीकार नहीं किया।
इस्तीफा और संघर्ष: मायावती ने कहा कि बाबा साहेब ने महिलाओं के हक के लिए कानून मंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया था। बसपा आज उसी संघर्ष को आगे बढ़ा रही है।
मंडल आयोग: उन्होंने उदाहरण दिया कि जिस तरह कड़े संघर्ष के बाद ओबीसी को 27% आरक्षण मिला, उसी तरह महिलाओं को भी अब पूर्ण हक मिलना चाहिए।
संकीर्ण राजनीति से ऊपर उठने की अपील
देशभर में महिलाओं के खिलाफ हो रही जघन्य वारदातों का हवाला देते हुए बसपा प्रमुख ने केंद्र सरकार से अपील की कि इस बिल को किसी चुनावी लाभ-हानि के चश्मे से न देखा जाए। उन्होंने मांग की कि सरकार अपनी संकीर्ण मानसिकता का त्याग करे और बिल को जल्द से जल्द समावेशी तरीके से लागू करे।
बढ़ता दबाव: खड़गे और चंद्रशेखर का भी रुख
मायावती का यह बयान ऐसे समय आया है जब विपक्ष के अन्य नेता भी लामबंद हो रहे हैं। एक तरफ कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने विपक्षी दलों की महाबैठक बुलाई है, वहीं दूसरी तरफ सांसद चंद्रशेखर आजाद ने भी लोकसभा और विधानसभाओं में पिछड़ों के लिए अलग आरक्षण का दांव खेला है। उत्तर प्रदेश की राजनीति में मायावती के इस रुख ने भाजपा के लिए ‘महिला कार्ड’ और ‘ओबीसी कार्ड’ के बीच संतुलन बनाना चुनौतीपूर्ण कर दिया है।
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