
देश में एक बार फिर टैक्सपेयर्स के लिए साल का सबसे महत्वपूर्ण समय यानी इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) दाखिल करने का सीजन शुरू हो चुका है। आयकर विभाग ने इस साल के लिए ITR-1 (सहज), ITR-2 और ITR-4 (सुगम) के ऑनलाइन फॉर्म और एक्सेल यूटिलिटी को पोर्टल पर लाइव कर दिया है। फॉर्म लाइव होते ही कई लोग तुरंत रिटर्न फाइल करने की तैयारी में जुट जाते हैं, लेकिन टैक्स एक्सपर्ट्स का कहना है कि खासकर नौकरीपेशा (Salaried) कर्मचारियों को अभी कम से कम जून के मध्य तक इंतजार करना चाहिए। इसकी वजह यह है कि ज्यादातर कंपनियों द्वारा कर्मचारियों को मिलने वाला Form 16 जून के दूसरे या तीसरे हफ्ते तक ही जारी किया जाता है, जिसके बिना सही रिटर्न भरना नामुमकिन है।
वित्त वर्ष 2025-26 की कमाई के लिए इस बार जब आप अपना टैक्स रिटर्न दाखिल करेंगे, तो आपको प्रक्रिया भले ही पुरानी जैसी दिखे, लेकिन बैकएंड पर कई कड़े और पारदर्शी नियम जोड़ दिए गए हैं। आइए बहुत ही आसान भाषा में समझते हैं उन 5 बड़े बदलावों को, जिन्हें जाने बिना अगर आपने फॉर्म भरा, तो आपको टैक्स डिपार्टमेंट से नोटिस मिल सकता है।
1. ITR-1 का दायरा बढ़ा: अब दो घरों की आय दिखाना संभव
अब तक छोटे टैक्सपेयर्स के लिए बने ITR-1 (सहज) फॉर्म में केवल एक ही मकान (Single House Property) से होने वाली कमाई या नुकसान की जानकारी देने की छूट थी। लेकिन इस बार सरकार ने इसका दायरा बढ़ा दिया है।
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क्या है नया: अब अगर आपके पास दो मकान हैं और दोनों से आपको किराये की आय हो रही है, तो आप ITR-1 फॉर्म के जरिए ही अपना रिटर्न दाखिल कर सकेंगे।
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म्यूचुअल फंड और शेयर्स पर राहत: इसके साथ ही, लिस्टेड शेयर्स या म्यूचुअल फंड बेचने पर होने वाले लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन (सेक्शन 112A के तहत) को भी अब ITR-1 में दिखाया जा सकता है। बशर्ते आपका कुल लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन 1.25 लाख रुपये से ज्यादा न हो और आपका पिछला कोई कैपिटल लॉस बाकी न हो।
2. कैपिटल गेन टैक्स के नए नियम हुए लागू
बजट में किए गए घोषणाओं के बाद 23 जुलाई 2024 से कैपिटल गेन टैक्स के नियमों में जो क्रांतिकारी बदलाव हुए थे, वे इस बार के रिटर्न फॉर्म में पूरी तरह दिखाई देंगे।
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इंडेक्सेशन खत्म: अब अधिकांश संपत्तियों (जैसे रियल एस्टेट या गोल्ड) की बिक्री पर मिलने वाला इंडेक्सेशन (महंगाई समायोजन) का फायदा खत्म कर दिया गया है।
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नया टैक्स रेट: इसके बदले अब लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन पर सीधा 12.5% की दर से फ्लैट टैक्स लगेगा। इसके अलावा होल्डिंग पीरियड को भी सरल किया गया है— लिस्टेड सिक्योरिटीज के लिए अब यह अवधि 1 साल और अन्य सभी संपत्तियों (जैसे जमीन या मकान) के लिए 2 साल तय की गई है।
3. ‘किराया नहीं मिला तो?’ फॉर्म में जुड़ा नया कॉलम
