परवीन बाबी का वो दर्दनाक अंतिम समय: पूजा भट्ट ने बयां किया बॉलीवुड का सबसे कड़वा सच, बताया कैसे तमाशा देखती रही दुनिया

70 और 80 के दशक में अपनी खूबसूरती और बेहतरीन अदाकारी से करोड़ों दिलों पर राज करने वाली एक्ट्रेस परवीन बाबी को भला कौन भूल सकता है। ‘दीवार’, ‘शान’, ‘नमक हलाल’ और ‘अमर अकबर एंथनी’ जैसी एक से बढ़कर एक सुपरहिट फिल्में देने वाली परवीन बाबी ने अपने दौर में वो स्टारडम देखा था जिसकी कल्पना आज की एक्ट्रेसेस भी करती हैं। लेकिन इस चकाचौंध के पीछे एक ऐसा अंधेरा भी छिपा था, जिसने धीरे-धीरे उनकी पूरी जिंदगी को तबाह कर दिया। जीवन के आखिरी पड़ाव में वे गंभीर मानसिक बीमारी की गिरफ्त में आ गईं और साल 2005 में उन्होंने इस दुनिया को हमेशा के लिए अलविदा कह दिया।

हाल ही में मशहूर फिल्ममेकर महेश भट्ट की बेटी और एक्ट्रेस पूजा भट्ट ने एक इंटरव्यू में परवीन बाबी के उन मुश्किल दिनों और उनके साथ बिताए पलों को याद किया है। पूजा भट्ट की बातें यह सोचने पर मजबूर करती हैं कि सिनेमा की दुनिया बाहर से जितनी हसीन दिखती है, अंदर से कभी-कभी उतनी ही बेरहम हो जाती है।

बचपन की वो खूबसूरत याद और परफ्यूम का किस्सा

विक्की लालवानी के यूट्यूब चैनल पर दिए एक इंटरव्यू में पूजा भट्ट ने परवीन बाबी से जुड़ी अपनी सबसे पहली और प्यारी याद को साझा किया। पूजा ने बताया कि जब वे एक बहुत छोटी बच्ची थीं, तब उनके पिता महेश भट्ट उन्हें परवीन बाबी के घर ले गए थे।

पूजा भट्ट ने कहा—

“वह एक बेहद खूबसूरत और जिंदादिल महिला थीं। उन्होंने मुझे हमेशा बहुत प्यार दिया। मैं उस बात को कभी नहीं भूल सकती जब उन्होंने बड़े ही प्यार से मुझे एक परफ्यूम गिफ्ट किया था। मेरे मन में परवीन बाबी की यही छवि बसी हुई है—एक ऐसी शानदार और बड़ी स्टार, जिनके स्वभाव में ही दूसरों को खुशी और उपहार देना शामिल था।”

जब परवीन बाबी का मानसिक संतुलन बिगड़ने लगा

इंटरव्यू के दौरान जब पूजा भट्ट से परवीन बाबी के जीवन के सबसे कठिन दौर के बारे में पूछा गया, तो उनका दर्द छलक पड़ा। पूजा ने बताया कि परवीन बाबी का अंतिम समय किसी बड़ी त्रासदी से कम नहीं था। वे मानसिक और शारीरिक, दोनों ही रूपों से बेहद अस्वस्थ हो चुकी थीं।

पूजा भट्ट ने उस दौर के एक बेहद विवादित और झकझोर देने वाले वाकये का जिक्र किया, जब परवीन बाबी ने अमिताभ बच्चन और पूरी फिल्म इंडस्ट्री पर बेहद गंभीर और अजीबोगरीब आरोप लगाए थे।

  • जहर का खौफ और अनोखा खानपान: पूजा ने याद करते हुए बताया कि जब परवीन बाबी एक लंबे समय के बाद वापस आईं, तो वे पूरी तरह बदल चुकी थीं। वे बेहद डरी हुई थीं और उन्हें लगता था कि फिल्म इंडस्ट्री के लोग उनके खाने में जहर मिलाकर उन्हें मारना चाहते हैं। इस खौफ के कारण उन्होंने सामान्य खाना छोड़ दिया था और वे केवल अंडे खाकर दिन काट रही थीं, क्योंकि उन्हें लगता था कि अंडों में कोई मिलावट नहीं कर सकता।

  • अमिताभ बच्चन को लेकर पैरानोइया: वे मान चुकी थीं कि अमिताभ बच्चन उनकी जान के दुश्मन हैं और वे अब भी उन्हें मारना चाहते हैं। पूजा बताती हैं कि एक बार उन्होंने परवीन बाबी को स्टारडस्ट पत्रिका के ऑफिस में देखा, जहां वे खुद ज़ेरॉक्स मशीन का इस्तेमाल कर रही थीं और अमिताभ बच्चन के खिलाफ एक बहुत लंबा इंटरव्यू दे रही थीं।

“लोग दर्द का मजा ले रहे थे और आर्टिकल छाप रहे थे”

पूजा भट्ट ने उस समय के मीडिया और समाज की संवेदनहीनता पर भी करारी चोट की। उन्होंने बताया कि जब परवीन बाबी मानसिक रूप से पूरी तरह बिखर रही थीं और मानसिक पीड़ा में चीख-चीखकर अपनी बातें कह रही थीं, तब वहां मौजूद लोग उनकी मदद करने या उनके दर्द को समझने के बजाय उस पूरे माहौल का मजा ले रहे थे। लोग उस तमाशे को देखकर चटखारेदार आर्टिकल छाप रहे थे और पत्रिकाएं बेच रहे थे। कोई भी उस बीमार इंसान की वास्तविक मदद के लिए आगे नहीं आ रहा था।

जब कोई साथ नहीं था, तब महेश भट्ट ने निभाया इंसानियत का रिश्ता

परवीन बाबी की जिंदगी का अंत जितना दुखद था, उनकी मौत के बाद का मंजर भी उतना ही परेशान करने वाला था। साल 2005 में जब उनका निधन हुआ, तो अस्पताल में उनका पार्थिव शरीर कई दिनों तक लावारिस पड़ा रहा, क्योंकि उनके परिवार या करीबियों में से कोई भी सामने नहीं आया था।

ऐसे नाजुक और दर्दनाक समय में पूजा भट्ट के पिता और फिल्ममेकर महेश भट्ट आगे आए। उन्होंने अपने पुराने रिश्तों और यादों का सम्मान करते हुए अस्पताल से परवीन बाबी का पार्थिव शरीर लिया, सारी कानूनी औपचारिकताएं पूरी कीं और पूरे सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार करवाया। पूजा कहती हैं कि जब दुनिया ने मुंह मोड़ लिया था, तब उनके पिता ने इंसानियत का वह फर्ज निभाया जो हमेशा याद रखा जाएगा।