
चीन के रोजगार बाजार (जॉब मार्केट) से मंदी और युवाओं की हताशा की एक ऐसी चौंकाने वाली कहानी सामने आई है, जिसने पूरी दुनिया को सन्न कर दिया है। चीन में रोजगार संकट और दफ्तरों के थका देने वाले माहौल का आलम यह है कि पढ़े-लिखे नौजवान और कॉर्पोरेट जगत के चमचमाते व्हाइट-कॉलर कर्मचारी अब महानगरों की आलीशान जिंदगी छोड़कर सुदूर गांवों में भेड़ और बकरियां चराने के लिए तैयार बैठे हैं। इन दिनों चीनी सोशल मीडिया पर इनर मंगोलिया के घास के मैदानों में चरवाहे की नौकरी का एक विज्ञापन आग की तरह वायरल हो रहा है, जिसने देश के आर्थिक संकट की कड़वी हकीकत को सरेआम उजागर कर दिया है।
मंगोलिया के बीहड़ चरागाह के लिए विज्ञापन, वीबो पर 5.9 करोड़ बार देखा गया
पूरा मामला तब शुरू हुआ जब चीन के एक फार्म मालिक जुओ शियाओयोंग ने मंगोलिया के दक्षिणी हिस्से में स्थित अपने विशाल चरागाह के लिए सिर्फ दो चरवाहों (भेड़ चराने वाले) की जरूरत का विज्ञापन निकाला। फार्म मालिक को दूर-दूर तक इस बात का अंदाजा नहीं था कि उनका यह साधारण सा विज्ञापन देश का सबसे बड़ा मुद्दा बन जाएगा। चीन के प्रसिद्ध सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘वीबो’ (जिसे चीन का एक्स या ट्विटर माना जाता है) पर यह विज्ञापन रातों-रात ट्रेंड करने लगा। महज कुछ ही घंटों के भीतर इस पोस्ट को 5.9 करोड़ से ज्यादा व्यूज मिले और इस पर 21,000 से ज्यादा डिस्कशन थ्रेड्स शुरू हो गए। सबसे ज्यादा हैरान करने वाली बात यह रही कि सिर्फ दो खाली पदों के लिए 700 से अधिक उम्मीदवारों ने अपना बायोडाटा भेज दिया।
व्हाइट-कॉलर कर्मचारी और यूनिवर्सिटी टॉपर्स कतार में, आखिर क्यों भेड़ चराने की मची होड़
इस नौकरी के लिए आवेदन करने वालों की लिस्ट देखकर खुद फार्म मालिक जुओ शियाओयोंग के होश उड़ गए। अप्लाई करने वालों में शंघाई, बीजिंग और चोंगकिंग जैसे चमचमाते महानगरों में काम करने वाले कॉर्पोरेट कर्मचारी, भारी-भरकम मशीनों पर काम करने वाले फैक्ट्रियों के मजदूर और नामी यूनिवर्सिटीज के टॉपर व ग्रेजुएट्स शामिल हैं। जुओ के मुताबिक, कुल आवेदकों में से 10 फीसदी युवा तो ऐसे हैं जो हाल ही में कॉलेज की पढ़ाई पूरी कर बड़ी डिग्रियों के साथ बाहर निकले हैं। ये युवा शहरों के भारी कर्ज, फैक्ट्रियों की बंधुआ मजदूरी जैसी शिफ्टों और ऑफिस की गंदी राजनीति से इस कदर तंग आ चुके हैं कि वे अब जानवरों के बीच शांति की जिंदगी तलाश रहे हैं।
1.1 लाख रुपये सैलरी और मुफ्त खाना, लेकिन काम की चुनौतियां भी कम नहीं