मकान मालिकों और किरायेदारों के बीच होने वाले विवादों या किसी अन्य वजह से अगर मकान मालिक को तय किराया नहीं मिल पाता था, तो पहले उसे अलग से दिखाने का कोई विकल्प नहीं था।
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पारदर्शिता बढ़ेगी: आयकर विभाग ने इस बार ITR-1 और ITR-4 फॉर्म में एक बिल्कुल नया कॉलम जोड़ दिया है। इसमें टैक्सपेयर्स को उस किराये (Unrealized Rent) की सटीक जानकारी देनी होगी जो वे कानूनी तौर पर वसूल नहीं पाए हैं। इससे आपकी वास्तविक किराये की आय तय होगी और आपको सिर्फ उसी हिस्से पर टैक्स देना होगा जो सच में आपकी जेब में आया है।
4. बिजनेस करने वालों को बताना होगा बैंक का क्लोजिंग बैलेंस
यह बदलाव उन छोटे व्यापारियों और प्रोफेशनल्स के लिए है जो प्रिजम्पटिव टैक्सेशन स्कीम (Presumptive Taxation Scheme – धारा 44AD, 44ADA और 44AE) के तहत बिना लंबी-चौड़ी अकाउंट बुक बनाए सीधा अनुमानित आय पर टैक्स देते हैं और ITR-4 (सुगम) फॉर्म भरते हैं।
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नया डिस्क्लोजर अनिवार्य: ऐसे सभी टैक्सपेयर्स को अब 31 मार्च 2026 की स्थिति के अनुसार अपने सभी एक्टिव बैंक खातों का कुल क्लोजिंग बैलेंस (Closing Balance) फॉर्म में साफ-साफ लिखना होगा। सरकार इस कदम से यह सुनिश्चित करना चाहती है कि आपके टर्नओवर और बैंक बैलेंस में कोई बड़ा अंतर न हो।
5. नई टैक्स व्यवस्था (New Tax Regime) को लेकर बढ़ी स्पष्टता
पिछले कुछ समय से देश में ओल्ड टैक्स रिजीम और न्यू टैक्स रिजीम को चुनने या उससे बाहर निकलने (Opt-out) को लेकर टैक्सपेयर्स, खासकर बिजनेस इनकम वाले लोगों के बीच काफी असमंजस की स्थिति बनी हुई थी। इस बार के फॉर्म में विभाग ने इस प्रक्रिया को बेहद आसान और स्पष्ट कर दिया है। फॉर्म में अब अतिरिक्त डिस्क्लोजर और स्पष्ट विकल्प दिए गए हैं, जिससे टैक्सपेयर्स बिना किसी गलती के अपनी पसंद की टैक्स व्यवस्था चुन सकेंगे।
ITR 2026 के मुख्य बदलावों की त्वरित सूची (Quick Summary)
| फॉर्म का प्रकार | किसके लिए है? | इस बार का सबसे बड़ा बदलाव |
| ITR-1 (सहज) | सैलरी और ₹50 लाख तक की कुल आय वाले सामान्य नागरिक | अब दो मकानों की आय और ₹1.25 लाख तक का LTCG दिखाना संभव। |
| ITR-4 (सुगम) | छोटे व्यापारी और प्रोफेशनल्स (Presumptive Income) | 31 मार्च 2026 तक के सभी बैंक खातों का क्लोजिंग बैलेंस बताना अनिवार्य। |
| ITR-1 और ITR-4 | मकान मालिक (Landlords) | वसूला न जा सका किराया (Unrealized Rent) दर्ज करने के लिए नया कॉलम जुड़ा। |
| सभी फॉर्म | निवेशक (Investors) | बिना इंडेक्सेशन के 12.5% की नई लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स दर लागू। |
एक्सपर्ट की काम की सलाह:
इनकम टैक्स विभाग का पूरा जोर अब इस बात पर है कि टैक्सपेयर्स अपनी हर तरह की छोटी-बड़ी कमाई को पूरी ईमानदारी और सटीकता से फॉर्म में दर्ज करें। इसलिए रिटर्न फाइल करने से पहले अपने AIS (Annual Information Statement) और Form 26AS का मिलान अपने बैंक स्टेटमेंट से जरूर कर लें। जल्दबाजी में की गई एक छोटी सी मिसमैचिंग भी आपके पास स्क्रूटनी या रिवाइज्ड रिटर्न का नोटिस भेज सकती है।
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