CBSE 12th Re-evaluation 2026: आज से खुलेगी री-इवैल्यूएशन विंडो, OSM विवाद के बीच लाखों आवेदनों के आसार

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) आज यानी 29 मई 2026 से कक्षा 12वीं के छात्रों के लिए आंसर शीट री-इवैल्यूएशन (पुनर्मूल्यांकन) और मार्क्स वेरिफिकेशन (अंकों का सत्यापन) की ऑनलाइन विंडो खोलने जा रहा है। जिन भी विद्यार्थियों को इस साल अपने रिजल्ट, कॉपियों की चेकिंग, मार्किंग या टोटलिंग को लेकर कोई भी आपत्ति है, वे आज से आधिकारिक तौर पर अप्लाई कर सकते हैं।

बोर्ड के नियमों के मुताबिक, केवल वही छात्र इस री-इवैल्यूएशन प्रक्रिया के लिए पात्र (Eligible) माने जाएंगे, जिन्होंने पहले चरण में अपनी आंसर शीट की स्कैन की हुई डिजिटल कॉपी प्राप्त कर ली है। इस साल ऑनस्क्रीन मार्किंग (OSM) सिस्टम को लेकर खड़े हुए बड़े विवाद के कारण बोर्ड के पास पुनर्मूल्यांकन के लिए लाखों की संख्या में आवेदन आने की संभावना जताई जा रही है।

OSM पर छिड़ा महासंग्राम: 99 पर्सेंटाइल वाले भी 12वीं में फेल!

सीबीएसई ने 12वीं का रिजल्ट बीती 13 मई 2026 को जारी किया था। इस साल बोर्ड का कुल पास प्रतिशत पिछले साल के 88.39% से घटकर 85.20% पर आ गया है। इस गिरावट की सबसे बड़ी वजह इस बार लागू किया गया ऑन-स्क्रीन मार्किंग सिस्टम (OSM) माना जा रहा है, जिसके तहत करीब 98 लाख कॉपियां कंप्यूटर स्क्रीन पर डिजिटल रूप से जांची गई थीं, जबकि महज 13,000 कॉपियां ही हाथ से (मैन्युअल) चेक हुईं।

छात्रों और पेरेंट्स के गंभीर आरोप:

  • 75% क्राइटेरिया से बाहर: कई ऐसे होनहार छात्र जिन्होंने देश की सबसे कठिन इंजीनियरिंग परीक्षा JEE Main में 99 पर्सेंटाइल हासिल किए हैं, वे इस ओएसएम चेकिंग की वजह से 12वीं बोर्ड में अनिवार्य 75% अंक भी नहीं ला पाए। इसके चलते अब वे IIT-NIT में एडमिशन की रेस से बाहर होने की कगार पर हैं।

  • स्टेप मार्किंग गायब: छात्रों का आरोप है कि स्क्रीन पर कॉपियां ठीक से स्क्रॉल न होने के कारण शिक्षकों ने स्टेप वाइज मार्किंग में भारी लापरवाही की और सही जवाबों पर भी शून्य या बेहद कम नंबर दिए।

  • आंसरशीट बदलने का दावा: ‘वेदांत मामले’ समेत कई छात्राओं ने आरोप लगाया है कि उन्हें जो स्कैन कॉपियां भेजी गई हैं, वे उनकी हैं ही नहीं या फिर उनके बहुविकल्पीय प्रश्नों (MCQs) में जानबूझकर नंबर काटे गए हैं।

इस भारी विवाद को देखते हुए कयास लगाए जा रहे हैं कि री-इवैल्यूएशन के दौरान कॉपियों को दोबारा स्क्रीन पर जांचने के बजाय सीबीएसई के अनुभवी शिक्षक इन्हें मैन्युअल तरीके (हाथ से) चेक कर सकते हैं।

क्या हैं री-चेकिंग के नियम और जरूरी फीस?

सीबीएसई ने री-इवैल्यूएशन प्रक्रिया के लिए दो मुख्य आर्थिक और व्यावहारिक नियम तय किए हैं:

  • मार्क्स वेरिफिकेशन फीस: यदि छात्र केवल अपने कुल प्राप्तांकों की दोबारा टोटलिंग या अंकों का वेरिफिकेशन कराना चाहते हैं, तो उन्हें 100 रुपये प्रति विषय फीस देनी होगी।

  • प्रति प्रश्न री-इवैल्यूएशन फीस: यदि छात्र स्कैन कॉपी देखने के बाद किसी विशिष्ट उत्तर (आंसर) को दोबारा चेक करवाना चाहते हैं, तो उन्हें 25 रुपये प्रति प्रश्न के हिसाब से फीस का भुगतान करना होगा।

