Evergreen Bollywood : दूल्हे का सेहरा रिकॉर्डिंग का वो अनसुना किस्सा,जब नुसरत फतेह अली खान एक लाइन पर अटक गए

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News India Live, Digital Desk: साल 2000 में आई फिल्म ‘धड़कन’ (Dhadkan) न केवल अपनी प्रेम कहानी बल्कि अपने कालजयी संगीत के लिए भी जानी जाती है। इस फिल्म का सबसे आइकोनिक गाना ‘दूल्हे का सेहरा सुहाना लगता है’ आज भी शादियों की पहली पसंद है। लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि इस गाने की रिकॉर्डिंग के दौरान विश्व प्रसिद्ध कव्वाल नुसरत फतेह अली खान (Nusrat Fateh Ali Khan) को एक खास लाइन गाने में काफी मशक्कत करनी पड़ी थी। संगीतकार नदीम-श्रवण की जोड़ी ने इस गाने के पीछे छिपे उस दिलचस्प संघर्ष का खुलासा किया है।

जब नुसरत साहब के लिए चुनौती बन गई थी ये लाइन

फिल्म के संगीतकार नदीम सैफी ने एक इंटरव्यू में बताया कि जब नुसरत साहब इस गाने को रिकॉर्ड कर रहे थे, तो गाने के अंत में एक आलाप और एक ऊंची तान वाली लाइन थी जिसे वह बार-बार दोहरा रहे थे। नुसरत साहब जैसे दिग्गज गायक, जो घंटों तक बिना रुके गा सकते थे, उस दिन एक विशेष लय (Pitch) को पकड़ने में थोड़ा असहज महसूस कर रहे थे। नदीम के मुताबिक, वह बार-बार रुक रहे थे और कह रहे थे, “बेटा, यह लाइन मेरी आवाज के टेक्सचर में थोड़ी अलग लग रही है।”

नदीम-श्रवण का वो अटूट भरोसा और नुसरत साहब का जादू

नदीम ने बताया कि उन्होंने नुसरत साहब से हार न मानने की गुजारिश की। उन्होंने कहा, “खान साहब, आपकी आवाज में जो दर्द है, वही इस गाने की जान है।” इसके बाद नुसरत फतेह अली खान ने कुछ मिनटों का ब्रेक लिया, थोड़ा पानी पिया और फिर जब दोबारा माइक्रोफोन संभाला, तो उन्होंने उस लाइन को ऐसे गाया कि स्टूडियो में मौजूद हर शख्स की आंखों में आंसू आ गए। उन्होंने उस गाने में अपनी रूह फूंक दी थी, जिसे हम आज भी सुनते हैं।

अक्षय कुमार और शिल्पा शेट्टी की केमिस्ट्री को मिला संगीत का साथ

‘धड़कन’ फिल्म में अक्षय कुमार, शिल्पा शेट्टी और सुनील शेट्टी की त्रिकोणीय प्रेम कहानी को इस गाने ने एक अलग ही ऊंचाई पर पहुँचा दिया था। फिल्म में जब यह गाना आता है, तो वह पूरी कहानी का टर्निंग पॉइंट साबित होता है। दिलचस्प बात यह है कि इस गाने की रिकॉर्डिंग फिल्म की रिलीज से काफी समय पहले हो गई थी, और नुसरत साहब के निधन के बाद जब फिल्म रिलीज हुई, तो यह गाना उनके लिए एक बड़ी श्रद्धांजलि बन गया।

आज भी क्यों खास है ‘दूल्हे का सेहरा’?

26 साल बाद भी इस गाने का क्रेज कम नहीं हुआ है। संगीत समीक्षकों का मानना है कि नुसरत साहब की मखमली आवाज और नदीम-श्रवण के संगीत का संगम ही इस गाने को ‘एवरग्रीन’ बनाता है। हाल ही में सोशल मीडिया पर इस गाने के बिहाइंड-द-सीन्स (BTS) किस्सों के वायरल होने के बाद पुराने दौर के संगीत प्रेमियों की यादें एक बार फिर ताजा हो गई हैं।

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