
हिंदू धर्म में हनुमान जी सबसे लोकप्रिय और पूजे जाने वाले देवताओं में से एक हैं। उन्हें प्रभु श्री राम के परम भक्त और हर संकट को पल भर में दूर करने वाले ‘संकट मोचन’ के रूप में जाना जाता है। रामायण से लेकर रामचरितमानस तक, हर पवित्र ग्रंथ में बजरंगबली के पराक्रम, उनकी बुद्धि और श्रीराम के प्रति अगाध भक्ति का सुंदर वर्णन मिलता है। अंजनी पुत्र और केसरी नंदन जैसे नामों से पुकारे जाने वाले हनुमान जी ने पग-पग पर प्रभु श्री राम का साथ दिया।
लेकिन क्या आप जानते हैं कि हनुमान जी अपने माता-पिता के अकेले पुत्र नहीं थे? अमूमन हम सभी यही मानते हैं कि वे इकलौते थे, लेकिन विभिन्न पुराणों के पन्नों को पलटें तो एक बिल्कुल अलग और हैरान कर देने वाला तथ्य सामने आता है। कथाओं के अनुसार, हनुमान जी के पांच सगे भाई भी थे। आइए विस्तार से जानते हैं इस बेहद रोचक और अनसुने रहस्य के बारे में।
कैसे हुआ था पवनपुत्र का जन्म?
पौराणिक कथाओं के अनुसार, हनुमान जी का जन्म वानरराज केसरी और माता अंजना के घर हुआ था। माता अंजना अत्यंत रूपवती और तपस्विनी थीं। मान्यता है कि भगवान शिव के आशीर्वाद और वायु देव के अंश से हनुमान जी का अवतरण हुआ, इसी वजह से उन्हें ‘पवन पुत्र’ भी कहा जाता है। बचपन से ही हनुमान जी के पास असाधारण शक्तियां और असीमित ज्ञान था, जिसके बल पर उन्होंने बचपन में ही कई अद्भुत लीलाएं दिखाई थीं।
हनुमान जी के 5 भाइयों के नाम और उनका जीवन
हनुमान जी के भाइयों का सबसे विस्तृत और प्रामाणिक वर्णन ब्रह्मांड पुराण में मिलता है, जहां वानरों की वंशावली का पूरा लेखा-जोखा दिया गया है। इस ग्रंथ के अनुसार, हनुमान जी कुल छह भाई थे और वे अपने सभी भाइयों में सबसे बड़े थे।
नीचे दी गई तालिका में हनुमान जी के सभी भाइयों के नाम और उनके जीवन से जुड़ी मुख्य बातें दी गई हैं:
| क्रम संख्या | भाई का नाम | जीवन की मुख्य विशेषता |
| 1. | हनुमान जी | सबसे बड़े भाई, जिन्होंने आजीवन बाल ब्रह्मचारी रहकर प्रभु श्री राम की सेवा की। |
| 2. | मतिमान (Matiman) | सामान्य गृहस्थ जीवन जिया और इनका विवाह भी हुआ था। |
| 3. | श्रुतिमान (Shrutiman) | इन्होंने भी सांसारिक जीवन को चुना और परिवार के साथ रहे। |
| 4. | केतुमान (Ketuman) | इनका जीवन भी एक आम नागरिक और गृहस्थ की तरह बीता। |
| 5. | गतिमान (Gatiman) | पुराणों में इन्हें भी विवाहित और परिवार संवारने वाला बताया गया है। |
| 6. | धृतिमान (Dhritiman) | सबसे छोटे भाई, जिन्होंने अपने भाइयों की तरह सामान्य सांसारिक जिम्मेदारियां निभाईं। |
बड़ा अंतर: जहां एक तरफ संकटमोचन हनुमान जी ने संसार के मोह-माया को त्यागकर प्रभु भक्ति और ब्रह्मचर्य का रास्ता चुना, वहीं उनके बाकी पांचों भाइयों ने एक सामान्य इंसान की तरह विवाह किया और गृहस्थ जीवन का पालन किया।
आखिर रामचरितमानस में क्यों नहीं मिलता इनका जिक्र?
यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि यदि हनुमान जी के पांच भाई थे, तो गोस्वामी तुलसीदास जी ने रामचरितमानस में उनका नाम क्यों नहीं लिखा?
इसके पीछे एक बेहद सरल और तार्किक कारण है। रामचरितमानस का मुख्य उद्देश्य भगवान श्री राम के जीवन चरित्र, उनकी मर्यादा और उनके प्रमुख भक्तों की लीलाओं को समाज के सामने लाना था। तुलसीदास जी ने अपना पूरा ध्यान श्री राम, माता सीता, लक्ष्मण, भरत, शत्रुघ्न और उनके मुख्य सहयोगियों के चरित्र पर ही केंद्रित रखा।
चूंकि हनुमान जी के भाइयों का प्रभु श्री राम की लंका विजय या अन्य मुख्य लीलाओं में कोई सीधा योगदान नहीं था और वे एक शांत गृहस्थ जीवन जी रहे थे, इसलिए रामचरितमानस में उनके पारिवारिक विस्तार या वंशावली की चर्चा नहीं की गई। वहां केवल हनुमान जी के उस रूप को दिखाया गया जो राम काज के लिए समर्पित था।
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