EV Battery Manufacturing: पेट्रोल-डीजल के इंजन जैसा है ईवी बैटरी का बाजार; जानिए दुनिया में किसका है दबदबा और क्या है भारत का मेगा प्लान

पूरी दुनिया में इस समय इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (EV) की डिमांड बहुत तेजी से बढ़ रही है। ऑटोमोबाइल कंपनियां बजट सेगमेंट से लेकर प्रीमियम और हाई-परफॉर्मेंस वाली इलेक्ट्रिक कारें और स्कूटर बाजार में उतार रही हैं। लेकिन किसी भी इलेक्ट्रिक गाड़ी की जान उसकी बैटरी होती है। जैसे कभी ऑटोमोबाइल जगत के पुराने दौर में दमदार इंजन बनाने वाली कंपनियों का दबदबा हुआ करता था, ठीक वैसे ही आज के ईवी दौर में बैटरी बनाने वाली कंपनियों का बोलबाला है।

वैश्विक स्तर पर ईवी बैटरी की मांग में रिकॉर्ड तोड़ बढ़ोतरी देखी जा रही है। आंकड़ों के मुताबिक, हाल के समय में दुनिया भर में ईवी बैटरियों की कुल खपत 31.7% की सालाना बढ़त के साथ 1,187 GWh तक पहुंच गई है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि दुनिया की सबसे बड़ी ईवी बैटरी कंपनियां कौन सी हैं और इस रेस में हमारा भारत कहां खड़ा है? आइए इसे विस्तार से समझते हैं।

वैश्विक बाजार में चीन का एकतरफा राज

ईवी बैटरी के ग्लोबल मार्केट पर नजर डालें तो इस पर एशियाई कंपनियों, विशेषकर चीन का पूरी तरह से नियंत्रण है। दुनिया की टॉप 10 बैटरी निर्माता कंपनियों में से 6 अकेले चीन की हैं। चीन की केवल दो कंपनियां—CATL और BYD—मिलकर दुनिया के आधे से ज्यादा यानी 55.6% बाजार को अकेले संभालती हैं।

नीचे दी गई तालिका से आप दुनिया की शीर्ष कंपनियों के मार्केट शेयर को आसानी से समझ सकते हैं:

कंपनी का नाम देश मार्केट शेयर (वैश्विक) मुख्य विशेषताएं
CATL चीन 39.2% दुनिया की सबसे बड़ी सप्लायर, यूरोप और चीन की दिग्गज कारें इसी की बैटरी इस्तेमाल करती हैं।
BYD चीन 16.4% दूसरे नंबर की सबसे बड़ी कंपनी, जो बैटरी के साथ-साथ खुद दुनिया की अग्रणी ईवी कार निर्माता भी है।
अन्य प्रमुख खिलाड़ी द. कोरिया / जापान एलजी एनर्जी सॉल्यूशन (LG Energy Solution), एसके ऑन (SK On), सैमसंग और पैनासोनिक भी रेस में शामिल हैं।

चीन के दबदबे का कारण क्या है?

चीन के इस एकतरफा राज के पीछे उनके पास मौजूद सस्ते रॉ मैटेरियल्स (कच्चा माल) की उपलब्धता और उनकी उन्नत LFP (लिथियम आयरन फॉस्फेट) तकनीक है। यह तकनीक न केवल बनाने में सस्ती पड़ती है, बल्कि सुरक्षा के लिहाज से भी काफी स्थिर और सुरक्षित मानी जाती है।

भारत में ईवी बैटरी की मौजूदा स्थिति

ऑटोपंडित्ज की एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, भारत अभी चीन, दक्षिण कोरिया या जापान की तरह ग्लोबल लेवल पर बड़े पैमाने पर ‘बैटरी सेल’ (Cell Manufacturing) बनाने वाला हब नहीं बन पाया है। सीधे शब्दों में कहें तो भारत अभी बैटरी के मूल सेल्स का निर्माण खुद नहीं करता है।

हम आज भी लिथियम सेल्स के लिए चीन और अन्य देशों के आयात पर पूरी तरह निर्भर हैं। भारत में फिलहाल जो काम होता है, उसे ‘बैटरी पैक असेंबलिंग’ कहा जाता है, यानी बाहर से मंगाए गए सेल्स को आपस में जोड़कर भारतीय गाड़ियों के हिसाब से तैयार किया जाता है।