आखिर इस नौकरी में ऐसा क्या था जो लोग इसके पीछे दीवाने हो गए? दरअसल, इस चरवाहे की नौकरी के लिए हर महीने 8,000 युआन (भारतीय मुद्रा में करीब 1.1 लाख रुपये) की सैलरी दी जा रही है। इसके साथ ही चरागाह पर रहने और खाने-पीने (किराने का सामान) की मुफ्त सुविधा भी शामिल है। आपको बता दें कि चीन के प्राइवेट सेक्टर का औसत शहरी वेतन करीब 6,000 युआन (लगभग 84 हजार रुपये) है, यानी इस चरवाहे की सैलरी शहरों की आम नौकरियों से कहीं ज्यादा है। हालांकि, यह काम इतना आसान भी नहीं है। गर्मियों के मौसम में 2,000 हेक्टेयर के खुले चरागाह में 3,000 भेड़ों को अकेले संभालना होगा, तो वहीं सर्दियों में जब तापमान माइनस 30 डिग्री सेल्सियस (-30°C) से भी नीचे चला जाता है, तब जमा देने वाली ठंड में इन भेड़ों के बाड़े की भारी साफ-सफाई और चारे का बंदोबस्त करना होगा।
क्या है ‘996 वर्क कल्चर’ और ’35 का श्राप’ जिसने युवाओं का जीना मुहाल किया
चीन में आधिकारिक तौर पर बेरोजगारी दर 5 फीसदी के आसपास बताई जाती है, लेकिन असल समस्या प्राइवेट सेक्टर के काम करने के अमानवीय तौर-तरीकों की है। चीन का कॉर्पोरेट जगत कुख्यात ‘996 वर्क कल्चर’ पर चलता है, जिसका मतलब है सुबह 9 बजे से रात 9 बजे तक, हफ्ते में 6 दिन लगातार काम करना। इस नौकरी के लिए आवेदन करने वाले 21 साल के जेम्स गुओ ने बताया कि वह पहले एक कंटेनर बनाने वाली फैक्ट्री में रोज 13 घंटे पेंच कसने का काम करते थे, जिससे उनके हाथों में छाले पड़ गए थे और उन्हें वॉशरूम तक जाने की फुर्सत नहीं मिलती थी। एक अन्य 28 वर्षीय महिला वू, जो ई-कॉमर्स सेक्टर में 10,000 युआन कमाती थीं, उन्होंने बताया कि वे शहरी आपाधापी और टॉक्सिक लोगों से दूर एक सुकून भरी जिंदगी चाहती हैं।
इसके अलावा चीन के युवाओं को सबसे ज्यादा डर ’35 के श्राप’ (35 का अभिशाप) से लगता है। 700 आवेदकों में से आधे से ज्यादा लोग 1990 के दशक में पैदा हुए युवा हैं। चीन के जॉब मार्केट की यह कड़वी सच्चाई है कि कंपनियां 35 साल की उम्र पार कर चुके अनुभवी लोगों को नौकरी पर रखने से कतराती हैं। अब एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) के बढ़ते दखल, मिडिल ईस्ट के युद्ध के कारण बढ़ती मैन्युफैक्चरिंग लागत और इस साल जॉब मार्केट में उतरने वाले 1.27 करोड़ नए ग्रेजुएट्स की फौज के कारण युवाओं की यह हताशा चरम पर पहुंच गई है।
किसे मिली आखिरकार चरागाह की यह ड्रीम जॉब
देश भर से आए 700 से ज्यादा हाई-प्रोफाइल और पढ़े-लिखे आवेदनों के बावजूद, फार्म मालिक जुओ ने बेहद व्यावहारिक फैसला लिया। उन्होंने किसी भी शहरी युवा, कुंवारे लड़के या यूनिवर्सिटी टॉपर को इस कठिन काम के लायक नहीं समझा। जुओ ने अंत में कृषि और पशुपालन का पुराना अनुभव रखने वाले चार लोगों (दो शादीशुदा जोड़ों) को इस नौकरी पर रख लिया, जो 1980 के दशक में पैदा हुए थे और जमीनी दिक्कतों को समझते थे। इसके अलावा उन्होंने बैकअप के तौर पर 40 अन्य शादीशुदा जोड़ों को शॉर्टलिस्ट किया है, लेकिन उन्होंने साफ कर दिया है कि चरागाह की जिंदगी रील जैसी खूबसूरत नहीं बल्कि बेहद थकाऊ और अनुशासित होती है, जिसे कोई नौसिखिया नहीं संभाल सकता।
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