
हिंदू धर्म और वैदिक पंचांग में पूर्णिमा तिथि को बेहद पवित्र और चमत्कारी माना गया है। इस दिन जगत के पालनहार भगवान विष्णु और धन की देवी माता लक्ष्मी की पूजा का विधान है। वैसे तो साल की सभी पूर्णिमा महत्वपूर्ण होती हैं, लेकिन शास्त्रों में अधिकमास की पूर्णिमा को ‘सर्व सिद्धिदायनी पूर्णिमा’ (सभी इच्छाएं पूरी करने वाली) कहा गया है।
चूंकि अधिकमास (जिसे पुरुषोत्तम मास या मलमास भी कहते हैं) का यह अद्भुत संयोग हर तीन साल में केवल एक बार बनता है, इसलिए इस पूर्णिमा का महत्व सामान्य पूर्णिमा से कई गुना बढ़ जाता है। इस साल 2026 में ज्येष्ठ का महीना अधिकमास है। ऐसे में ज्येष्ठ अधिकमास पूर्णिमा तिथि को लेकर दो दिनों का संयोग बन रहा है। आइए ज्योतिषाचार्यों के अनुसार जानते हैं कि व्रत किस दिन रखा जाएगा, स्नान-दान कब होगा और इस दिन किन विशेष चीजों का दान करना भाग्य बदल सकता है।
अधिकमास पूर्णिमा तिथि का पूरा समय (Purnima Tithi Timing)
पंचांग गणना के अनुसार, इस साल ज्येष्ठ अधिकमास की पूर्णिमा तिथि दो दिनों तक व्याप्त रहेगी, जिसके कारण व्रत की तारीख और स्नान-दान का दिन अलग-अलग तय किया गया है:
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पूर्णिमा तिथि का प्रारंभ: 30 मई 2026, शनिवार को सुबह 11 बजकर 57 मिनट से।
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पूर्णिमा तिथि का समापन: 31 मई 2026, रविवार को दोपहर 02 बजकर 14 मिनट पर।
किस दिन क्या करें? व्रत और स्नान-दान की सही तारीखें
तिथि के घटने-बढ़ने के कारण दोनों दिनों का धार्मिक महत्व अलग-अलग तरीके से शास्त्र सम्मत माना गया है:
1. अधिकमास पूर्णिमा व्रत: 30 मई 2026 (शनिवार)
यदि आप पूर्णिमा का उपवास रखती हैं, तो 30 मई 2026 को व्रत रखना सर्वश्रेष्ठ रहेगा।
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कारण: हिंदू धर्म के नियमों के अनुसार, पूर्णिमा व्रत में रात के समय चंद्रमा को अर्घ्य देने और चंद्र देव की पूजा करने का नियम है। 30 मई की रात को ही चंद्रमा के उदय (चंद्रोदय) के समय पूर्णिमा तिथि मौजूद रहेगी।
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लाभ: इस दिन चंद्र देव की विशेष पूजा करने से कुंडली में ‘चंद्र दोष’ दूर होता है, मानसिक तनाव से मुक्ति मिलती है और घर में सुख-शांति का वास होता है।
2. अधिकमास पूर्णिमा स्नान-दान: 31 मई 2026 (रविवार)
ज्योतिषाचार्य नरेंद्र उपाध्याय के अनुसार, नदियों में पवित्र स्नान और दान-पुण्य करने के लिए 31 मई 2026 का दिन सर्वोत्तम और अचूक रहेगा।
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कारण: शास्त्र उदया तिथि (सूर्योदय के समय की तिथि) को स्नान-दान के लिए प्रधान मानते हैं। 31 मई को सूर्योदय के समय पूर्णिमा तिथि मौजूद रहेगी।
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शुभ संयोग: इस दिन आकाश मंडल में ‘रवि योग’ का बेहद शुभ और पराक्रमी संयोग बन रहा है, जो दान के फल को हजार गुना बढ़ा देता है।
अधिकमास पूर्णिमा पर क्या दान करें? (Donation Items)
पुरुषोत्तम मास की पूर्णिमा पर किया गया दान कई बड़े यज्ञों को कराने के समान पुण्य फल प्रदान करता है। इस दिन अपने सामर्थ्य के अनुसार निम्नलिखित चीजों का दान अवश्य करना चाहिए:
पौराणिक मान्यता और फल
अधिकमास पूर्णिमा के दिन जो भी जातक पूरी श्रद्धा के साथ व्रत रखता है या दान करता है, उसे सोए हुए भाग्य का साथ मिलने लगता है। भगवान जनार्दन (विष्णु) और लक्ष्मी जी की साक्षात कृपा से उस घर में कभी भी धन-धान्य, वैभव और रुपयों-पैसों की कमी नहीं होती।
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