लेकिन यह स्थिति बहुत जल्द बदलने वाली है। भारत सरकार ने देश को आत्मनिर्भर बनाने के लिए ₹18,100 करोड़ के पीएलआई (PLI – प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव) प्रोग्राम की शुरुआत की है। इस भारी-भरकम इंसेंटिव की मदद से देश की बड़ी कंपनियां अब भारत के अंदर ही बड़े पैमाने पर ‘गीगाफैक्ट्रियां’ (Gigafactories) लगा रही हैं।

आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ते कदम: भारत की बड़ी बैटरी कंपनियां

सरकार की मदद और भविष्य की संभावनाओं को देखते हुए भारत के कई बड़े औद्योगिक घराने अब देश के भीतर ही सेल निर्माण की तैयारी में युद्धस्तर पर जुट गए हैं:

  1. टाटा अग्रतास (Tata Agratas): टाटा ग्रुप की यह कंपनी गुजरात में 20 GWh की विशाल क्षमता वाला लिथियम-आयन सेल प्लांट स्थापित कर रही है। घरेलू स्तर पर सेल बनने का सबसे बड़ा सीधा फायदा टाटा मोटर्स की बेहद लोकप्रिय कारों जैसे Nexon.ev, Punch.ev और Tiago.ev को मिलेगा। इससे गाड़ियों की लागत घटेगी और वे आम ग्राहकों के लिए और भी सस्ती हो जाएंगी।

  2. ओला इलेक्ट्रिक (Ola Electric): टू-व्हीलर सेगमेंट की बड़ी कंपनी ओला तमिलनाडु में अपनी मेगा सेल फैक्ट्री का निर्माण कर रही है। कंपनी ने भारत में ही पूरी तरह डिजाइन किया गया अपना ‘4680 भारत सेल’ (4680 Bharat Cell) भी पेश किया है, जो ओला के इलेक्ट्रिक स्कूटरों की कीमत को काफी कम करने में मदद करेगा।

  3. रिलायंस न्यू एनर्जी (Reliance New Energy): मुकेश अंबानी की रिलायंस न्यू एनर्जी भी सरकार की इस पीएलआई (PLI) योजना का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह कंपनी देश में एडवांस केमिस्ट्री सेल (ACC) के बड़े पैमाने पर निर्माण के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार कर रही है।

  4. एक्साइड एनर्जी सॉल्यूशन (Exide Energy Shadows): दशकों से घरों और सामान्य गाड़ियों के लिए एसिड बैटरी बनाने वाली दिग्गज कंपनी एक्साइड अब लिथियम-आयन सेगमेंट में तेजी से आगे बढ़ रही है। मशहूर वैश्विक कार निर्माता हुंडई (Hyundai) और किआ (Kia) ने भारत में बनने वाली अपनी भविष्य की इलेक्ट्रिक कारों के लिए एक्साइड के साथ हाथ मिलाया है, ताकि स्थानीय स्तर पर ही सस्ते LFP सेल्स मिल सकें।

  5. अमारा राजा (Amara Raja Energy & Mobility): ‘एमरोन’ (Amaron) ब्रांड नाम से बैटरी बनाने वाली इस कंपनी ने चीन की दिग्गज कंपनी गोशन हाई-टेक (Gotion High-Tech) के साथ एक बड़ी पार्टनरशिप की है। इस समझौते के जरिए अमारा राजा को दुनिया की बेहतरीन एलएफपी (LFP) बैटरी तकनीक मिल रही है, जिसका इस्तेमाल वे भारत में अपनी गीगाफैक्ट्री में करेंगे।

  6. राजेश एक्सपोर्ट्स (ACC Energy Storage): मुख्य रूप से सोने और आभूषण के बड़े कारोबार के लिए पहचानी जाने वाली इस कंपनी को भी भारत सरकार ने देश के भीतर एडवांस बैटरी सेल निर्माण के लिए पीएलआई स्कीम के तहत शॉर्टलिस्ट किया है।

  7. टीडीएस (TDS Lithium-Ion Battery Gujarat): यह असल में तोशिबा (Toshiba), डेंसो (Denso) और सुजुकी (Suzuki) का एक बेहद मजबूत जॉइंट वेंचर है। यह कंपनी गुजरात में अपना प्लांट संचालित कर रही है और मारुति सुजुकी व टोयोटा की आने वाली आधुनिक हाइब्रिड और पूरी तरह इलेक्ट्रिक कारों के लिए कोर पार्ट्स (जैसे इलेक्ट्रोड्स) का निर्माण स्थानीय स्तर पर ही कर रही है।