  • नंबर बढ़ने पर फीस रिफंड: छात्रों के हित में बोर्ड ने एक बड़ा नियम बनाया है— यदि री-चेकिंग के बाद छात्र का 1 नंबर भी बढ़ता है, तो बोर्ड इस पूरी प्रक्रिया की ली गई फीस छात्र को वापस (रिफंड) कर देगा।

  • नंबर कम होने का जोखिम: छात्रों को यह ध्यान रखना होगा कि री-इवैल्यूएशन के बाद नंबर बढ़ भी सकते हैं और कम भी हो सकते हैं। यदि किसी मानवीय या तकनीकी गलती को सुधारने के दौरान आपके नंबर कम पाए जाते हैं, तो आपकी फाइनल मार्कशीट में नंबर घटा दिए जाएंगे।

रिकॉर्ड 4 लाख से ज्यादा छात्रों ने मांगी थी स्कैन कॉपी

पोर्टल में आई कुछ तकनीकी दिक्कतों के कारण पहले यह प्रक्रिया 26 मई को शुरू होने वाली थी, जिसे बढ़ाकर अब 29 मई किया गया है। सीबीएसई द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, इस बार आंसर-शीट की स्कैन कॉपी (फोटोकॉपी) पाने के लिए बोर्ड को कुल 4,04,319 आवेदन मिले थे। इन छात्रों ने रिकॉर्ड 11,31,961 आंसर-शीट की मांग की थी, जिनमें से बोर्ड अब तक 8,98,214 आंसर-शीट डिजिटल रूप से उपलब्ध करा चुका है।

CBSE 12वीं के री-इवैल्यूएशन के लिए ऐसे करें ऑनलाइन आवेदन

जो छात्र अपनी स्कैन कॉपी देख चुके हैं और री-इवैल्यूएशन के लिए आगे बढ़ना चाहते हैं, वे नीचे दी गई प्रक्रिया का पालन करें:

1.सीबीएसई पोर्टल पर जाएं:स्टेप 1.

सीबीएसई की आधिकारिक वेबसाइट (cbse.gov.in) पर जाएं और होमपेज पर दिए गए ‘Post Result Services’ या ‘Verification & Re-evaluation’ के लिंक पर क्लिक करें।

2.लॉग-इन क्रेडेंशियल दर्ज करें:स्टेप 2.

अपना व्यक्तिगत रोल नंबर (Roll Number) और एडमिट कार्ड ID दर्ज करके पोर्टल के अंदर लॉग-इन करें।

3.आवेदन का प्रकार चुनें:स्टेप 3.

अपनी आवश्यकता के अनुसार स्क्रीन पर दिख रहे विकल्पों में से चुनें:

  • अंकों का वेरिफिकेशन (Marks Verification)

  • री-इवैल्यूएशन (Re-evaluation)

  • वेरिफिकेशन और री-इवैल्यूएशन दोनों

4.विषय और प्रश्न संख्या का चयन:स्टेप 4.

जिस विषय की कॉपी री-चेक करानी है  Bold Keyboard shortcut Ctrl+Bउसे चुनें। री-इवैल्यूएशन के मामले में, अपनी स्कैन कॉपी के आधार पर उन विशिष्ट प्रश्न नंबरों (Question Numbers) को टिक करें जिनकी दोबारा समीक्षा आप बोर्ड से चाहते हैं।

5.फीस भुगतान और रसीद:स्टेप 5.

निर्धारित शुल्क (100 रुपये प्रति विषय या 25 रुपये प्रति प्रश्न) का नेट बैंकिंग, डेबिट/क्रेडिट कार्ड या यूपीआई के माध्यम से ऑनलाइन भुगतान करें। फॉर्म सबमिट करने के बाद कंफर्मेशन पेज को डाउनलोड करके भविष्य के संदर्भ के लिए सुरक्षित रख लें।

कैसे काम करता है सीबीएसई का ओएसएम (OSM) सिस्टम?

यह प्रक्रिया पूरी तरह डिजिटल होती है। परीक्षा समाप्त होने के बाद सबसे पहले सभी छात्रों की मुख्य उत्तर पुस्तिकाओं (आंसरशीट्स) को हाई-स्पीड स्कैनर्स के जरिए स्कैन किया जाता है। इसके बाद इन डिजिटल कॉपियों को सीबीएसई के एक सुरक्षित क्लाउड सर्वर पर अपलोड कर दिया जाता है। शिक्षक अपने घर या मूल्यांकन केंद्र से कंप्यूटर स्क्रीन पर इन कॉपियों को चेक करते हैं और वहीं पर मार्क्स देते हैं। इस सिस्टम की सबसे बड़ी खासियत यह है कि कंप्यूटर खुद ही सारे नंबरों को जोड़ता है, जिससे टोटलिंग (योग) में गलती होने की गुंजाइश शून्य हो जाती है, हालांकि इस बार स्क्रीन विजिबिलिटी के कारण मार्किंग पर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं।